कोरोना से जंग: दिल्ली की यह 'टीम 19' अब तक चार हजार लोगों को पहुंचा चुकी है प्राणवायु
टीम के सदस्य दीपांकर अग्रवाल कहते है कि कुछ दिनों पूर्व हमारे किसी करीबी का समय से ऑक्सीजन नहीं मिलने के चलते निधन हो गया था। इसके बाद सभी 19 दोस्तों ने सोचा कि क्यों न इस संकट के घड़ी में लोगों को फ्री में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करवाए जाएं। हमने ताबड़तोड़ 200 ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदे। उन्हें हिमाचल और उत्तराखंड के आक्सीजन प्लांट से रीफिल करवाया ओर दिल्ली के छोटे-बड़े अस्पतालों में देना शुरू कर दिया...
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कोरोना की दूसरी लहर और सरकारी बदइंतजामी से पूरा देश कराह रहा है। चाहे बड़ा अस्पताल हो, छोटे क्लीनिक या फिर होम आइसोलेशन में इलाज करवा रहे लोग, हर कोई ऑक्सीजन के लिए तड़प रहा है। दिल्ली-एनसीआर में भी सांसों के इस आपातकाल से कोरोना मरीजों की परेशानी बढ़ती जा रही है। ऑक्सीजन की कमी से कोई अपने सगे-संबंधियों को खो रहा है तो कोई उनकी जान बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर लेने के लिए दर-दर भटक रहा है। लेकिन संकट की इस घड़ी में भी कुछ लोग अपने घर परिवार छोड़कर और बिना मोह के लोगों की मदद में जुटे हुए नजर आ रहे हैं। दिल्ली के 19 युवा व्यापारी और उनका परिवार भी ऐसे ही मददगारों शामिल है। जो छोटे-बड़े सभी हॉस्पिटलों को ऑक्सीजन सिलेंडर फ्री में मुहैया कराने का काम कर रहे हैं।
इन लोगों ने जब किसी अपने को कोरोना महामारी में खोया तो सोचा कि इस संकट की घड़ी में लोगों की मदद की जाए और उन्हें फ्री में प्राणवायु उपलब्ध करवाई जाए। इसके बाद सभी 19 दोस्त और उनके परिवार ने मिलकर एक ही रात में धनराशि एकत्र की। इसके बाद छोटे अस्पतालों से ऑक्सीजन सिलेंडर की मांग पूछना शुरू कर दी। फिर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऑक्सीजन प्लांट से सिलेंडर भरवाकर दिल्ली के छोटे-बड़े अस्पतालों में सिलेंडर पहुंचाना शुरू कर दिए। इस काम में परिवार के लोग भी कंधे से कंधे मिलाकर काम कर रहे हैं। कोई मरीजों को अस्पताल में भर्ती करवाने में मदद कर रहा है, तो कोई लोगों के घर तक उनकी जरुरत के सामान पहुंचाने में।
अमर उजाला से चर्चा करते हुए टीम के सदस्य दीपांकर अग्रवाल कहते है कि कुछ दिनों पूर्व हमारे किसी करीबी का समय से ऑक्सीजन नहीं मिलने के चलते निधन हो गया था। इसके बाद सभी 19 दोस्तों ने सोचा कि क्यों न इस संकट के घड़ी में लोगों को फ्री में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करवाए जाएं। हमने ताबड़तोड़ 200 ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदे। उन्हें हिमाचल और उत्तराखंड के आक्सीजन प्लांट से रीफिल करवाया ओर दिल्ली के छोटे-बड़े अस्पतालों में देना शुरू कर दिया।
