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Kaithal News: दिनभर मौसम साफ, एक डिग्री लुढ़का न्यूनतम पारा
Wed, 10 Sep 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Wed, 10 Sep 2025 01:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में मंगलवार को पूरे दिन आसमान में मौसम शुष्क एवं साफ बना रहा। हवा की गति छह किलोमीटर प्रति घंटा रही। दिन का अधिकतम तापमान 33.7 व न्यूनतम 25.1 डिग्री दर्ज किया गया। एक दिन पहले की तुलना में न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस गिरा है। हालांकि दिन में गर्मी व उमस ऐसे ही बनी रही जिससे लोगों एक बार गर्मी से परेशानी हुई। सुबह से ही आसमान साफ बना रहा जिससे पूरे दिन में धूप खिली।
स्थानीय किसानों का कहना है कि मौसम के इस उतार-चढ़ाव से फसलों व सब्जियों को नुकसान की आंशका है। अब करीबन मानसून की विदाई का समय आ गया है। 20 सितंबर के आसपास मानसून की विदाई मानी जा रही है।
मौसम विशेषज्ञ रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि अब आठ से 15 सितंबर के बीच मानसून की रफ्तार थमने के आसार हैं। अब मानसून की बरसात को फिलहाल बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती परिसंचरण ही बनाए रखेगा। यह व्यवस्था अगले पांच दिन तक वहीं घूमता रहेगा और 12-13 सितंबर को कमजोर रूप में अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ेगा।
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लेकिन इसका असर केवल तटीय और मध्य भारत तक सीमित रहेगा। पिछले एक सप्ताह के दौरान कई हिस्सों में तेज बारिश और बाढ़ देखने को मिली है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों, मैदानी इलाकों और गुजरात में हुआ है।
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कैथल। जिले में मंगलवार को पूरे दिन आसमान में मौसम शुष्क एवं साफ बना रहा। हवा की गति छह किलोमीटर प्रति घंटा रही। दिन का अधिकतम तापमान 33.7 व न्यूनतम 25.1 डिग्री दर्ज किया गया। एक दिन पहले की तुलना में न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस गिरा है। हालांकि दिन में गर्मी व उमस ऐसे ही बनी रही जिससे लोगों एक बार गर्मी से परेशानी हुई। सुबह से ही आसमान साफ बना रहा जिससे पूरे दिन में धूप खिली।
स्थानीय किसानों का कहना है कि मौसम के इस उतार-चढ़ाव से फसलों व सब्जियों को नुकसान की आंशका है। अब करीबन मानसून की विदाई का समय आ गया है। 20 सितंबर के आसपास मानसून की विदाई मानी जा रही है।
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मौसम विशेषज्ञ रमेश चंद्र वर्मा ने बताया कि अब आठ से 15 सितंबर के बीच मानसून की रफ्तार थमने के आसार हैं। अब मानसून की बरसात को फिलहाल बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती परिसंचरण ही बनाए रखेगा। यह व्यवस्था अगले पांच दिन तक वहीं घूमता रहेगा और 12-13 सितंबर को कमजोर रूप में अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ेगा।
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लेकिन इसका असर केवल तटीय और मध्य भारत तक सीमित रहेगा। पिछले एक सप्ताह के दौरान कई हिस्सों में तेज बारिश और बाढ़ देखने को मिली है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान उत्तर भारत के पर्वतीय राज्यों, मैदानी इलाकों और गुजरात में हुआ है।