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मूक-बधिर रेप पीड़िता को 15 लाख एकमुश्त मुआवजा

Wed, 03 Jan 2018 03:54 AM IST
एजेंसी / नई दिल्ली
एजेंसी / नई दिल्ली Updated Wed, 03 Jan 2018 03:54 AM IST
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15 lakh lump sum compensation to mute-deafed rape victim
supreme court
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले में बदलाव करते हुए प्रदेश सरकार को एक मूक-बधिर रेप पीड़िता को एकमुश्त 15 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। दुष्कर्म पीड़िता ने 2016 में एक बच्ची को जन्म दिया था।
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शीर्ष अदालत ने कहा कि शुरू में वह हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहता थी, लेकिन बाद में उसे लगा कि पीड़िता के लिए मुआवजे के भुगतान का कोई उचित इंतजाम होना चाहिए। तब सुप्रीम कोर्ट ने 80 फीसदी दिव्यांग पीड़िता को आजीवन 30000 रुपये प्रतिमाह मुआवजा देने के हाईकोर्ट के फैसले में बदलाव किया।
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न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और संजय किशन कौल की पीठ ने कहा कि हमने हाईकोर्ट के फैसले में बदलाव करते हुए राज्य सरकार को एकमुश्त 15 लाख रुपये देने का निर्देश दिया है। पीठ ने हिमाचल प्रदेश के सदस्य सचिव की सहमति से उस धन को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में पीड़िता के नाम मासिक ब्याज के भुगतान वाली सावधि जमा योजना में जमा करवाने को कहा।
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पीठ ने कहा कि उस जमा का मासिक ब्याज पीड़िता के अभिभावकों के जीवित रहने तक उन्हें दिया जाए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि समय-समय पर यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए कि वह राशि पीड़िता के कल्याण के लिए खर्च किए जा रहे हैं या नहीं।

पीड़िता के मूक-बधिर होने का फायदा उठाया

15 lakh lump sum compensation to mute-deafed rape victim
supreme court
हिमाचल सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए कहा था कि ऐसे मामलों में यह सर्वाधिक मुआवजे की योजना के विपरीत है, जिसके तहत पीड़िता की मौत या 80 फीसदी दिव्यांगता की स्थिति में 1 लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है।

इस मामले में सत्र अदालत ने आरोपी रजनीश उर्फ विक्की को 10 साल की कैद और 20000 रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई थी। एफआईआर में पीड़िता के अभिभावकों ने कहा था कि अभियुक्त ने पीड़िता के मूक-बधिर होने का फायदा उठा कर उसका कई बार रेप किया और उसे गर्भवती बना दिया।
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