टीम के सदस्य गौरव अग्रवाल आगे बताते हैं कि 25 अप्रैल से हमारी टीम ये ही काम कर रही है। हम लोगों ने सबसे पहले उन हॉस्पिटल प्रबंधन से चर्चा कि जिन्होंने ऑक्सीजन की कमी के कारण अस्पताल बंद कर दिए थे। हमने उनसे निवेदन किया कि अस्पताल दोबारा शुरू करें। हमारी टीम ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने में मदद करेगी। अभी तक टीम की तरफ से आसपास के छोटे अस्पतालों के अलावा सर गंगाराम अस्पताल, महाराजा अग्रेसन हॉस्पिटल, गुड़गांव के फोर्टिस हॉस्पिटल में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करवाए जा चुके हैं। रोज करीब 600 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर हम पहुंचा देते हैं। हम अभी तक चार हजार से ज्यादा अस्पतालों में सिलेंडर उपलबध करवा चुके है।
टीम के अन्य सदस्य शम्मी अग्रवाल बताते है कि रोहिणी इलाके में हमने कलेक्शन पाइंट बनाया हुआ है। कालाबाजारी के डर से हम लोग किसी भी व्यक्ति को हाथ में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं देते है। जरुरतमंद से आग्रह करते हैं कि अस्पताल में जहां मरीज भर्ती है वहां से लिखवाकर हमें भेज दे। हमारी टीम उक्त मरीज के नाम पर ऑक्सीजन सिलेंडर 24 घंटे के भीतर उपलब्ध करवा देगी। हॉस्पिटल के कागज और मरीज की स्थिति देखने के बाद हम संबंधित व्यक्ति को अस्पताल में सिलेंडर मुहैया करवा रहे हैं।
सुबह आठ से रात 8 बजे तक पहुंचाते है सिलेंडर
मनीष मदान का कहना है कि 19 दोस्त और उनके परिवार के सदस्यों को हमने तीन टीमों में बांटा हुआ हैं। ये तीनों टीमें एक साथ समानांतर काम करती है। एक टीम सोशल मीडिया, फोन और लोगों के संपर्क में होती है। जो जांचती है कि किस अस्पताल में किस मरीज को ऑक्सीजन की जरूरत है। दूसरी टीम अस्पताल से सिलेंडर लेना और उन्हें अस्पतालों तक पहुंचाने का काम देखती है। वहीं तीसरी टीम हिमाचल और उत्तराखंड के ऑक्सीजन प्लांट्स से सिलेंडर को दिल्ली लाने ले जाने का काम देखती है।
सिद्धार्थ अग्रवाल ने बताया कि जरूरतमंदों की मदद के लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फीनिक्स ऑक्सीजन सेवा से हमारा ग्रुप उपलब्ध है। टीम सुबह 8 बजे से रात की 8 बजे तक अस्पतालों को सिलेंडर भेजने का काम करती है। इस काम में 19 दोस्तों की कंपनी का स्टाफ भी सक्रियता से लगा हुआ है। हम दिल्ली-एनसीआर में ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद कर सकें, इसके लिए सोशल मीडिया प्लेटफार्म के जरिए दान भी मांग रहे हैं।
टीम के महिला सदस्य शैलजा मित्तल का कहना है कि हमारी टीम ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने के अलावा मरीज को अस्पताल में कैसे भर्ती होना है इसमें भी मदद कर रही है। वहीं, हमारी इस मुहिम के साथ अब बॉलीवुड की कई हस्तियां भी जुड़ रही हैं।
30 घंटे में दिल्ली पहुंचती है ऑक्सीजन
प्रशांत नारंग और राहुल अग्रवाल ने बताया कि हमारी टीम के सदस्यों के दो ट्रक सुबह और दो ट्रक शाम को दिल्ली से हिमाचल और उत्तराखंड के ऑक्सीजन प्लांट के लिए जाते हैं। प्लांट पर हम पहले ही सूचना देते हैं कि इस हॉस्पिटल के इतने सिलेडर आ रहे हैं। करीब 30 घंटे के अंदर ट्रक दिल्ली आ जाते हैं। इसके बाद हम अस्पतालों को सप्लाई कर देते हैं। कुछ छोटे अस्पताल जहां संसाधनों की कमी होती है, वहां हमारी टीम खुद ही सिलेंडर पहुंचा देती है। बाकि अन्य अस्पताल वाले हमारे रोहिणी के कलेक्शन सेंटर से ले जाते हैं।