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एनसीआर की हवा में जहर घोल रहे पुराने डीजल, पेट्रोल वाहन
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चंडीगढ़। पुराने डीजल, पेट्रोल वाहन बदस्तूर एनसीआर की हवा में प्रदूषण रूपी जहर घोल रहे हैं। 10 साल से अधिक पुराने डीजल व 15 से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को 14 जिलों में चलने से परिवहन विभाग अब तक नहीं रोक पाया है। ऐसे वाहनों की संख्या एनसीआर में लगभग 6 लाख है।
वर्तमान में पुलिस के भरोसे ही चालान व वाहन जब्त करने का काम चल रहा है। परिवहन विभाग के अफसर अभी योजना बनाने में ही जुटे हैं। पांच साल पहले इन वाहनों को सड़कों से हटाने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन धरातल पर नतीजा सिफर है। इक्का-दुक्का वाहनों को ही जब्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश धरातल पर लागू ही नहीं हुए।
पुराने डीजल-पेट्रोल निजी व वाणिज्यिक वाहनों की संख्या सबसे अधिक गुरुग्राम में है। उसके बाद रोहतक, बहादुरगढ़, सोनीपत व फरीदाबाद इत्यादि शहर हैं। परिवहन विभाग नवंबर 2018 में ऐसे वाहनों का पंजीकरण रद्द कर चुका है, सूची भी जारी हुई पर संचालन नहीं रुका।
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जिन वाहनों का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है उनमें 2.90 लाख पेट्रोल और 3.10 लाख डीजल बस, कार, एंबुलेंस आदि शामिल हैं। एनजीटी की ओर से परिवहन विभाग को इन वाहनों का संचालन रोकने के लिए नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
वाहनों से 40 फीसदी प्रदूषण
पर्यावरण प्राधिकरण प्रदूषण नियंत्रण (ईपीसीए) कह चुका है कि दिल्ली-एनसीआर के कुल वायु प्रदूषण में वाहनों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। गुरुग्राम में बड़ी संख्या में डीजल ऑटो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। 5000 को दिसंबर अंत तक स्क्रैप पॉलिसी के तहत हटाया जाना है।
मरम्मत के अभाव में दोगुना प्रदूषण
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य डॉ. कमल सोई ने बताया कि मरम्मत के अभाव में डीजल वाहनों का प्रदूषण स्तर दोगुना हो जाता है। इसलिए मोटरवाहन अधिनियम 1988 के तहत ऑटोमोबाइल कंपनियां डीजल वाहनों की आयु 10 साल और पेट्रोल वाहनों की 15 साल निर्धारित करती हैं। वाणिज्यिक वाहनों में ओवरलोडिंग से इंजन पर अधिक भार पड़ता है, जिससे डीजल खपत बढ़ती है और प्रदूषण ज्यादा अनुपात में फैलता है। चूंकि, पीएम 2.5 सबसे अधिक पुराने डीजल वाहनों से ही हवा में बढ़ता है। लोग स्क्रैप नीति में भी अपने वाहनों को नहीं दे रहे। 2006 से पुराने वाहनों का डाटा परिवहन विभाग के पास ऑनलाइन नहीं है।
परिवहन आयुक्त जल्दी सांझा करेंगे कार्ययोजना : कला
परिवहन विभाग की प्रधान सचिव कला रामचंद्रन ने कहा कि पुराने डीजल-पेट्रोल वाहनों का संचालन पूरी तरह रोकने में लगे हैं। परिवहन आयुक्त जल्द कार्ययोजना सांझा करेंगे। वाहन मालिकों को नोटिस भी जारी किए हैं। उन्हें अपने वाहन एनओसी लेकर एनसीआर से बाहर ले जाने के लिए जागरूक किया है।
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वर्तमान में पुलिस के भरोसे ही चालान व वाहन जब्त करने का काम चल रहा है। परिवहन विभाग के अफसर अभी योजना बनाने में ही जुटे हैं। पांच साल पहले इन वाहनों को सड़कों से हटाने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन धरातल पर नतीजा सिफर है। इक्का-दुक्का वाहनों को ही जब्त किया गया है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेश धरातल पर लागू ही नहीं हुए।
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पुराने डीजल-पेट्रोल निजी व वाणिज्यिक वाहनों की संख्या सबसे अधिक गुरुग्राम में है। उसके बाद रोहतक, बहादुरगढ़, सोनीपत व फरीदाबाद इत्यादि शहर हैं। परिवहन विभाग नवंबर 2018 में ऐसे वाहनों का पंजीकरण रद्द कर चुका है, सूची भी जारी हुई पर संचालन नहीं रुका।
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जिन वाहनों का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है उनमें 2.90 लाख पेट्रोल और 3.10 लाख डीजल बस, कार, एंबुलेंस आदि शामिल हैं। एनजीटी की ओर से परिवहन विभाग को इन वाहनों का संचालन रोकने के लिए नोटिस भी जारी किया जा चुका है।
वाहनों से 40 फीसदी प्रदूषण
पर्यावरण प्राधिकरण प्रदूषण नियंत्रण (ईपीसीए) कह चुका है कि दिल्ली-एनसीआर के कुल वायु प्रदूषण में वाहनों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 40 फीसदी है। गुरुग्राम में बड़ी संख्या में डीजल ऑटो सड़कों पर दौड़ रहे हैं। 5000 को दिसंबर अंत तक स्क्रैप पॉलिसी के तहत हटाया जाना है।
मरम्मत के अभाव में दोगुना प्रदूषण
राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद के सदस्य डॉ. कमल सोई ने बताया कि मरम्मत के अभाव में डीजल वाहनों का प्रदूषण स्तर दोगुना हो जाता है। इसलिए मोटरवाहन अधिनियम 1988 के तहत ऑटोमोबाइल कंपनियां डीजल वाहनों की आयु 10 साल और पेट्रोल वाहनों की 15 साल निर्धारित करती हैं। वाणिज्यिक वाहनों में ओवरलोडिंग से इंजन पर अधिक भार पड़ता है, जिससे डीजल खपत बढ़ती है और प्रदूषण ज्यादा अनुपात में फैलता है। चूंकि, पीएम 2.5 सबसे अधिक पुराने डीजल वाहनों से ही हवा में बढ़ता है। लोग स्क्रैप नीति में भी अपने वाहनों को नहीं दे रहे। 2006 से पुराने वाहनों का डाटा परिवहन विभाग के पास ऑनलाइन नहीं है।
परिवहन आयुक्त जल्दी सांझा करेंगे कार्ययोजना : कला
परिवहन विभाग की प्रधान सचिव कला रामचंद्रन ने कहा कि पुराने डीजल-पेट्रोल वाहनों का संचालन पूरी तरह रोकने में लगे हैं। परिवहन आयुक्त जल्द कार्ययोजना सांझा करेंगे। वाहन मालिकों को नोटिस भी जारी किए हैं। उन्हें अपने वाहन एनओसी लेकर एनसीआर से बाहर ले जाने के लिए जागरूक किया है।