{"_id":"5d9bce9d8ebc3e01586f0a7b","slug":"1-85-crore-fraud-in-mi-172-helicopter-repair-case-filed-against-officials","type":"story","status":"publish","title_hn":"एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मरम्मत में 1.85 करोड़ की हेराफेरी, अधिकारियों पर केस दर्ज","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
एमआई-17 हेलीकॉप्टर की मरम्मत में 1.85 करोड़ की हेराफेरी, अधिकारियों पर केस दर्ज
Tue, 08 Oct 2019 05:17 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 08 Oct 2019 05:17 AM IST
सार
- पवनहंस के अधिकारियों पर हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने दर्ज किया केस
- एमआई-172 हेलिकॉप्टर की मरम्मत में 1.85 करोड़ रुपये की हेराफेरी
- सीबीआई ने पवनहंस के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
हेलिकॉप्टर सेवा देने वाली निजी कंपनी पवनहंस के अधिकारियों पर फंड की हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने केस दर्ज किया है। आरोप है कि एमआई-17 हेलिकॉप्टर की मरम्मत के लिए अधिकारियों ने 1.85 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है। ये रुपये रूसी कंपनी के खाते में जाने थे, लेकिन इसे किसी इंडोनेशियाई खाते में डाल दिया गया।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक पवनहंस ने 20 मई, 2015 को रूसी कंपनी क्लिमोव जेएससी से तीन एमआई-172 हेलिकॉप्टर की सर्विस और मरम्मत का करार किया। करार नौ करोड़ रुपये का था। करार के मुताबिक पवनहंस को इसका 30 फीसदी अग्रिम भुगतान करना था। कंपनी की ओर से पवनहंस को बैंक के ब्योरे सहित इनवॉइस भेजा गया, लेकिन रुपये खाते में जमा नहीं कराए गए। कंपनी ने अगले साल रिमाइंडर भेजा।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक पवनहंस ने भुगतान इसलिए नहीं किया, क्योंकि इंजन नहीं भेजा गया था। पवनहंस ने 27 फरवरी 2016 को इंजन भेजा, जिसकी पावती भी रूसी कंपनी की ओर से भेजा गया। कंपनी के उसी ईमेल से अग्रिम भुगतान की 30 फीसदी राशि इंडोनेशिया के बैंक मंडी खाते में जमा करवाने को कहा गया। पवनहंस ने मेल के निर्देश के मुताबिक मार्च 2016 में 1.85 करोड़ का भुगतान कर दिया। बाद में पता चला कि कलिमोव ने वह मेल नहीं भेजा था।
विज्ञापन
रूसी कंपनी ने जांच में पाया कि इंडोनेशिया का वह बैंक खाता किसी बैगस सेतियावान के नाम पर है, कलिमोव के नाम पर नहीं। रूसी कंपनी ने अपनी सरकार के जरिये भारत सरकार को सूचित किया कि वह अपना बकाया वसूलने के लिए पवनहंस के खिलाफ कोर्ट जाएगी। उसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया और एजेंसी ने पवनहंस के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।