{"_id":"5976ee9e4f1c1bc91f8b45bf","slug":"20-big-things-about-the-newly-elected-president-kovind-s-speech-that-you-should-know","type":"story","status":"publish","title_hn":"देश के 14वें राष्ट्रपति कोविंद की पहली Speech- मैं गांव की मिट्टी में पला, हर नागरिक राष्ट्रनिर्माता","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
देश के 14वें राष्ट्रपति कोविंद की पहली Speech- मैं गांव की मिट्टी में पला, हर नागरिक राष्ट्रनिर्माता
amarujala.com- Written by: ऋतुराज त्रिपाठी
Updated Tue, 25 Jul 2017 03:15 PM IST
विज्ञापन
kovind
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संसद के सेंट्रल हॉल में रामनाथ कोविंद ने भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। आइये जानते हैं उनके भाषण की 20 बड़ी बातें..।
विज्ञापन
1- देश के सवा सौ करोड़ लोगों का आभार, जिन्होंने मुझे इस पद के काबिल समझा ।
2- मेरी यात्रा बहुत लंबी रही, मैं गांव में मिट्टी के घर में पला-बढ़ा ।
3- देश का हर नागरिक राष्ट्रनिर्माता है ।
4- भारत की उपलब्धियां सदी की दिशा तय करेंगी।
5- देश की सफलता का मंत्र इसकी विविधता है।
6- एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करना ही लोकतंत्र की खूबसूरती है ।
7- 21वीं सदी का भारत चौथी औद्योगिक क्रांति के साथ पुरातन संस्कृति को साथ लेकर चलेगा।
8- हमें गर्व है देश के प्रत्येक नागरिक पर और अपने काम पर जो हम रोज करते हैं।
9- एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करना ही लोकतंत्र की खूबसूरती है।
10- भारत के प्रत्येक नागरिक, संस्कृति, विविधता और सर्वधर्म समभाव पर गर्व है।
11-देश की सीमाओं की रक्षा करने वाला सशस्त्रबल राष्ट्रनिर्माता है।
12- देश के किसान और अथक परिश्रम करने वाला पुलिसबल राष्ट्रनिर्माता है।
13-सुदूर गांवों में मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टर्स राष्ट्रनिर्माता है।
14- भारत को तरक्की की राह ले जाने वाले वैज्ञानिक राष्ट्रनिर्माता है।
15-आम से अचार बनाने वाला और कारपेट बुनने वाला भी राष्ट्रनिर्माता है।
16- कश्मीर मामले पर हमारी जिम्मेदारी अहम है।
17- हम विश्व का नेतृत्व करने की काबिलियत रखते हैं।
18- पूरी विनम्रता के साथ ये पद ग्रहण कर रहा हूं।
19-सरकार सहायक हो सकती है, वो समाज को दिशा दे सकती है।
20- महात्मा गांधी और मदन मोहन मालवीय के सपनों का भारत होगा।