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Kaithal News: ग्योंग ड्रेन में सफाई का न हो सका समाधान
Fri, 06 Sep 2024 04:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Fri, 06 Sep 2024 04:26 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। शहर के बीचों-बीच से गुजर रही ग्योंग ड्रेन में सफाई की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। हर बार मानसून के सीजन में शहर के लोगों को काफी समस्या होती है परंतु इस परेशानी का पिछले कई वर्षों से समाधान नहीं हो पाया है। इस समस्या के समाधान के लिए कई बार कैथल के विधायक लीला राम भी यह मुद्दा उठा चुके हैं।
इसी प्रकार से जिले के कई गांव जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में पाई, सीवन, पाड़ला, बाता, शिमला, गुहला-चीका, भागल, फतेहपुर, टीक, फरल, रोहेड़ियां, शक्ति नगर, राजौंद, ढांड, कौल सहित अन्य गांव हैं जहां पानी की निकासी को लेकर दिक्कत आती है।
मामूली बारिश के बाद भी कई दिन तक पानी भरा रहता है। इससे न सिर्फ वहां की आबादी प्रभावित होती है, बल्कि खेती पर भी बुरा असर पड़ता है। सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों को आने-जाने में कठिनाई होती है, और खेतों में जलभराव से फसलें खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। पाई के खेतों में तो फसल भी खराब हो जाती है और वर्षा के दिनों में किसान फसल भी नहीं लगा पाते।
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व्यवस्था से फेरी नजर
ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी होती है कि वह ड्रेनेज सिस्टम को सुचारू रूप से चलाए, लेकिन अधिकांश पंचायतें इस ओर ध्यान नहीं देतीं। सरपंच और स्थानीय निकायों की उदासीनता के कारण जल निकासी की परंपरागत व्यवस्थाएं खराब स्थिति में हैं। तालाबों की सफाई और अतिक्रमण हटाने के कार्य अधूरे पड़े हैं।
ग्राम पंचायतों द्वारा समय पर ड्रेनेज की सफाई और मेंटेनेंस न करने के कारण समस्या विकराल हो जाती है। सरकार द्वारा इस दिशा में खर्च किए गए बजट के बावजूद स्थितियों में सुधार नहीं हुआ है, जो पंचायतों की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
लोगों का कहना है गंदगी की समस्या की वजह से आलम ये है सेक्टर 18 के प्लाटों के रेट में भी भारी गिरावट है। यदि विभाग द्वारा समय-समय पर इसकी सफाई भी की जाए तो बदबू से लोगों को काफी राहत मिल सकती है।
बदबू से परेशान हैं कॉलोनियों के लोग
शहर की लगभग एक दर्जन कॉलोनियों के सीवरेज का गंदा और बदबूदार पानी व कूड़ा इसी ड्रेन में डाला जा रहा है। बारिश के समय में यह गंदगी बरसाती पानी के फ्लो में भी रुकावट बनती है। नालों के आसपास के एरिया में गंदगी की वजह से बदबू की भरमार रहती है। इससे खासतौर सेक्टर 18 व ड्रेन के आसपास रहने वाले लोग काफी परेशान हैं। गंदगी के कारण ये ड्रेन मक्खी-मच्छरों के ब्रीडिंग के सेंटर बने हुए हैं।
इससे संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका भी रहती है। ढांड रोड, भगत सिंह कॉलोनी, जनकपुरी कॉलोनी, फ्रेंड्स कॉलोनी, मायापुरी कॉलोनी, देवरगढ़ रोड व सेक्टर 18 से होकर यह ड्रेन गुजरती है। इसके कवर न होने से इन सभी कॉलोनियों के लोग गंदगी में जीने के लिए मजबूर हैं।
जलभराव की वजह ड्रेनेज सिस्टम की अव्यवस्था
गांव में जलभराव की मुख्य वजह ड्रेनेज सिस्टम की अव्यवस्था है। मामूली बारिश में भी जलभराव हो जाता है क्योंकि नालों को ड्रेनेज के लिए सही ढंग से उपयोग नहीं किया जाता। कुछ जगहों पर नालों में गोबर और कचरा डाल दिया जाता है, जिससे वे चोक हो जाते हैं। सड़कों की सफाई भी नालों में ही डाली जाती है, जिससे स्थिति और भी खराब हो जाती है। इन सब वजहों से पानी की निकासी सही ढंग से नहीं हो पाती, और गांवों में जलभराव की समस्या विकराल रूप ले लेती है।
10 साल से न हो पाया समाधान
पिछले 10 साल से इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है। इस कारण लोगों को काफी परेशानियां हो रही है। भाजपा सरकार के विधायक स्वयं सत्र में कई बार इस समस्या को प्रमुखता से उठाया, लेकिन फिर भी समस्या ज्यों की त्यों बनी है। यह चुनाव में बड़ा मुद्दा रहने वाला है। -सतबीर गोयत, उपाध्यक्ष, शिक्षा प्रकोष्ठ, आम आदमी पार्टी कैथल।
इस ड्रेन की पानी निकासी को लेकर कई बार मुद्दा विधानसभा में उठाया है। जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी इस समस्या के समाधान की योजना बनाई गई थी। ड्रेन में पानी की निकासी के लिए भूमिगत पाइप लाइन बिछाई जा रही है। कार्यकाल में दौरान पानी निकासी के दूसरे संसाधनों को मजबूत किया है। -लीला राम, निवर्तमान विधायक, कैथल।
