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बैंकों की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने विजय माल्या के खिलाफ नोटिस जारी किया
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 09 Mar 2016 06:36 PM IST
सार
- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
- 13 बैंको ने दायर की याचिका
- सरकार कार्रवाई के मूड में
- कहां गए किसी को पता नहीं
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विजय माल्या
- फोटो : Getty Images
विस्तार
किंगफिशर के मालिक विजय माल्या को देश से बाहर जाने से रोकने के लिए 13 बड़े बैंको की याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया। कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए यह भी कहा कि अगर माल्या देश से बाहर भी हों तो उन्हें यह नोटिस भेजा जाएगा।
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गौरतलब है कि हाल ही में यह खबर आई थी कि माल्या कुछ दिन पहले ही देश छोड़कर जा चुके हैं। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को जानकारी दी है कि विजय माल्या 2 मार्च को ही कोर्ट देश छोड़ चुके हैं।
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आपको बता दें कि बैंको ने सुप्रीम कोर्ट में जो अर्जी दाखिल की थी जिसमे यह दावा किया गया है कि विजय माल्या ने पर कई बैंको का लगभग 9 हजार करोड़ का बकाया है, इसलिए उन्हें देश के बाहर जाने से रोकना चाहिए। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी इन बैंको की अगुवाई कर रहे हैं, जिससे यह पता चलता है कि सरकार भी माल्या के खिलाफ कार्रवाई के मूड में है।
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डीआरटी ने पासपोर्ट जब्त करने से किया था इनकार
विजय माल्या
- फोटो : Getty Images
वहीं माल्या की प्रवक्ता का कहना है कि उन्हें इस बात की बिल्कुल भी जानकारी नहीं है कि वे कहां गए हैं। माल्या से उनकी बात केवल ईमेल के माध्यम से ही होती है।
माल्या ने हाल ही में यह इच्छा जाहिर की थी कि वह लंदन में रहने जा सकते हैं। उन्होंने यह फैसला युनाइटेड ब्रेवरीज कंपनी छोड़ने के एवज में डियागियो कंपनी से मिलने वाले 515 करोड़ रुपए के बाद किया था।
रोहतगी ने मंगलवार को चीफ जस्टीस टीएस ठाकुर और यूयू ललित की पीठ के सामने यह मुद्दा उठाते हुए उनके पासपोर्ट को जब्त करने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि माल्या के इसी फैसले की वजह से बैंकों ने कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) में गुहार लगाई थी लेकिन उसने पासपोर्ट जब्त करने के आदेश देने से इनकार कर दिया था।
माल्या ने हाल ही में यह इच्छा जाहिर की थी कि वह लंदन में रहने जा सकते हैं। उन्होंने यह फैसला युनाइटेड ब्रेवरीज कंपनी छोड़ने के एवज में डियागियो कंपनी से मिलने वाले 515 करोड़ रुपए के बाद किया था।
रोहतगी ने मंगलवार को चीफ जस्टीस टीएस ठाकुर और यूयू ललित की पीठ के सामने यह मुद्दा उठाते हुए उनके पासपोर्ट को जब्त करने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि माल्या के इसी फैसले की वजह से बैंकों ने कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) में गुहार लगाई थी लेकिन उसने पासपोर्ट जब्त करने के आदेश देने से इनकार कर दिया था।