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आरएसएस के 100 साल: शताब्दी वर्ष में एक लाख संगठन केंद्रों तक पहुंचने का लक्ष्य, दो साल के लिए नियुक्त होंगे विशेष कार्यकर्ता
सार
आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की बैठक 11 से 13 मार्च के बीच गुजरात में आयोजित की जाएगी। कर्णावती, अहमदाबाद में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में संगठन के विस्तार को लेकर व्यापक चर्चा होगी। इसमें संगठन का शताब्दी वर्ष पूरा होने पर विभिन्न कार्यक्रमों की चर्चा भी की जाएगी...
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
- फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
विस्तार
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) अपने शताब्दी वर्ष 2025 तक देश के एक लाख केंद्रों तक विस्तार करने की योजना बना रहा है। इसके लिए अनुषांगिक संगठनों के सहारे वह समाज के विभिन्न वर्गों में अपनी पैठ बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है। अपेक्षित केंद्रों तक पहुंचने की योजना पूरी करने के लिए विशेष कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो शताब्दी वर्ष के अंतिम दो वर्षों में संगठन के लिए काम करेंगे। ये कार्यकर्ता समाज के विभिन्न प्रभावशाली वर्गों से होंगे। संगठन इस समय देश के 55 हजार स्थानों पर मंडल स्तर पर शाखाएं संचालित करता है। इस क्षमता को बढ़ाकर लगभग दो गुना करने की तैयारी है।
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आरएसएस की प्रतिनिधि सभा की बैठक 11 से 13 मार्च के बीच गुजरात में आयोजित की जाएगी। कर्णावती, अहमदाबाद में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में संगठन के विस्तार को लेकर व्यापक चर्चा होगी। इसमें संगठन का शताब्दी वर्ष पूरा होने पर विभिन्न कार्यक्रमों की चर्चा भी की जाएगी। इसके माध्यम से लोगों के बीच आरएसएस और समसामयिक सामाजिक मुद्दों को लेकर जागृति भी पैदा की जाएगी। शताब्दी वर्ष में सभी अनुषांगिक संगठन अपने-अपने स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन भी करेंगे।
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सामान्य तौर पर प्रतिनिधि सभा की बैठक में मूल संगठन और अनुषांगिक संगठनों के 1490 सदस्यों के शामिल होने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन कोरोना काल को ध्यान में रखते हुए पिछली बार यह संख्या 500 तक सीमित कर दी गई थी। शेष सदस्य ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस बार कोरोना संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में रहने पर सभी अपेक्षित सदस्यों को आमंत्रित किया जाएगा। लेकिन संक्रमण ज्यादा गंभीर रहने पर सरकारी दिशा निर्देशों को ध्यान में रखते हुए सीमित संख्या में प्रतिनिधियों को बुलाया जा सकता है।
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संघ के सूत्रों के अनुसार, संगठन की योजना समाज के सभी वर्गों तक सर्वस्पर्शी संपर्क स्थापित करने की है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों में पढ़े-लिखे और योग्य लोगों से संपर्क स्थापित कर उन्हें समाज सेवा के विभिन्न कार्यों से जोड़ा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह प्रयास और तेज किये जाने की संभावना है।