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कालका एसडीएच : बेड पर अपनी चादर बिछाते हैं मरीज

Sun, 31 Jul 2022 01:33 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 31 Jul 2022 01:33 AM IST
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Kalka SDH: Patients lay their sheets on the bed
कालका। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बडे दावे करती है, लेकिन धरातल पर हालात बिल्कुल उलट हैं। कालका एसडीएच में भी व्यवस्थाओं का बुरा हाल है। शनिवार को अमर उजाला प्रतिनिधि ने अस्पताल का जायजा लिया तो एसडीएच के टीकाकरण कक्ष की चादरें बहुत ही गंदी थीं। इसके अलावा अन्य सुविधाएं भी बदहाल नजर आईं। टीकाकरण कक्ष में मरीज के साथ आए तीमारदार ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि दोपहर के तीन बज रहे हैं लेकिन किसी ने भी गंदी चादरों को बदलना भी जरूरी नहीं समझा है।
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नियम है कि बेड पर रोजाना नई चादर बिछाई जाएगी, लेकिन एसडीएच के टीकाकरण कक्ष को देख ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यहां पर कई दिनों से चादर नहीं बदली जा रही है। यहां बने टीकाकरण कक्ष में एक महिला को डिलीवरी के बाद शिफ्ट किया गया। जहां पर उसके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। चादर गंदी होने के कारण महिला के परिजनों ने घर से चादर मंगवाकर बेड पर बिछाई।
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एसडीएच कालका केवल नाम से ही सब डिविजनल अस्पताल है। यहां पर सुविधाएं नाममात्र की हैं। यहां पर स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट में लगे अल्युमीनियम के दरवाजे के नीचे की शीट निकली है, जोकि अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को उजागर कर रही हैं। अस्पताल प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। अस्पताल के आपरेशन थियेटर की तरफ जा रहे रास्ते में लगी खिड़कियों में से एक खिड़की की जाली पूरी निकली हुई है। इस तरह किसी का ध्यान नहीं है। उक्त खिड़की को बंद करने के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा वहां पर पत्थर रखकर काम चलाऊ जुगाड़ किया गया है।
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अस्पताल के टीकाकरण कक्ष के बेड पर बिछी चादरें अगर गंदी थीं, तो इस बारे में संबधित स्टाफ से पूछा जाएगा। एसएनसीयू कक्ष अभी क्रियाशील नहीं है, उसके दरवाजे के पैनल को बदलवाने के लिए बोल दिया गया है। -डॉ. रूपिन्द्र सिंह सैनी, एसएमओ, कालका
सीएचसी : 65 गांवों के लोग त्रस्त, मूलभूत सुविधाओं का भी है अभाव
रायपुररानी। 65 गांवों के लोग सीएचसी में मूलभूत सुविधाओं की कमी और स्टाफ की कार्यशैली से परेशान हैं। सीएचसी में दूर दराज के गांवों से लोग इलाज करवाने के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सुविधाएं मौजूद नहीं होने कारण उनके हाथ निराशा लगती है। रायपुररानी के सीएचसी को प्रदेश सरकार ने पंचकूला सेक्टर-6 अस्पताल की तर्ज पर बनाया लेकिन आज तक डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ पूरा नहीं होने के कारण लोगों को सेक्टर -6 अस्पताल पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
गौरतलब है कि क्षेत्र के करीब 35 गांव पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। कोरोना की तीन लहरें आने के बाद भी आज तक ऑक्सीजन केंद्र नहीं चलने पर क्षेत्र की जनता बहुत परेशान है। अस्पताल में इलाज करवाने शनिवार को पहुंचे मरीजों और तीमारदारों ने बताया कि परिसर में लगे ड्यूटी चार्ट पर एक सप्ताह से ड्यूटी पर तैनात स्टाफ के नाम तक नही बदले गये हैं। चार्ट में डॉक्टरों का कोई संपर्क नंबर भी उपलब्ध नहीं है।
इस वजह से किसी को समस्या भी नही बता सकते। पैर स्लिप होने के कारण इलाज के लिए पहुंची चोटिल महिला मीना देवी ने बताया कि शनिवार को अस्पताल में एक्सरे की सुविधा नहीं होने का परिसर में पहुंचने पर ही पता लगा। इसके बाद एक्सरे नही हो सका। महिला ने सरकारी सुविधाओं के बारे में रोष जताया। उनका कहना था कि अब एक्सरे के लिए पंचकूला जाना पडे़गा।
मोरनी क्षेत्र के गांव ठाठर की गर्भवती महिला रानी देवी इलाज के लिए पहुंची तो उसे केवल एक पर्ची थमाकर दर्द की हालत में ही घर जाने के लिए बोल दिया। इसके बाद अस्पताल के एसएमओ ने तुरंत संज्ञान लेकर फोन के माध्यम से ही महिला को एडमिट करवाकर उपचार शुरू करवाया।

ड्यूटी चार्ट पर नाम बदलने के निर्देश दिए गए हैं। डेपुटेशन पर गए डॉक्टर्स के पद भी पूरे करने की मांग सरकार से की है। विभाग के मुख्य ऑफिस में ऑक्सीजन प्लांट की फाइल गई है, यह जल्द ही सुचारु होने की उम्मीद है। -डॉ. संजीव गोयल, एसएमओ, रायपुररानी अस्पताल
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