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खेड़ी लांबा में मनरेगा मजदूरों द्वारा दी गई शिकायत की जांच करने पहुंची विजिलेंस टीम
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कलायत। जिला कष्ट निवारण समिति अध्यक्ष एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को खेड़ी लांबा के ग्रामीणों ने दी शिकायत की जांच के लिए सोमवार को विजिलेंस टीम सब इंस्पेक्टर सूबे सिंह और कुरुक्षेत्र से भू गर्भ सहायक वैज्ञानिक देवराज टीम सहित गांव में पहुंची।
मौके पर मौजूद शिकायतकर्ता रामविलास, खुशी राम, शमशेर सिंह ने बताया कि वर्ष 2017 में ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत गांव के ढाब वाला तालाब की करीब 375 फीट लंबाई, 175 चौड़ाई और करीब पांच से छह फीट की गहराई तक खुदाई की गई थी। इसके अलावा पंचायत द्वारा गांव में विभिन्न स्थानों पर 10 नलकूप लगाए गए थे। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत मजदूरों द्वारा तालाब खुदाई के दौरान कार्य किया गया था। मजदूरों द्वारा किए गए कार्य के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी करीब 70 हजार रुपये मजदूरी के पंचायत द्वारा अब तक नहीं दिए गए। उन्होंने पंचायत पर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत करवाए गए कार्याें और गांव में लगवाए गए नलकूपों में भारी गोलमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के आदेशों के बाद भी करीब डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो कोई जांच हो पाई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई हो पाई है।
पंचायत विभाग से लिया गया संबंधित रिकार्ड : विजिलेंस सब इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 में पंचायत द्वारा किए गए कार्यों जैसे मनरेगा मजदूरों द्वारा तालाब की खुदाई के रुपये और पंचायत लगाए गए फर्जी तौर से नलकूपों की शिकायत वर्ष 2018 ग्रामीणों ने जिला कष्ट निवारण समिति में दी गई थी। जिसकी जांच स्टेट विजिलेंस को दी गई थी। उन्होंने बताया कि पंचायत विभाग से संबंधित कार्यों का रिकार्ड लिया गया है और साथ-साथ किए गए कार्यों की जांच की जा रही है।
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मजदूरों ने नहीं करवाए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध, पंचायत मजदूरी की राशि देने को तैयार : सरपंच
सरपंच सुमन रानी ने बताया कि मजदूरों द्वारा वर्ष 2017 में किए गए कार्यों के लिए मजदूरों को बैंक कापी व जरूरी कागजात उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया था। ताकि मजदूरों के मस्टरोल को आनलाइन किया जा सके। लेकिन मजदूरों न तो कागजात उपलब्ध करवाए और न ही जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। पंचायत मजदूरों द्वारा किए गए कार्यों की राशि देने के लिए आज भी तैयार है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार है और पंचायत द्वारा सभी कार्य पारदर्शिता से किए गए है। भ्राम पंचायत हर स्तर पर जांच के लिए तैयार है।
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मौके पर मौजूद शिकायतकर्ता रामविलास, खुशी राम, शमशेर सिंह ने बताया कि वर्ष 2017 में ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत गांव के ढाब वाला तालाब की करीब 375 फीट लंबाई, 175 चौड़ाई और करीब पांच से छह फीट की गहराई तक खुदाई की गई थी। इसके अलावा पंचायत द्वारा गांव में विभिन्न स्थानों पर 10 नलकूप लगाए गए थे। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत मजदूरों द्वारा तालाब खुदाई के दौरान कार्य किया गया था। मजदूरों द्वारा किए गए कार्य के तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी करीब 70 हजार रुपये मजदूरी के पंचायत द्वारा अब तक नहीं दिए गए। उन्होंने पंचायत पर आरोप लगाते हुए कहा कि ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा के तहत करवाए गए कार्याें और गांव में लगवाए गए नलकूपों में भारी गोलमाल किया गया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के आदेशों के बाद भी करीब डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो कोई जांच हो पाई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई हो पाई है।
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पंचायत विभाग से लिया गया संबंधित रिकार्ड : विजिलेंस सब इंस्पेक्टर सूबे सिंह ने बताया कि वर्ष 2016 में पंचायत द्वारा किए गए कार्यों जैसे मनरेगा मजदूरों द्वारा तालाब की खुदाई के रुपये और पंचायत लगाए गए फर्जी तौर से नलकूपों की शिकायत वर्ष 2018 ग्रामीणों ने जिला कष्ट निवारण समिति में दी गई थी। जिसकी जांच स्टेट विजिलेंस को दी गई थी। उन्होंने बताया कि पंचायत विभाग से संबंधित कार्यों का रिकार्ड लिया गया है और साथ-साथ किए गए कार्यों की जांच की जा रही है।
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मजदूरों ने नहीं करवाए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध, पंचायत मजदूरी की राशि देने को तैयार : सरपंच
सरपंच सुमन रानी ने बताया कि मजदूरों द्वारा वर्ष 2017 में किए गए कार्यों के लिए मजदूरों को बैंक कापी व जरूरी कागजात उपलब्ध करवाने के लिए कहा गया था। ताकि मजदूरों के मस्टरोल को आनलाइन किया जा सके। लेकिन मजदूरों न तो कागजात उपलब्ध करवाए और न ही जरूरी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। पंचायत मजदूरों द्वारा किए गए कार्यों की राशि देने के लिए आज भी तैयार है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा लगाए गए सभी आरोप निराधार है और पंचायत द्वारा सभी कार्य पारदर्शिता से किए गए है। भ्राम पंचायत हर स्तर पर जांच के लिए तैयार है।