पुलवामा: ऐसे 'सफर' पर चले गए 40 जवान, जहां से कभी नहीं मिली घर आने की 'इजाजत'
वो दिन...काश...वो दिन कभी आता ही नहीं...क्योंकि उस दिन हर जवान थोड़ा गमगीन था...क्योंकि उस बस में सवार हर जवान एक बार फिर अपने घरवालों से दूर आने की वजह से थोड़ा उदास था...वैसे यह उदासी पोस्टिंग पर पहुंचकर छंट जानी थी...क्योंकि उसके बाद उन सभी को भारत माता की रक्षा में लग जाना था...लेकिन वो दिन उन 40 जवानों को इतनी दूर ले गया, जहां से वापस घर जाने की इजाजत उन्हें कभी नहीं मिली...वो दिन...आज का ही दिन है, लेकिन साल दूसरा है...हां...यह वही दिन है, जो जब भी आता है...दिल में गुस्से का सैलाब ला देता है...क्योंकि इसी दिन पुलवामा में सबसे बड़ा आतंकी हमला हुआ था...इसी दिन भारत मां के 40 लाल अपने वतन पर फनां हो गए थे...आज का दिन बेहद गमगीन है, क्योंकि यह वही दिन है...
ऐसे हुआ था हमला
तारीख 14 फरवरी...दिन गुरुवार...वक्त दोपहर 3:30 बजे...कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के जवान 78 गाड़ियों से अपनी पोस्ट पर जा रहे थे। अचानक उनके काफिले की बस से एक गाड़ी टकराई और भयंकर धमाका हो गया। धुआं छंटा तो सड़क पर क्षत-विक्षत शव पड़े थे। दरअसल, यह कश्मीर में जवानों पर हुआ तीन दशक का सबसे बड़ा हमला था। इसे जैश-ए-मोहम्मद ने अंजाम दिया था और पूरा देश सदमे में आ गया। इस हमले को महज 20 साल के आदिल अहमद डार ने अंजाम दिया था। उसने 350 किलो विस्फोटक से भरी एसयूवी को सीआरपीएफ के काफिले की एक बस से टकरा दिया।