ब्रिटेन में भारतीय बोले पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियां सुरक्षित नहीं
ब्रिटेन में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और 'ललकार' नामक सामाजिक संगठन ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर जारी अत्याचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने लंदन स्थित पाकिस्तान दूतावास के बाहर जस्टिस फॉर महक कुमारी के नारे लगाए।
विस्तार
ब्रिटेन में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और 'ललकार' नामक सामाजिक संगठन ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर जारी अत्याचार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शनकारियों ने लंदन स्थित पाकिस्तान दूतावास के बाहर जस्टिस फॉर महक कुमारी के नारे लगाए। भारतीयों ने कहा कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं हैं। आए दिन वहां अल्पसंख्यक समुदाय की लड़कियों को अगवा कर जबरन धर्म परिवर्तन कराकर उन्हें इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया जाता है और बाद में उनकी शादी किसी मुस्लिम से कर दी जाती है। पाकिस्तान में मानवाधिकारों को आए दिन ताक पर रख ऐसी घटनाएं होती हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दूतावास अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही बर्बरता का जवाब दे। जर्मनी ,ब्रिटेन और आयरलैंड से आकर लोगों ने प्रदर्शन में भाग लिया।
दरअसल मामला पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जैकबाबाद जिले में 15 जनवरी का है जहां 14 साल की हिंदू लड़की महक कुमारी की शादी एक अधेड़ मुस्लिम अली रजा से होने से बचाया गया। लड़की ने बताया की इस्लामिक कट्टरपंथियों ने उस पर धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाब बनाया था। सिंध हाई कोर्ट ने मामले को लरकाना जिला कोर्ट में 11 दिनों में जांच कर फैसला सुनाने के लिए कहा है। 14 साल की बच्ची महक कुमारी मामले पर पाकिस्तानी इस्लामी कट्टरपंथियों का कहना है कि लड़की ने अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन कराया था।अब झूठ बोलकर इस्लाम को अपमानित कर रही है।इस्लाम का अपमान करने के लिए लड़की महक कुमारी को मौत की सजा दी जाए।
सिंध के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर सलीम ने कहा कि अल्पसंख्यक क्रिश्चियन और हिंदू समुदाय के लोगों के जबरन धर्मपरिवर्तन की घटनाएं पूरे पाकिस्तान से सामने आती रहतीं हैं। ऐसी घटनाओं से दुनिया भर में पाकिस्तान की किरकिरी होती है। पाकिस्तान सरकार ऐसी शर्मनाक घटनाओं पर चुप्पी साध लेती है। वहां की सरकार ऐसे कुकृत्यों पर कड़ा रूख न अपनाकर इस्लामी कट्टरपंथियों को और बढ़ावा देती है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान तो 'मदीना की रियासत' का हवाला देते थे क्या ऐसी थी मदीना की रियासत।