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Panchkula News: मुश्किलों को हराकर हुनर से बनाया रास्ता
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पंचकूला। कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती... यह पंक्ति सेक्टर-16 निवासी रिचा शर्मा के जीवन पर सटीक बैठती है। सिंगल मदर और हुनरमंद कलाकार ने मुश्किलों को मात देकर न सिर्फ अपनी पहचान बनाई बल्कि कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गईं।
रिचा का सफर साल 2017 में उनके अपने घर से शुरू हुआ। शुरुआत में यह महज एक शौक था लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी पहचान और आजीविका बन गया। उन्होंने अपने हुनर से हैंडमेड सिल्क थ्रेड जूलरी, पेपर और टेराकोटा जूलरी, फ्लोरल जूलरी, एरोमा कैंडल्स, क्विल्टेड बैग्स, लड्डू गोपाल की पोशाकें और बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट जैसी सुंदर वस्तुएं बनाकर सबका दिल जीत लिया। वह कहती हैं, ‘शुरुआत में मैंने यह सोचा भी नहीं था कि मेरा शौक एक दिन मेरे काम और पहचान का जरिया बन जाएगा लेकिन जब लोग मेरे काम की सराहना करने लगे तो आत्मविश्वास भी बढ़ता गया।’
दो दशक बाद दोबारा पढ़ाई, आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
करीब 20 साल बाद उन्होंने पढ़ाई दोबारा शुरू की। उन्होंने न सिर्फ ग्रेजुएशन पूरी की बल्कि सोशियोलॉजी में मास्टर्स भी प्रथम श्रेणी में हासिल की। साल 2017 में उन्होंने शिशु निकेतन स्कूल में आर्ट एंड क्राफ्ट टीचर के रूप में नई पारी की शुरुआत की। इसके बाद 2022 में वह लॉरेंस पब्लिक स्कूल चंडीगढ़ से जुड़ीं और बच्चों को हुनर और मेहनत से प्रेरित करती रही।
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मां की बीमारी और जिम्मेदारियों का बढ़ता दायरा
साल 2024 उनके जीवन में कठिन था जब उनकी मां को पैरालिसिस हो गया। घर की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने 2025 में अपनी नौकरी छोड़ दी ताकि माता-पिता की सेवा कर सकें।
असली टच दिल का होता है, टच फोन का नहीं
रिचा सिर्फ अपने परिवार तक सीमित नहीं हैं। अपने खाली समय में वह एनजीओ के बच्चों को आर्ट एंड क्राफ्ट और स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देती हैं ताकि वे नशे या गलत राहों से दूर रहकर अपने पैरों पर खड़े हो सकें। उनका जीवन उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा, जरूरतमंद बच्चों की मदद और जानवरों-पक्षियों की सेवा करना है। उनका कहना है कि आज की युवा पीढ़ी मिट्टी से दूर होती जा रही है। वे चाहती हैं कि बच्चे फिर से प्रकृति से जुड़ें। असली टच दिल का होता है, टच फोन का नहीं।
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रिचा का सफर साल 2017 में उनके अपने घर से शुरू हुआ। शुरुआत में यह महज एक शौक था लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी पहचान और आजीविका बन गया। उन्होंने अपने हुनर से हैंडमेड सिल्क थ्रेड जूलरी, पेपर और टेराकोटा जूलरी, फ्लोरल जूलरी, एरोमा कैंडल्स, क्विल्टेड बैग्स, लड्डू गोपाल की पोशाकें और बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट जैसी सुंदर वस्तुएं बनाकर सबका दिल जीत लिया। वह कहती हैं, ‘शुरुआत में मैंने यह सोचा भी नहीं था कि मेरा शौक एक दिन मेरे काम और पहचान का जरिया बन जाएगा लेकिन जब लोग मेरे काम की सराहना करने लगे तो आत्मविश्वास भी बढ़ता गया।’
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दो दशक बाद दोबारा पढ़ाई, आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
करीब 20 साल बाद उन्होंने पढ़ाई दोबारा शुरू की। उन्होंने न सिर्फ ग्रेजुएशन पूरी की बल्कि सोशियोलॉजी में मास्टर्स भी प्रथम श्रेणी में हासिल की। साल 2017 में उन्होंने शिशु निकेतन स्कूल में आर्ट एंड क्राफ्ट टीचर के रूप में नई पारी की शुरुआत की। इसके बाद 2022 में वह लॉरेंस पब्लिक स्कूल चंडीगढ़ से जुड़ीं और बच्चों को हुनर और मेहनत से प्रेरित करती रही।
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मां की बीमारी और जिम्मेदारियों का बढ़ता दायरा
साल 2024 उनके जीवन में कठिन था जब उनकी मां को पैरालिसिस हो गया। घर की सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने 2025 में अपनी नौकरी छोड़ दी ताकि माता-पिता की सेवा कर सकें।
असली टच दिल का होता है, टच फोन का नहीं
रिचा सिर्फ अपने परिवार तक सीमित नहीं हैं। अपने खाली समय में वह एनजीओ के बच्चों को आर्ट एंड क्राफ्ट और स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देती हैं ताकि वे नशे या गलत राहों से दूर रहकर अपने पैरों पर खड़े हो सकें। उनका जीवन उद्देश्य पर्यावरण की रक्षा, जरूरतमंद बच्चों की मदद और जानवरों-पक्षियों की सेवा करना है। उनका कहना है कि आज की युवा पीढ़ी मिट्टी से दूर होती जा रही है। वे चाहती हैं कि बच्चे फिर से प्रकृति से जुड़ें। असली टच दिल का होता है, टच फोन का नहीं।