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अपराध : प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के पोर्टल हैक, दो आरोपी गिरफ्तार
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पंचकूला। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के पोर्टल पर झूठे केसों की सूचना देकर करीब चार लाख रुपये ठगने वाले दो आरोपियों को चंडीमंदिर थाना पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान मुकेश कुमार और श्रीराम कुमार जिला बेगूसराय बिहार के रूप में हुई है। चंडीमंदिर पुलिस ने महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी मोरनी की शिकायत पर केस दर्ज किया था। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना विभाग द्वारा चलाई जा रही थी। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत डाटा एंट्री ऑपरेटर को दो मेल आईडी प्रदान की गई थी।
इसमें डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा गर्भवती महिला को पहला बच्चा होने पर तीन किश्तों में (1000, 2000 व 2000) कुल 5000 रुपये कि राशि प्रदान की जाती है। उसके बाद डब्ल्यूसीडीपीओ द्वारा अप्रूव होने के बाद लाभार्थी के खाते में यह राशि आती है। कुछ समय पहले ये दोनों आईडी किसी ने हैक कर ली थी। 25 जून को डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा योजना की पेमेंट स्टेटस चेक किया गया। उसमें पाया गया कि 264 किश्तें (88 केस) जो कि जिया आंगनबाड़ी केंद्रों से भरे थे। जांच पर पता चला कि ये संबंधित केस इन आंगनबाड़ी केंद्रों से नहीं भरे गए थे, क्योंकि ये केस न तो आंगनबाड़ी वर्कर, न सुपरवाइजर और न डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा किए गए थे।
ना ही एसओ (डब्ल्यूसीडीपीओ) द्वारा अप्रूव किए गए थे। इस स्कीम का लाभ तीन किश्तों में किया जाता है। किसी लाभार्थी को एक साथ तीनों किश्तों का लाभ देने के बहुत ही कम चांस होते हैं। केसों में लाभार्थियों के केस एक साथ फीड किए गए व एक साथ ही उनकी तीनों किश्तों की पेमेंट की गई। तथ्यों से पता चलता है कि किसी के द्वारा ब्लॉक की आईडी हैक करके ठगी की गई है।
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इसमें डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा गर्भवती महिला को पहला बच्चा होने पर तीन किश्तों में (1000, 2000 व 2000) कुल 5000 रुपये कि राशि प्रदान की जाती है। उसके बाद डब्ल्यूसीडीपीओ द्वारा अप्रूव होने के बाद लाभार्थी के खाते में यह राशि आती है। कुछ समय पहले ये दोनों आईडी किसी ने हैक कर ली थी। 25 जून को डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा योजना की पेमेंट स्टेटस चेक किया गया। उसमें पाया गया कि 264 किश्तें (88 केस) जो कि जिया आंगनबाड़ी केंद्रों से भरे थे। जांच पर पता चला कि ये संबंधित केस इन आंगनबाड़ी केंद्रों से नहीं भरे गए थे, क्योंकि ये केस न तो आंगनबाड़ी वर्कर, न सुपरवाइजर और न डाटा एंट्री ऑपरेटर द्वारा किए गए थे।
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ना ही एसओ (डब्ल्यूसीडीपीओ) द्वारा अप्रूव किए गए थे। इस स्कीम का लाभ तीन किश्तों में किया जाता है। किसी लाभार्थी को एक साथ तीनों किश्तों का लाभ देने के बहुत ही कम चांस होते हैं। केसों में लाभार्थियों के केस एक साथ फीड किए गए व एक साथ ही उनकी तीनों किश्तों की पेमेंट की गई। तथ्यों से पता चलता है कि किसी के द्वारा ब्लॉक की आईडी हैक करके ठगी की गई है।
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