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कैथल। शहर के बीचों-बीच से गुजर रही ग्योंग ड्रेन में सफाई की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। हर बार मानसून के सीजन में शहर के लोगों को काफी समस्या होती है परंतु इस परेशानी का पिछले कई वर्षों से समाधान नहीं हो पाया है। इस समस्या के समाधान के लिए कई बार कैथल के विधायक लीला राम भी यह मुद्दा उठा चुके हैं।
इसी प्रकार से जिले के कई गांव जलभराव की समस्या से जूझ रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में पाई, सीवन, पाड़ला, बाता, शिमला, गुहला-चीका, भागल, फतेहपुर, टीक, फरल, रोहेड़ियां, शक्ति नगर, राजौंद, ढांड, कौल सहित अन्य गांव हैं जहां पानी की निकासी को लेकर दिक्कत आती है।
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मामूली बारिश के बाद भी कई दिन तक पानी भरा रहता है। इससे न सिर्फ वहां की आबादी प्रभावित होती है, बल्कि खेती पर भी बुरा असर पड़ता है। सड़कों पर पानी जमा होने से लोगों को आने-जाने में कठिनाई होती है, और खेतों में जलभराव से फसलें खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। पाई के खेतों में तो फसल भी खराब हो जाती है और वर्षा के दिनों में किसान फसल भी नहीं लगा पाते।
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व्यवस्था से फेरी नजर
ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी होती है कि वह ड्रेनेज सिस्टम को सुचारू रूप से चलाए, लेकिन अधिकांश पंचायतें इस ओर ध्यान नहीं देतीं। सरपंच और स्थानीय निकायों की उदासीनता के कारण जल निकासी की परंपरागत व्यवस्थाएं खराब स्थिति में हैं। तालाबों की सफाई और अतिक्रमण हटाने के कार्य अधूरे पड़े हैं।
ग्राम पंचायतों द्वारा समय पर ड्रेनेज की सफाई और मेंटेनेंस न करने के कारण समस्या विकराल हो जाती है। सरकार द्वारा इस दिशा में खर्च किए गए बजट के बावजूद स्थितियों में सुधार नहीं हुआ है, जो पंचायतों की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है।
लोगों का कहना है गंदगी की समस्या की वजह से आलम ये है सेक्टर 18 के प्लाटों के रेट में भी भारी गिरावट है। यदि विभाग द्वारा समय-समय पर इसकी सफाई भी की जाए तो बदबू से लोगों को काफी राहत मिल सकती है।
बदबू से परेशान हैं कॉलोनियों के लोग
शहर की लगभग एक दर्जन कॉलोनियों के सीवरेज का गंदा और बदबूदार पानी व कूड़ा इसी ड्रेन में डाला जा रहा है। बारिश के समय में यह गंदगी बरसाती पानी के फ्लो में भी रुकावट बनती है। नालों के आसपास के एरिया में गंदगी की वजह से बदबू की भरमार रहती है। इससे खासतौर सेक्टर 18 व ड्रेन के आसपास रहने वाले लोग काफी परेशान हैं। गंदगी के कारण ये ड्रेन मक्खी-मच्छरों के ब्रीडिंग के सेंटर बने हुए हैं।
इससे संक्रामक बीमारियां फैलने की आशंका भी रहती है। ढांड रोड, भगत सिंह कॉलोनी, जनकपुरी कॉलोनी, फ्रेंड्स कॉलोनी, मायापुरी कॉलोनी, देवरगढ़ रोड व सेक्टर 18 से होकर यह ड्रेन गुजरती है। इसके कवर न होने से इन सभी कॉलोनियों के लोग गंदगी में जीने के लिए मजबूर हैं।
जलभराव की वजह ड्रेनेज सिस्टम की अव्यवस्था
गांव में जलभराव की मुख्य वजह ड्रेनेज सिस्टम की अव्यवस्था है। मामूली बारिश में भी जलभराव हो जाता है क्योंकि नालों को ड्रेनेज के लिए सही ढंग से उपयोग नहीं किया जाता। कुछ जगहों पर नालों में गोबर और कचरा डाल दिया जाता है, जिससे वे चोक हो जाते हैं। सड़कों की सफाई भी नालों में ही डाली जाती है, जिससे स्थिति और भी खराब हो जाती है। इन सब वजहों से पानी की निकासी सही ढंग से नहीं हो पाती, और गांवों में जलभराव की समस्या विकराल रूप ले लेती है।
10 साल से न हो पाया समाधान
पिछले 10 साल से इस समस्या का कोई समाधान नहीं हो पाया है। इस कारण लोगों को काफी परेशानियां हो रही है। भाजपा सरकार के विधायक स्वयं सत्र में कई बार इस समस्या को प्रमुखता से उठाया, लेकिन फिर भी समस्या ज्यों की त्यों बनी है। यह चुनाव में बड़ा मुद्दा रहने वाला है। -सतबीर गोयत, उपाध्यक्ष, शिक्षा प्रकोष्ठ, आम आदमी पार्टी कैथल।
इस ड्रेन की पानी निकासी को लेकर कई बार मुद्दा विधानसभा में उठाया है। जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में भी इस समस्या के समाधान की योजना बनाई गई थी। ड्रेन में पानी की निकासी के लिए भूमिगत पाइप लाइन बिछाई जा रही है। कार्यकाल में दौरान पानी निकासी के दूसरे संसाधनों को मजबूत किया है। -लीला राम, निवर्तमान विधायक, कैथल।