फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   The sale of government land on paper, sword of action against Patwari and Sub Registrar

एक पटवारी व सब रजिस्ट्रार नरवाना की लापरवाही से निजी हो गई सरकारी जमीन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 18 Feb 2022 02:07 AM IST
विज्ञापन
The sale of government land on paper, sword of action against Patwari and Sub Registrar
कैथल। बात्ता गांव में 38 साल पहले एक पटवारी और तत्कालीन रजिस्टरी करने वाले सब रजिस्ट्रार नरवाना की लापरवाही से सरकारी जमीन कागजों में निजी हो गई। जबकि यह भूमि इंदिरा आवास योजना के तहत लाभार्थियों को दी गई है और फिलहाल उन्हीं का कब्जा है। लेकिन कागजों में नाम के आधार पर इस जमीन पर न केवल सरकारी मुआवजा और लोन लिया गया, बल्कि जिस व्यक्ति के नाम जमीन की गई थी, उसकी विधवा पत्नी ने इस जमीन को आगे 50 लाख रुपये में बेच दिया। जांच में मामले का खुलासा होने के बाद जमीन बेचने और खरीदने वालों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में पुलिस कार्रवाई और खरीद-फरोख्त में किए गए इंतकाल को रद्द करने की सिफारिश की है।
विज्ञापन

बात्ता गांव निवासी बीरभान ने शिकायत दी थी कि गांव में सरकारी भूमि को मिलीभगत करके निजी लोगों को बेचा गया है, जबकि इस जमीन पर पात्र लोग काबिज हैं। डीसी प्रदीप दहिया ने इस मामले की जांच सीटीएम गुलजार अहमद को सौंपी थी। जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि यह जमीन वर्ष 1984 में इंदिरा आवास योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को अलॉट की गई थी, जिस पर पात्र व्यक्ति काबिज हैं, लेकिन वर्ष 1984 में जमाबंदी में संशोधन न करके तत्कालीन पटवारी मौजा बाता और सब रजिस्ट्रार नरवाना ने लापरवाही बरती। वर्ष 2004 तक यह जमीन सरकार के अधीन थी, लेकिन इसके बाद उक्त दोनों की लापरवाही से जमाबंदी में इस जमीन को गांव बात्ता निवासी फकीरिया के नाम दिखाया गया।
विज्ञापन

इसके बाद फकीरिया ने इस जमीन पर पंजाब लैंड मॉरगेज बैंक से लोन ले लिया। इसके बाद इस जमीन का कुछ हिस्सा नेशनल हाईवे के लिए अधिग्रहीत किया गया, जिसमें 6 लाख 90 हजार 633 रुपये की मुआवजा राशि फकीरिया की पत्नी रेशमा ने प्राप्त किए। रेशमा ने यह राशि लेकर एनएचएआई के साथ धोखाधड़ी की। फिर रेशमा ने ही यह जमीन 50 लाख रुपये में बात्ता निवासी अनिल, संजू, बलजीत, तेजपाल को बेच दी। दोनों पक्षों ने इस खरीद-फरोख्त को स्वीकार किया है, लेकिन रजिस्टरी में जो चेक दिए गए हैं, उनमें से कुछ चेकों का भुगतान नहीं हुआ है। इससे स्पष्ट है कि खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़ा हुआ है। ऐसे में इस जमीन को खरीदने वाले व बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी कैथल को लिखा जाना उचित होगा। जांच अधिकारी ने खरीद-फरोख्त के लिए हुई रजिस्टरी और दर्ज इंतकाल को भी रद्द करने की सिफारिश की है। वहीं जांच में शामिल होते हुए रेशमा देवी ने 50 लाख रुपये में यह जमीन बेचने की बात स्वीकार की है और शिकायत को झूठा करार देते हुए इसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने की नीयत से की गई शिकायत बताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

डीसी प्रदीप दहिया ने कहा कि इस मामले में जांच रिपोर्ट के आधार पर खरीदने वाले व बेचने वालों के खिलाफ केस दर्ज करवाया जाएगा। इसके बाद खरीद-फरोख्त के कागजात को राजस्व रिकॉर्ड में नियमानुसार ठीक किया जाएगा। साथ ही राजस्व विभाग के जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस मामले में संलिप्त पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed