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अधिकारियों की मिलीभगत से गबन
अनिल भारद्वाज/करनाल,अमर उजाला
Updated Tue, 15 Mar 2016 01:04 AM IST
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एनडीआरआई के निकरा प्रोजेक्ट में की गई एक करोड़ 20 लाख की गड़बड़ी में लगातार नये खुलासे हो रहे हैं। प्राथमिक जांच में यह सामने आया है कि प्रोजेक्ट में आये पैसा निकालने का पूरा खेल संस्थान के ही कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ है। मुख्य आरोपी सुखविंद्र खर्च के बिल बनाता रहा और आगे से आगे अधिकारी व कर्मचारी उन्हें पास करते रहे।
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अब संस्थान के अधिकारी खुद को पाक साफ दिखाने में जुटे हैं और अपने बचाव के लिए तथ्य जुटा रहे हैं। हालांकि, संस्थान के अधिकारियों ने पांच आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराकर एक तरह से मामले से पल्ला झाड़ लिया है। लेकिन अभी इस मामले की परतें खुलनी बाकी हैं। पुलिस सूत्रों का दावा है कि यह खेल अकेले सुखविंद्र व उसके साथियों का नहीं है, बल्कि उनके अधिकारियों पर शक की सूई घूम रही है।
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बता दें कि मुख्य आरोपी सुखविंद्र सिंह संस्थान के अधिकारियों का चहेता रहा है। उसका पद रिसर्च एसोसिएसट का है, लेकिन एमबीए होने के कारण वह पिछले पांच साल एनडीआरआई का अकाउंट्स ब्रांच संभालता है और संस्थान के लिए पैसे निकालता था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि सुखविंद्र प्रोजेक्ट के तहत खर्च के बिल बनाता था और यह बिल कई प्रोसेस से गुजर कर ही अधिकारियों के पास पहुंचते थे और वे झट से पास हो जाते थे। ऐसे में पहला सवाल यही है कि आखिर बिना जांच पड़ताल के ही पिछले पांच साल के बिल कैसे पास होेते रहे?
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अभी पुलिस के जांच अधिकारियों को भी यह बात भी हजम नहीं हो पाई है कि एक डीसी रेट पर लगा युवक यह सारा काम कर सकता है। खुद पुलिस के अधिकारी भी मान रहे हैं कि इसमें एनडीआरआई के अन्य कर्मचारी व अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। अब पुलिस संस्थान का अन्य रिकार्ड भी मांगने की तैयारी कर रही है, ताकि पूरे मामले का खुलासा हो सके और जो लोग पर्दे के पीछे हैं उनके नामों का भी खुलास हो सके। सोमवार को एनडीआरआई द्वारा उपलब्ध कराया काफी रिकार्ड व बैंक अकाउंट की डिटेल थाना प्रभारी प्रतीक कुमार समेत अन्य अधिकारियों ने खंगाला और खातों का मिलान किया। पुलिस अब पिछले पांच साल का रिकार्ड मांगने की तैयारी कर रही है।
अपने-अपने बचाव के लिए कर रहे भागदौड़
उधर, मामला खुलने के बाद एनडीआरआई के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। खुद को बचाने के लिए अधिकारी अब दस्तावेज तैयार कर रहे हैं, ताकि वे पुलिस के सामने पेश कर रहे हैं। पिछले तीन दिन से संस्थान के अधिकारियों की नींद उड़ी हुई है और वे पिछले रिकार्ड को भी खंगालने में जुटे हैं। उधर, सोमवार को संस्थान की विजिलेंस अधिकारी डा. स्मिता ने अपने हैडक्वार्टर को रिपोर्ट भेज दी है। इस रिपोर्ट में भी उन्हीं लोगों को आरोपी बनाया है, जिनके नाम संस्थान ने पुलिस को सौंपे हैं। इस बारे में डा. स्मिता ने बताया कि उन्होंने रिपोर्ट सौंप दी है, रिपोर्ट में क्या है, वे इस बारे में नहीं बता सकती।
एक हिरासत में, पुलिस अन्य आरोपियों के करीब
पुलिस सूत्रों का दावा है कि मुख्य आरोपी सुखविंद्र को लेकर पुलिस अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। पुलिस मनप्रीत कौर, अमरेंद्र श्रीवास्तव व विक्रम की गिरफ्तारी के लिए अलग अलग टीम बनाकर छापेमारी कर रही है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि पुलिस आरोपियों के करीब पहुंच चुकी है और जल्द ही सभी आरोपियों को काबू कर पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा। सोमवार को पुलिस करनाल समेत अन्य स्थानों पर दबिशें दीं। थाना प्रभारी प्रतीक कुमार का कहना है कि बैंक खाते और कागजात देखें, प्रथम दृष्टयता लगता है कि एक अकेला कर्मचारी इतनी बड़ी राशि बिना मिलीभगत के नहीं निकाल सकता, फिर भी जांच के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
अमर उजाला के सवाल
-एक कर्मचारी के पास इतने बड़े संस्थान के अकाउंट्स ब्रांच की पूरी जिम्मेदारी कैसे हो सकती है?
-हर बार बिल बनते गए और पास होते गए, किसी भी अधिकारी व कर्मचारी ने उन पर ऑब्जेशन नहीं लगाए
-एक साल से खाते से ट्रांजेक्शन चल रही है, किस भी अधिकारी ने उसे नहीं संभाला, क्यों?
-क्या बिना किसी अधिकारी की मिलीभगत से इतना बड़ा गोलमाल हो सकता है और बैंक से इतनी बड़ी राशि निकलवाई जा सकती है?
वर्जन
मैं इस बारे में कुछ भी नहीं कह सकता। इस मामले की जांच पुलिस कर रही है या तो पुलिस कुछ बता सकती है या फिर संस्थान के निदेशक।
-डॉ. एसवी सिंह, निकरा प्रोजेक्ट इंचार्ज, एनडीआरआई, करनाल।