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मोरनी में बिजली सेवाओं का संकट: 4000 कनेक्शनों पर सिर्फ 5 अस्थाई कर्मचारी
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मोरनी। क्षेत्र में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम की सेवाएं कर्मचारियों की कम संख्या के चलते प्रभावित हो रही है। मोरनी और टीकरी दो फिटर में लगभग 3000 से अधिक बिजली कनेक्शनों की देखरेख के लिए मात्र 5 अस्थाई कर्मचारियों के सहारे चलाना का प्रयास हो रहा है। इससे उपभोक्ताओं की परेशानी दिन- प्रतिदिन बढ़ रही है। मोरनी और टिकरी फीडर क्षेत्र में 15 पंचायतों की सैकड़ों छोटे-बड़े गांव और ढानियां शामिल हैं, जिसमें रहने वाले निगम के उपभोक्ताओं को हर बार छोटी-छोटी समस्याओं के चलते लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। ग्रामीणों को बार-बार बिजली कटौती, तारों के पेड़ों में उलझने और शिकायतों के देरी से निपटारे जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
बरसात के मौसम में मोरनी क्षेत्र में बिजली की समस्याएं और गंभीर हो जाती हैं। तेज हवाओं और बारिश के कारण तार अक्सर पेड़ों की शाखाओं में उलझ जाते हैं या टूट जाते हैं। रात के समय या दूरदराज के इलाकों में बिजली गुल होने पर मरम्मत में कई घंटों से लेकर दिनों तक का समय लग जाता है। स्थानीय निवासी हरि दत्त ने बताया, बरसात में कई बार पूरा-पूरा दिन तक बिजली नहीं आती। बच्चों की पढ़ाई और खेती-बाड़ी का काम प्रभावित होता है। केवल 5 कर्मचारी इतने बड़े इलाके को कैसे संभाल सकते हैं।
कर्मचारियों पर काम का दबाव
5 कच्चे कर्मचारी न केवल सामान्य मरम्मत का काम करते हैं, बल्कि 33 केवी हाई वोल्टेज लाइनों पर भी काम करने को मजबूर हैं। यह निगम की नीतियों का स्पष्ट उल्लंघन है और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम पर इतना काम का बोझ है कि हमें खतरनाक परिस्थितियों में भी काम करना पड़ता है। ऊपर से अस्थायी नौकरी का कोई भरोसा नहीं।
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ग्रामीणों की मांग- कर्मचारी और बुनियादी ढांचा बढ़ाया जाए
सरपंच एसोसिएशन के प्रधान पंचपाल शर्मा, सरपंच मनोज कुमार, राजेश कौशिक, लज्जा राम, मोरनी क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि इस समस्या का समाधान तत्काल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और बुनियादी ढांचे में सुधार से ही संभव है। कम से कम 20 कर्मचारियों (स्थायी और अस्थायी) की नियुक्ति की जानी चाहिए। साथ ही नालाघाट, बड़ीशेर, मोरनी, धामण में कंप्लेंट सेंटर शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए स्थापित करने की मांग उठ रही है।
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बरसात के मौसम में मोरनी क्षेत्र में बिजली की समस्याएं और गंभीर हो जाती हैं। तेज हवाओं और बारिश के कारण तार अक्सर पेड़ों की शाखाओं में उलझ जाते हैं या टूट जाते हैं। रात के समय या दूरदराज के इलाकों में बिजली गुल होने पर मरम्मत में कई घंटों से लेकर दिनों तक का समय लग जाता है। स्थानीय निवासी हरि दत्त ने बताया, बरसात में कई बार पूरा-पूरा दिन तक बिजली नहीं आती। बच्चों की पढ़ाई और खेती-बाड़ी का काम प्रभावित होता है। केवल 5 कर्मचारी इतने बड़े इलाके को कैसे संभाल सकते हैं।
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कर्मचारियों पर काम का दबाव
5 कच्चे कर्मचारी न केवल सामान्य मरम्मत का काम करते हैं, बल्कि 33 केवी हाई वोल्टेज लाइनों पर भी काम करने को मजबूर हैं। यह निगम की नीतियों का स्पष्ट उल्लंघन है और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करता है। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हम पर इतना काम का बोझ है कि हमें खतरनाक परिस्थितियों में भी काम करना पड़ता है। ऊपर से अस्थायी नौकरी का कोई भरोसा नहीं।
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ग्रामीणों की मांग- कर्मचारी और बुनियादी ढांचा बढ़ाया जाए
सरपंच एसोसिएशन के प्रधान पंचपाल शर्मा, सरपंच मनोज कुमार, राजेश कौशिक, लज्जा राम, मोरनी क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि इस समस्या का समाधान तत्काल कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने और बुनियादी ढांचे में सुधार से ही संभव है। कम से कम 20 कर्मचारियों (स्थायी और अस्थायी) की नियुक्ति की जानी चाहिए। साथ ही नालाघाट, बड़ीशेर, मोरनी, धामण में कंप्लेंट सेंटर शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए स्थापित करने की मांग उठ रही है।