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Kaithal News: डीएमसी ने ईओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यालय लिखा
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कैथल। प्रापर्टी टैक्स और विकास शुल्क कम कर जारी की गई एनओसी के मामले में जिला नगर आयुक्त की ओर से सख्त रुख अपनाया जा रहा है। उन्होंने प्रापर्टी आईडी में मिली नगर परिषद ईओ की अनियमितता के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्यालय लिख दिया है। लिखे गए पत्र में सख्त विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई है। इसमें कहा गया है कि इस तरह की अनियमितताओं से विभाग की साख पर विपरित असर पड़ा है। जांच रिपोर्ट में ईओ की लाॅग-इन आईडी से गड़बड़ की गई है। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस मामले में अंदेशा जताया जा रहा है कि इसमें क्लर्कों की भूमिका भी संदिग्ध हो सकती है।
60- 70 प्रापर्टी आईडी में गड़बड़
जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि इस गड़बड़ी के तार नगर परिषद के ईओ की लॉग-इन आईडी से जुड़े हैं। शुरुआती जांच में ही करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी उजागर हुई है। जांच कमेटी की ओर से की गई स्क्रूटनी के दौरान कुल 109 प्रापर्टी आईडी की गहराई से जांच की गई। इनमें से 60-70 प्रापर्टी आईडी में भारी वित्तीय अनियमितता और नियमों का उल्लंघन पाया गया। कई संपत्तियों के विवरण बदल दिए गए, तो कई जगहों पर नियमों को दरकिनार कर एक-दूसरे के नाम प्रापर्टी आईडी ट्रांसफर कर दी गईं। जिन संपत्तियों पर लाखों रुपये का विकास शुल्क बनता था, उनकी आईडी में बदलाव कर उस शुल्क को महज कुछ हजार रुपये दिखा दिया गया। इसके बाद, कम पैसे जमा करवाकर नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए।
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ईओ के पास जाता था ओटीपी
जांच रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा खेल ईओ की लॉग-इन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करके किया गया।
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जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर ईओ के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई के लिए फाइल उच्च अधिकारियों को भेजी है।
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60- 70 प्रापर्टी आईडी में गड़बड़
जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि इस गड़बड़ी के तार नगर परिषद के ईओ की लॉग-इन आईडी से जुड़े हैं। शुरुआती जांच में ही करोड़ों रुपये की वित्तीय गड़बड़ी उजागर हुई है। जांच कमेटी की ओर से की गई स्क्रूटनी के दौरान कुल 109 प्रापर्टी आईडी की गहराई से जांच की गई। इनमें से 60-70 प्रापर्टी आईडी में भारी वित्तीय अनियमितता और नियमों का उल्लंघन पाया गया। कई संपत्तियों के विवरण बदल दिए गए, तो कई जगहों पर नियमों को दरकिनार कर एक-दूसरे के नाम प्रापर्टी आईडी ट्रांसफर कर दी गईं। जिन संपत्तियों पर लाखों रुपये का विकास शुल्क बनता था, उनकी आईडी में बदलाव कर उस शुल्क को महज कुछ हजार रुपये दिखा दिया गया। इसके बाद, कम पैसे जमा करवाकर नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए।
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ईओ के पास जाता था ओटीपी
जांच रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरा खेल ईओ की लॉग-इन आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करके किया गया।
जिला नगर आयुक्त कपिल शर्मा ने बताया कि रिपोर्ट के आधार पर ईओ के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई के लिए फाइल उच्च अधिकारियों को भेजी है।