फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Bilaspur-Chhattisgarh News ›   Chhattisgarh High Court big decision Unnatural without wife consent is not Harassment in Bilaspur

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पत्नी की सहमति के बिना अप्राकृतिक यौन संबंध बलात्कार नहीं, जानें मामला

Wed, 12 Feb 2025 05:22 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 12 Feb 2025 05:22 PM IST
सार

बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत बलात्कार या धारा 377 के तहत अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। 

विज्ञापन
Chhattisgarh High Court big decision Unnatural without wife consent is not Harassment in Bilaspur
बिलासपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि पति पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 के तहत बलात्कार या धारा 377 के तहत अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है, भले ही वह अपनी वयस्क पत्नी की सहमति के बिना उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाता हो। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकल पीठ ने ऐसे मामलों में पत्नी की सहमति को कानूनी रूप से महत्वहीन बताते हुए कहा कि यदि पत्नी 15 वर्ष से कम आयु की नहीं है, तो पति द्वारा अपनी पत्नी के साथ किए गए किसी भी यौन संबंध या यौन कृत्य को इन परिस्थितियों में बलात्कार नहीं कहा जा सकता है। इसलिए अपीलकर्ता के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 और 377 के तहत अपराध नहीं बनता है।

विज्ञापन


दरअसल मृतक पीड़िता का पति 11 दिसंबर, 2017 की रात को अपीलकर्ता ने कथित तौर पर अपनी पत्नी की इच्छा के विरुद्ध उसके साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए। इसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज की गई और अपीलकर्ता के खिलाफ धारा 377 आईपीसी के तहत जुर्म दर्ज की गई। पीड़िता का मृत्युपूर्व बयान एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा दर्ज किया गया, जिसमें उसने कहा कि वह अपने पति द्वारा जबरदस्ती किए गए यौन संबंध के कारण बीमार पड़ गई। उसी दिन उसकी मृत्यु हो गई।
विज्ञापन


साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध), 376 (बलात्कार के लिए सजा) और 304 (हत्या के लिए दोषी न होने वाली गैर इरादतन हत्या के लिए सजा) के तहत दोषी ठहराया। उन्हें डिफ़ॉल्ट शर्तों के साथ 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने उच्च न्यायालय के समक्ष आपराधिक अपील दायर की।
विज्ञापन
विज्ञापन


मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा, कि धारा 375, 376 और 377 आईपीसी के अवलोकन से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि धारा 375 आईपीसी की संशोधित परिभाषा के मद्देनजर, पति और पत्नी के बीच धारा 377 आईपीसी के तहत अपराध का कोई स्थान नहीं है और इस तरह बलात्कार नहीं किया जा सकता है। धारा 375 आईपीसी के अपवाद 2 पर जोर देते हुए, न्यायालय ने फैसला सुनाया कि एक पुरुष और उसकी पत्नी के बीच यौन संबंध या यौन क्रियाएं - यदि पत्नी 15 वर्ष से अधिक उम्र की है - बलात्कार नहीं मानी जाती हैं। नतीजतन, भले ही एक पति अपनी वयस्क पत्नी के साथ धारा 377 आईपीसी के तहत परिभाषित अप्राकृतिक यौन संबंध बनाता है, यह अपराध नहीं माना जाता है। न्यायालय ने धारा 304 आईपीसी के तहत अपीलकर्ता की दोषसिद्धि के संबंध में, न्यायालय ने इसे "विकृत" माना और टिप्पणी की।


कोर्ट ने कहा- आईपीसी की धारा 304 के तहत अपराध मामले के वर्तमान तथ्यों से कैसे जुड़ा है और अभियोजन पक्ष द्वारा कैसे साबित किया गया है; फिर भी, इसने अपीलकर्ता को धारा 304 आईपीसी के तहत दोषी ठहराया है, जो कि विकृति और स्पष्ट अवैधता के अलावा और कुछ नहीं है, जिस पर इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। कोर्ट ने अपीलकर्ता को सभी आरोपों से बरी करते हए उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed