{"_id":"5d8687b38ebc3e93a76feeba","slug":"judge-note-case-panchkula-news-pkl351421948","type":"story","status":"publish","title_hn":"जज नोट कांडः सुनवाई के दौरान अपने पुराने बयानों से मुकरे दो गवाह, जानिए क्या था पूरा मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जज नोट कांडः सुनवाई के दौरान अपने पुराने बयानों से मुकरे दो गवाह, जानिए क्या था पूरा मामला
Sun, 22 Sep 2019 11:09 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Sep 2019 11:09 AM IST
विज्ञापन
जज निर्मलजीत कौर
- फोटो : फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीबीआई अदालत में शनिवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की पूर्व जज निर्मल यादव के दिल्ली के एक व्यापारी से 15 लाख रुपये रिश्वत लेने के मामले में सुनवाई हुई। इस दौरान डॉ. मारकंडे आहुजा और एडवोकेट पंकज भारद्वाज अपने पहले दिए बयानों से मुकर गए। डॉ. आहुजा आरोपी रविंद्र सिंह और संजीव बंसल के करीबी दोस्त हैं।
डॉ. मारकंडे ने सीबीआई को सितंबर 2008 में अपने बयान में बताया था कि अगस्त 2008 में जब संजीव बंसल भगौड़ा था तो उन्हें फोन कर सारी कहानी बताई थी कि कैसे रविंद्र सिंह ने जज निर्मल यादव के घर पैसे भेजे थे और मुंशी की गलती की वजह से वह पैसे जज निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गए थे। संजीव बंसल ने फोन पर मारकंडे को रविंद्र सिंह को साथ लेकर दिल्ली आने को भी कहा था, लेकिन शनिवार को डॉ. मारकंडे ने कोर्ट में बयान दिया कि वह रविंद्र सिंह को जानते ही नहीं हैं।
एडवोकेट पंकज भारद्वाज ने सीबीआई को पहले दिए अपने बयान में कहा था कि जज निर्मल यादव के बारे में जानकारी के लिए उसे संजीव बंसल की कॉल आई थी, लेकिन कोर्ट में पंकज ने कहा कि उन्होंने कभी निर्मल यादव का जिक्र नहीं किया। इस दौरान गवाह सौरव दीप सिंह ने कोर्ट में अलग-अलग आरोपियों की कॉल डिटेल को पेश किया।
विज्ञापन
इसके बाद गवाह वीके गुप्ता का क्रॉस एग्जामिनेशन चीफ हुआ। उन्होंने अपने बयान में कहा कि 2 अगस्त 2008 को जज निर्मल यादव ने चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए फ्लाइट ली थी और उस फ्लाइट की टिकट संजीव बंसल ने बुक कराई थी। इससे साबित होता है कि दोनों एक-दूसरे को जानते थे। अब मामले की अगली सुनवाई 5 अक्तूबर को होगी।
चार्जशीट के अनुसार 13 अगस्त 2008 को हाईकोर्ट के जज निर्मलजीत कौर के घर दिल्ली के एक व्यापारी रविंद्र की ओर से 15 लाख रुपये भेजे गए थे। जज ने इसकी सूचना चंडीगढ़ पुलिस को दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि प्रकाश राम नाम के एक व्यक्ति ने पैकेट उन्हें दिया था। चंडीगढ़ पुलिस के बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि वह रुपये जज निर्मल यादव को देने थे। गलती से निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गए। उसके बाद सीबीआई ने प्रकाश राम को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। बाद में यह मामला जज नोट कांड के नाम से चरचा में आया था।
विज्ञापन
डॉ. मारकंडे ने सीबीआई को सितंबर 2008 में अपने बयान में बताया था कि अगस्त 2008 में जब संजीव बंसल भगौड़ा था तो उन्हें फोन कर सारी कहानी बताई थी कि कैसे रविंद्र सिंह ने जज निर्मल यादव के घर पैसे भेजे थे और मुंशी की गलती की वजह से वह पैसे जज निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गए थे। संजीव बंसल ने फोन पर मारकंडे को रविंद्र सिंह को साथ लेकर दिल्ली आने को भी कहा था, लेकिन शनिवार को डॉ. मारकंडे ने कोर्ट में बयान दिया कि वह रविंद्र सिंह को जानते ही नहीं हैं।
विज्ञापन
एडवोकेट पंकज भारद्वाज ने सीबीआई को पहले दिए अपने बयान में कहा था कि जज निर्मल यादव के बारे में जानकारी के लिए उसे संजीव बंसल की कॉल आई थी, लेकिन कोर्ट में पंकज ने कहा कि उन्होंने कभी निर्मल यादव का जिक्र नहीं किया। इस दौरान गवाह सौरव दीप सिंह ने कोर्ट में अलग-अलग आरोपियों की कॉल डिटेल को पेश किया।
विज्ञापन
इसके बाद गवाह वीके गुप्ता का क्रॉस एग्जामिनेशन चीफ हुआ। उन्होंने अपने बयान में कहा कि 2 अगस्त 2008 को जज निर्मल यादव ने चंडीगढ़ से दिल्ली के लिए फ्लाइट ली थी और उस फ्लाइट की टिकट संजीव बंसल ने बुक कराई थी। इससे साबित होता है कि दोनों एक-दूसरे को जानते थे। अब मामले की अगली सुनवाई 5 अक्तूबर को होगी।
चार्जशीट के अनुसार 13 अगस्त 2008 को हाईकोर्ट के जज निर्मलजीत कौर के घर दिल्ली के एक व्यापारी रविंद्र की ओर से 15 लाख रुपये भेजे गए थे। जज ने इसकी सूचना चंडीगढ़ पुलिस को दी। उन्होंने पुलिस को बताया कि प्रकाश राम नाम के एक व्यक्ति ने पैकेट उन्हें दिया था। चंडीगढ़ पुलिस के बाद यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया था।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि वह रुपये जज निर्मल यादव को देने थे। गलती से निर्मलजीत कौर के घर पहुंच गए। उसके बाद सीबीआई ने प्रकाश राम को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। बाद में यह मामला जज नोट कांड के नाम से चरचा में आया था।