नोटबंदी के कारण 13 और लोगों को गंवानी पड़ी जान
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500 व 1000 के पुराने नोटों का चलन से बाहर होना लोगों की परेशानी बढ़ाने के साथ ही उनकी जान पर भी भारी पड़ रहा है। नोटबंदी के चक्कर में देशभर में 13 और लोगों को जान गंवानी पड़ी है। दिल्ली, बरेली, बलिया व आजमगढ़ में चार लोगों की हार्ट अटैक से मौत हो गई, जबकि मुरादाबाद, अमरोहा, लखीमपुर खीरी, बदायूं व हरिद्वार में खुले रुपये के अभाव में इलाज नहीं मिल पाने से पांच की जान चली गई। महाराष्ट्र व हैदराबाद में भी तीन लोगों को जान गंवानी पड़ी है।
पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान में रुपये बदलने के लिए बैंक ऑफ इंडिया की लाइन में लगे सउद-उर-रहमान (48) की बुधवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि पिछले तीन दिन से वह बैंक की लाइन में लग रहे थे, लेकिन उनका नंबर नहीं आ पा रहा था। घर में बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थी।
वहीं बरेली के थाना बारादरी के मोहल्ला कांकरटोला निवासी ऑटो रिक्शा चालक 50 वर्षीय खलीक अहमद पुराने नोट बदलने के लिए मॉडल टाउन में भारतीय स्टेट बैंक की शाखा के बाहर लाइन में खडे़ थे। उन्हें बेटी की फीस जमा करने के लिए रुपयों की जरूरत थी। इसी बीच चक्कर लाइन में ही चक्कर आने पर बेहोश होकर वह जमीन पर गिर पड़े। गुस्साई भीड़ ने बुधवार दोपहर करीब एक बजे चारपाई पर शव रखकर ईंट पजाया चौराहे पर सड़क जाम करके हंगामा खड़ा कर दिया।
इसी तरह नोटबंदी के कारण तिलक के लिए रुपये का इंतजाम नहीं कर पाने से परेशान बलिया के सहतवार कस्बा निवासी सुरेश स्वर्णकार (40) की रात हार्टअटैक से जान चली गई। आजमगढ़ के महराजगंज बाजार निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक मो. इश्तेयाक (75) भी बुधवार की दोपहर अपनी बेटी रेशुन्निशा के 29 हजार पांच सौ रुपये जमा करने काशी गोमती संयुक्त ग्रामीण बैंक में लाइन में खड़े थे। दोपहर करीब बारह बजे वह अचानक गिर पड़े और उनकी मौत हो गई।
इलाज के अभाव में गई पांच की जान
अमरोहा के मनी धनौरा थाना क्षेत्र के एक गांव लोहर्रा गांव निवासी राजपाल (55) को खुले नोट न होने की वजह से उसे उपचार के लिए बाहर न ले जा सके। रात को उनकी मौत हो गई। इसी तरह एक सप्ताह पूर्व बुखार से पीड़ित मुरादाबाद के भोजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम गनीमतनगर निवासी भूरा (45) की हालत बिगड़ गई, जिसे अस्पताल में लेकर परिजन पहुंचे लेकिन पुराने नोटों से उसे दवा नहीं मिली तो परिजन उसे घर ले जा रहे थे। लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
हरिद्वार के झबरेड़ा में भी खाताखेड़ी गांव निवासी जिंदा हसन की 12 वर्षीय बीमार बेटी नीर ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया। उसकेे बैंक से पैसा लेने गए थे, तब तक देर हो चुकी थी। इसी तरह लखीमपुर खीरी के घनश्यामपुरवा में 55 वर्षीय श्रीराम ने बुधवार सुबह दम तोड़ दिया। उनकी पुत्रवधू पैसे निकालने के लिए बैंक की लाइन में लगी थी। बदायूं के यूसुफनगर निवासी शाहिद हुसैन की पत्नी प्रसूता नईमा ने भी जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। शाहिद के पास छोटे नोट नहीं थे, वह कई दुकानों पर भटका।
उधर, महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में स्टेट बैंक की लाइन में लगे 70 वर्षीय दिगंबर मरीबा की मौत हो गई। ऐसी ही एक घटना हैदराबाद में भी घटी जहां किसान ने अपने परिवार को जहर देने के बाद खुद जहर खा लिया, जिससे किसान और उसके पिता की मौत हो गई।
हालांकि उसकी पत्नी और बेटा अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग से जूझ रहे हैं। किसान के पास छह एकड़ जमीन थी जिसे वह लोन चुकाने के लिए 6-7 लाख रुपए प्रति एकड़ के दाम पर बेचना चाहता था। लेकिन पिछले दो दिनों से कई लोगों ने उसे बताया कि नोटबंदी के चलते जमीन की कीमत 2 से 3 लाख रुपये प्रति एकड़ हो गई है।