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Kaithal News: स्टेशन के वेटिंग हॉल में न दरवाजे हैं और न कुर्सी, यात्री परेशान

Wed, 31 Dec 2025 01:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Wed, 31 Dec 2025 01:18 AM IST
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The waiting hall at the station has no doors and no chairs, leaving passengers distressed.
संवाद न्यूज एजेंसी
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कैथल। शहर में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे का असर रेल यातायात पर साफ नजर आ रहा है। ट्रेनें दो से तीन घंटे की देरी से पहुंच रही हैं, जिससे यात्रियों को लंबे समय तक रेलवे स्टेशन पर इंतजार करना पड़ रहा है।

हालात यह हैं कि स्टेशन पर बनाए गए वेटिंग हॉल में दोनों तरफ दरवाजे तक नहीं लगे हैं और अंदर बैठने के लिए कुर्सियों की भी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में ठंडी हवाओं के बीच ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों को कंपकंपी के साथ समय काटना पड़ रहा है।
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रात के समय स्टेशन और बस अड्डे के आसपास तमाम लोग खुले आसमान के नीचे रात गुजारने को मजबूर हैं। हैरानी की बात यह है कि प्रशासन की ओर से रैन बसेरों की व्यवस्था के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों और यात्रियों तक इन सुविधाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है।
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पड़ताल में सामने आया कि कैथल बस अड्डे पर बनाया गया अस्थायी रैन बसेरा न तो क्षमता में पर्याप्त है और न ही सुविधाओं के लिहाज से। वहीं रेलवे स्टेशन पर बना सरकारी यात्री निवास स्थान दोनों तरफ से खुला हुआ है। यहां न गेट लगे हैं और न ही ठंडी हवा रोकने के लिए रोशनदान की व्यवस्था की गई है। भवन का निर्माण तो किया गया है, लेकिन अधूरी सुविधाओं के कारण यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

कई यात्रियों को ठहरने के लिए जगह तक नहीं मिल पाती, तो कहीं कंबल, हीटर और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। मजबूरी में लोग प्लेटफॉर्म, फुटपाथ और शेड के नीचे ठंड से कांपते हुए रात गुजार रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कैथल रेलवे स्टेशन से रोजाना करीब दो हजार यात्री सफर करते हैं, लेकिन उनके लिए ठंड से राहत की ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही।
ठहरने या ठंड से बचने की व्यवस्था नहीं

सीमित इंतजाम, निगरानी की कमी और जानकारी के अभाव में यात्री रैन बसेरे की बजाय खुले में सोने को मजबूर हैं। इससे ठंड के कारण बीमार पड़ने का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं को लेकर किए जा रहे दावे जमीनी हकीकत में कमजोर साबित हो रहे हैं। यात्री अमन, विवेक, राजू, टीकू और मोनू ने बताया कि ट्रेनों के तीन–चार घंटे लेट होने की जानकारी तो मिल जाती है, लेकिन ठहरने या ठंड से बचाव के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं कराई जाती। उन्होंने कहा कि बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे ज्यादा परेशान हैं।

रेलवे की ओर से यात्रियों के लिए बैठने की व्यवस्था और शेल्टर उपलब्ध है, जबकि रैन बसेरे नगर परिषद के दायरे में आते हैं। रेलवे स्टेशन परिसर में ठहरने वाले यात्रियों को रैन बसेरे की जानकारी दी जाती है और जरूरत पड़ने पर नगर परिषद को सूचित भी किया जाता है। कोहरे के कारण ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो रहा है और सुरक्षा कारणों से गति कम करनी पड़ती है, जिससे ट्रेनों में देरी होती है। यात्रियों को अनाउंसमेंट के माध्यम से स्थिति की जानकारी दी जाती है और शेल्टर का उपयोग करने की अपील भी की जाती है। -नरेंद्र शर्मा, स्टेशन मास्टर
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