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बेमिसालः बच्चों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने से साथ निखारती हैं उनकी प्रतिभा अमिता मरवाहा

Mon, 11 Nov 2019 02:46 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 11 Nov 2019 02:46 PM IST
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Amita Marwaha enhances her talent by teaching children self defence tricks
अमिता मारवाह - फोटो : अमर उजाला
सामाजिक कार्यकर्ता अमिता मरवाहा को स्लम एरिया के बच्चों में स्किल डेवलप करने का जुनून है। इसके लिए वह बड़ी मेहनत और लगन से काम कर रही हैं। अमिता मरवाहा एक्टिविटी टीम के साथ इस काम में पूरी लगने से जुड़ी हुई हैं। जरूरतमंद बच्चों को सेल्फ डिफेेंस की ट्रेनिंग के साथ उन्हें खेल की दुनिया में नाम कमाने के लिए प्रोत्साहित करने का काम कर रही है।
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उनकी कड़ी मेहनत का ही नतीजा है कि ट्रेनिंग लेने के बाद स्लम एरिया के 20 बच्चे अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं। उन्हें इस उत्कृष्ट कार्य के लिए अब तक 70 पुरस्कार दिए जा चुके हैं। उन्हें फिल्मी हस्तियों से लेकर हरियाणा के दिग्गज नेताओं ने भी सम्मानित किया है।
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बच्चों ने दिखाई देश विदेश में प्रतिभा
अमिता स्लम के बच्चों को फ्री में मार्शल आर्ट सिखाती हैं। उन्हें खेलों की दुनिया में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं। इसी कारण बच्चे खेल में अपना सुनहरा करिअर बना चुके हैं। वह उन बच्चों की मार्गदर्शक बनीं जिन्हें दो वक्त की रोटी बड़ी मुश्किल से नसीब होती हैं। वह मार्शल आर्ट की फ्री क्लास देती है। यह क्लास इंदिरा कॉलोनी, हल्लोमाजरा और सेक्टर-4 पंचकूला में दी जाती है।
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ट्रेनिंग लेने के बाद स्लम एरिया के 20 बच्चे अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता हैं। 40 बच्चे मार्शल आर्ट में राज्य और राष्ट्रीय पदक विजेता हैं। 20 बच्चों ने डांस में पुरस्कार जीते हैं। 25 बच्चे कला और शिल्प प्रतियोगिता में विजेता हैं। संस्था से चार प्रशिक्षित छात्र ताईक्वांडो शिक्षक के रूप में ट्राइसिटी के प्रसिद्ध स्कूल में काम कर रहे हैं और सम्मानपूर्वक पैसा कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस काम में मुझे सबसे अधिक शुकून मिला है।

अच्छे खिलाड़ियों को आर्थिक अभाव के चलते नहीं मिलता हक
अमिता मरवाहा ने बताया कि जब वह स्कूल और कॉलेज में पढ़ती थीं तो कई बच्चे खेल सहित कई विधाओं में अच्छा प्रयास करते थे। उन्हें आर्थिक अभाव के कारण मौका नहीं मिलता था। उन्होंने बताया कि तब उन्होंने बच्चों को फ्री में मार्शल आर्ट, आत्मरक्षा के गुर, कला और शिल्प, कथक नृत्य, ध्यान, योग व्यायाम, श्वास अभ्यास सिखाने का संकल्प लिया था। उनके प्रयास के बाद बच्चों ने इन विधाओं को सीखकर देश विदेश में अपना नाम रोशन किया है। वह झुग्गी के बच्चों और उनके अभिभावकों को भी जागरूक करती हैं।


बच्चों में कौशल विकसित करना जीवन का उद्देश्य
अमिता मरवाहा ने बताया कि उनके जीवन का उद्देश्य गरीब बच्चों में कौशल विकसित करना जिससे वे सम्मानपूर्वक कमा और अपने पैरों पर खड़े हो सकें। उन्हें कत्थक पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। वह कला शिरोमणि गरीब लड़कियों को मुफ्त पढ़ाने और कौशल विकसित करने के लिए पुरस्कार प्राप्त कर चुकी हैं। इसके साथ ही वे एक शिक्षक के रूप में सम्मानपूर्वक और भारत की कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए पैसा कमा सकते हैं।
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