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Kaithal News: कलायत का अनोखा गांव, आबादी कुल पांच और मतदाता है एक
Tue, 24 Sep 2024 06:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 24 Sep 2024 06:07 AM IST
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निशीकांत शर्मा
कलायत। खंड मुख्यालय से केवल सात किलोमीटर की दूरी पर एक ऐसा गांव बसा है जिसकी आबादी केवल पांच है। और पांच की आबादी में भी मतदाता केवल एक ही है। जी हां हम बात कर रहे हैं गांव खंडालवा की जिसकी राजस्व रिकॉर्ड में पहचान बे-चिराग गांव के रूप में है।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार पूरे गांव की विरासत मंदिर के नाम है और भगवान शिव ही इस गांव के सरंपच व पंच हैं। इस गांव के नाम 16 एकड़ कृषि और गैर कृषि भूमि है। ज्यादातर भूमि पर गायों के लिए चारा ही बोया जाता है। गांव के नाम से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, डाकघर व पटवारी भी अलग से है, लेकिन इसके नाम से पंचायत नहीं है। इसी वजह से इसे मटौर गांव की पंचायत से जोड़ा गया है।
पांच में से एक ही संत करता है मतदान ः खंडालवा गांव में जो आबादी है वह पौराणिक महत्ता के शिव मंदिर में रहने वाले संत हैं। मंदिर के महंत रघुनाथ गिरी ने बताया कि मंदिर में कुल पांच संत रहते हैं। लोकसभा चुनाव में केवल लाल गिरी ने मतदान किया था। मंदिर में रह रहे संत प्रभात गिरी ने कहा कि वे 80 वर्ष के हो गए हैं जब से उन्होंने संन्यास लिया तब से लेकर आज तक उन्होंने अपना वोट ही नहीं बनवाया। रघुनाथ गिरी का कहना था कि संतों का राजनीति से दूर रहना ही बेहतर है।
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पौराणिक महत्ता का है स्थान
पुराणों के अनुसार इस मंदिर का संबंध भगवान राम के पूर्वज राजा खट्वांग से है। ऐसी मान्यता है कि भगवान राम से 10 पीढ़ी पूर्व हुए उनके अग्रज राजा खट्वांग ने राजकाज त्याग कर यहां भगवान शिव की आराधना की थी। भगवान ने इस स्थान पर उन्हें अपने नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद दिया था। इसके बाद यहां भगवान शिव का शिवलिंग उत्पन्न हुआ। बाद में इस मंदिर का महाराजा पटियाला ने जीर्णोद्धार कराया था। वर्ष 1987 में महंत पुरुषोत्तम गिरी व बाबा रामगिरी के प्रयासों से मंदिर को भव्य स्वरूप दिया गया। पुरुषोतम गिरी के शरीर छोड़ देने के बाद गिरिजा गिरी ने महंती संभाली उनके बाद घनश्याम गिरी महंत बने। दोनों के शरीर छोड़ देने के बाद इस समय महंत रघुनाथ गिरी हैं पर उनका वोट नहीं है।
आकर्षण का केंद्र है शिव मंदिर
खंडालवा स्थित शिवधाम पर प्राचीन शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र है। यहां कई किलोमीटर की दूरी तय कर महाशिवरात्रि के दिन लोग पूजा के लिए पहुंचते हैं। मंदिर एक टीले के ऊपर बना हुआ है और खोदाई के दौरान प्राचीन सिक्के, टूटे बर्तन, मूर्तियां आदि मिल चुकी हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां किसी समय में कोई विकसित संस्कृति रही होगी, जो बाद में विलुप्त हो गई।
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कलायत। खंड मुख्यालय से केवल सात किलोमीटर की दूरी पर एक ऐसा गांव बसा है जिसकी आबादी केवल पांच है। और पांच की आबादी में भी मतदाता केवल एक ही है। जी हां हम बात कर रहे हैं गांव खंडालवा की जिसकी राजस्व रिकॉर्ड में पहचान बे-चिराग गांव के रूप में है।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार पूरे गांव की विरासत मंदिर के नाम है और भगवान शिव ही इस गांव के सरंपच व पंच हैं। इस गांव के नाम 16 एकड़ कृषि और गैर कृषि भूमि है। ज्यादातर भूमि पर गायों के लिए चारा ही बोया जाता है। गांव के नाम से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल, डाकघर व पटवारी भी अलग से है, लेकिन इसके नाम से पंचायत नहीं है। इसी वजह से इसे मटौर गांव की पंचायत से जोड़ा गया है।
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पांच में से एक ही संत करता है मतदान ः खंडालवा गांव में जो आबादी है वह पौराणिक महत्ता के शिव मंदिर में रहने वाले संत हैं। मंदिर के महंत रघुनाथ गिरी ने बताया कि मंदिर में कुल पांच संत रहते हैं। लोकसभा चुनाव में केवल लाल गिरी ने मतदान किया था। मंदिर में रह रहे संत प्रभात गिरी ने कहा कि वे 80 वर्ष के हो गए हैं जब से उन्होंने संन्यास लिया तब से लेकर आज तक उन्होंने अपना वोट ही नहीं बनवाया। रघुनाथ गिरी का कहना था कि संतों का राजनीति से दूर रहना ही बेहतर है।
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पौराणिक महत्ता का है स्थान
पुराणों के अनुसार इस मंदिर का संबंध भगवान राम के पूर्वज राजा खट्वांग से है। ऐसी मान्यता है कि भगवान राम से 10 पीढ़ी पूर्व हुए उनके अग्रज राजा खट्वांग ने राजकाज त्याग कर यहां भगवान शिव की आराधना की थी। भगवान ने इस स्थान पर उन्हें अपने नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद दिया था। इसके बाद यहां भगवान शिव का शिवलिंग उत्पन्न हुआ। बाद में इस मंदिर का महाराजा पटियाला ने जीर्णोद्धार कराया था। वर्ष 1987 में महंत पुरुषोत्तम गिरी व बाबा रामगिरी के प्रयासों से मंदिर को भव्य स्वरूप दिया गया। पुरुषोतम गिरी के शरीर छोड़ देने के बाद गिरिजा गिरी ने महंती संभाली उनके बाद घनश्याम गिरी महंत बने। दोनों के शरीर छोड़ देने के बाद इस समय महंत रघुनाथ गिरी हैं पर उनका वोट नहीं है।
आकर्षण का केंद्र है शिव मंदिर
खंडालवा स्थित शिवधाम पर प्राचीन शिव मंदिर आकर्षण का केंद्र है। यहां कई किलोमीटर की दूरी तय कर महाशिवरात्रि के दिन लोग पूजा के लिए पहुंचते हैं। मंदिर एक टीले के ऊपर बना हुआ है और खोदाई के दौरान प्राचीन सिक्के, टूटे बर्तन, मूर्तियां आदि मिल चुकी हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां किसी समय में कोई विकसित संस्कृति रही होगी, जो बाद में विलुप्त हो गई।