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दुखद: 1971 की लड़ाई के हीरो लेफ्टिनेंट जनरल पिंटो का निधन
Mon, 29 Mar 2021 03:36 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी , पुणे।
एजेंसी , पुणे।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 29 Mar 2021 03:36 AM IST
सार
- 97 वर्षीय जनरल के नेतृत्व वाली डिविजन ने 14 दिन में जीते थे दो परमवीर व 9 महावीर चक्र समेत196 वीरता पदक
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध में एक लीजेंडरी जीत के लिए इंफेंट्री डिविजन का नेतृत्व करने वाले सैन्य हीरो लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) वाग पिंटो का पुणे में निधन हो गया।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि निधन के समय जनरल पिंटो 97 वर्ष के थे। उन्होंने कहा, जनरल पिंटो ने बांग्लादेश के जन्म की निर्णायक कहानी लिखने वाले बसंतर के युद्ध में 54 इंफेंट्री डिविजन का नेतृत्व किया था।
जनरल पिंटो ने अग्रिम मोर्चे पर रहकर अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाया था। इस मोर्चे पर उनका नारा था 'चाहे जो भी हो।’ इस लड़ाई में पिंटो के नेतृत्व वाली डिविजन ने 14 दिन के अंदर जबरदस्त साहस के लिए 196 वीरता पदक हासिल किए थे, जिनमें दो परमवीर चक्र और 9 महावीर चक्र शामिल थे।
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रविवार को जनरल पिंटो की शोक सभा में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नैन समेत बहुत सारे सैन्य अधिकारी पहुंचे।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने रविवार को बताया कि निधन के समय जनरल पिंटो 97 वर्ष के थे। उन्होंने कहा, जनरल पिंटो ने बांग्लादेश के जन्म की निर्णायक कहानी लिखने वाले बसंतर के युद्ध में 54 इंफेंट्री डिविजन का नेतृत्व किया था।
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जनरल पिंटो ने अग्रिम मोर्चे पर रहकर अपने सैनिकों का हौसला बढ़ाया था। इस मोर्चे पर उनका नारा था 'चाहे जो भी हो।’ इस लड़ाई में पिंटो के नेतृत्व वाली डिविजन ने 14 दिन के अंदर जबरदस्त साहस के लिए 196 वीरता पदक हासिल किए थे, जिनमें दो परमवीर चक्र और 9 महावीर चक्र शामिल थे।
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रविवार को जनरल पिंटो की शोक सभा में उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नैन समेत बहुत सारे सैन्य अधिकारी पहुंचे।