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कोरोना को लेकर हरियाणा तैयार : अब वार्ड व्बाय से लेकर नर्सिंग- एमबीबीएस स्टूडेंटस तक संभालेंगे ऑक्सीजन हैंडलिंग

Sun, 02 Jan 2022 02:15 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 02 Jan 2022 02:15 AM IST
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Now from ward boy to nursing- MBBS students will handle oxygen handling.
चंडीगढ़। कोरोना की संभावित तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पिछली कोरोना की दो लहरों से सबक लेते हुए विभाग ने फैसला लिया है कि अब मेडिकल कालेजों के वार्ड ब्वाय से लेकर नर्सिंग और एमबीबीएस स्टूडेंट्स को भी ऑक्सीजन हैंडलिंग सिखाई जाएगी। इसके लिए विभाग ने कार्य शुरू भी कर दिया है। प्रशिक्षण के दौरान सभी को ऑक्सीजन प्लांट में पैदा होने वाली गैस से लेकर उसकी सप्लाई मरीज तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया सिखाई जा रही है। इसके अलावा, पीएसए प्लांट और मैनुअली गैस सिलेंडरों के रीफिल बदलने का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
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याद हो कि कोरोना की दो लहरों के दौरान प्रदेश में ऑक्सीजन की कमी हो गई थी। समय पर आक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण कई लोगों की जान भी चली गई थी। इसके अलावा, इन दोनों लहरों में ऑक्सीजन प्लांट संभालने और मरीजों को गैस सप्लाई करने वालों की भारी कमी देखी गई। इसी के साथ मैनुअली गैस सिलेंडरों को रीफिल करने में बड़ी दिक्कत आई थी, क्योंकि स्टाफ समेत अन्य कर्मचारियों को इसकी जानकारी नहीं थी। इस कारण निजी कंपनियों के भरोसे रहना पड़ा और मरीजों को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाई। इसी समस्या को देखते हुए अब विभाग ने संभावित तीसरी लहर से लड़ने की रणनीति तैयार की है।
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प्रशिक्षण में ये सब...चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने कल्पना चावला मेडिकल कालेज से वार्ड ब्वाय को ऑक्सीजन हैंडलिंग का प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। इसके तहत ऑक्सीजन पैदा होने से लेकर मरीजों तक पहुंचाने की प्रक्रिया समझाई जाती है। मशीनों और पाइप की सफाई करना, मरीज को कितनी आक्सीजन की जरूरत होती है आदि की जानकारी दी जा रही है। सिलिंडर रीफिल आदि करना सिखाया जा रहा है।
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दोनों लहरों में ऑक्सीजन हैंडलिंग को लेकर बड़ी दिक्कतें सामने आईं हैं। इसलिए विभाग ने फैसला लिया है कि वार्ड ब्वाय से लेकर नर्सिंग और एमबीबीएस के हर स्टूडेंट को ऑक्सीजन हैडलिंग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे इमरजेंसी में यह मरीजों की सेवा कर सकेंगे। प्रशिक्षण का कार्य शुरू कर दिया गया है। - डॉ. शालीन, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग।
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