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तीन साल में हॉस्टलों में प्रवेश की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं हो पाई
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चंडीगढ़। तीन साल बीत गए लेकिन पंजाब विश्वविद्यालय में हॉस्टलों में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं हो पाई। इसके लिए सॉफ्टवेयर डेवलप किया जाना था, जो अब तक नहीं हो पाया।
पीयू में छात्र-छात्राओं के हॉस्टलों की संख्या लगभग 20 है। इन हॉस्टलों में 6700 से अधिक विद्यार्थियों को हर साल जगह दी जाती है। आंकड़ों को देखें तो पीयू में हर साल 16 हजार से अधिक स्टूडेंट्स शिक्षा पाते हैं। नौ हजार से अधिक विद्यार्थी हॉस्टल के लिए अप्लाई करते हैं। सीटों की संख्या में मुताबिक उन्हें यह दिया जाता है। छात्र संगठनों का आरोप है कि हॉस्टलों में स्टूडेंट्स को रूम देने का कोई क्राइटेरिया नहीं है। वार्डन जिसे चाहे एडमिशन दे देते हैं। जिन विद्यार्थियों को हॉस्टल की जरूरत होती है उन्हें रूम नहीं मिल पाते। यहां तक कि एक-एक रूम में तीन से चार विद्यार्थी भी प्रवेश कर दिए जाते हैं। इसके पीछे बड़ा खेल होता है।
इसी को लेकर संगठनों ने विरोध किया और कहा कि इस व्यवस्था को पारदर्शी किया जाए। ऑनलाइन प्रक्रिया होगी तो जरूरतमंद छात्रों को हॉस्टलों में एडमिशन मिल जाएंगे। पीयू प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि वह जल्द ही सॉफ्टवेयर डेवलप करेंगे। इस बात को कहे तीन साल बीत गए लेकिन पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं हो पाई। इसको लेकर छात्र संगठनों में आक्रोश है। यह मुद्दा एसएफएस, आइसा, पीएसयू ललकार आदि संगठनों ने प्रमुखता से उठाया था। अब फिर से इस मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार हो रही है। इसमें फिर पीयू प्रशासन कठघरे में खड़ा होगा।
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पीयू में छात्र-छात्राओं के हॉस्टलों की संख्या लगभग 20 है। इन हॉस्टलों में 6700 से अधिक विद्यार्थियों को हर साल जगह दी जाती है। आंकड़ों को देखें तो पीयू में हर साल 16 हजार से अधिक स्टूडेंट्स शिक्षा पाते हैं। नौ हजार से अधिक विद्यार्थी हॉस्टल के लिए अप्लाई करते हैं। सीटों की संख्या में मुताबिक उन्हें यह दिया जाता है। छात्र संगठनों का आरोप है कि हॉस्टलों में स्टूडेंट्स को रूम देने का कोई क्राइटेरिया नहीं है। वार्डन जिसे चाहे एडमिशन दे देते हैं। जिन विद्यार्थियों को हॉस्टल की जरूरत होती है उन्हें रूम नहीं मिल पाते। यहां तक कि एक-एक रूम में तीन से चार विद्यार्थी भी प्रवेश कर दिए जाते हैं। इसके पीछे बड़ा खेल होता है।
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इसी को लेकर संगठनों ने विरोध किया और कहा कि इस व्यवस्था को पारदर्शी किया जाए। ऑनलाइन प्रक्रिया होगी तो जरूरतमंद छात्रों को हॉस्टलों में एडमिशन मिल जाएंगे। पीयू प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि वह जल्द ही सॉफ्टवेयर डेवलप करेंगे। इस बात को कहे तीन साल बीत गए लेकिन पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं हो पाई। इसको लेकर छात्र संगठनों में आक्रोश है। यह मुद्दा एसएफएस, आइसा, पीएसयू ललकार आदि संगठनों ने प्रमुखता से उठाया था। अब फिर से इस मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार हो रही है। इसमें फिर पीयू प्रशासन कठघरे में खड़ा होगा।
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