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Kaithal News: हवन, प्रसाद वितरण के साथ श्रीमद्भागवत कथा का समापन
Tue, 02 Jul 2024 06:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 02 Jul 2024 06:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुहला-चीका। श्री भवानी मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ने हवन और प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ। वृंदावन के कथावाचक आचार्य प्रेम मूर्ति प्रदीप महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन चरित्र, भागवत जी की शिक्षाएं और भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु आदि प्रसंग सुनाएं। इस मौके पर निर्मल शर्मा धर्मपत्नी धर्मपाल शर्मा ने सहपरिवार भागवत पूजन किया।
आचार्य प्रदीप महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से व्यक्ति के विचारों में परिवर्तन आता है। इससे वह अपना कर्तव्य समझते हुए अपने आचरण में सुधार करता है। बताया कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को मुक्ति प्रदान करती है। जिस स्थान पर भी इस पुण्यदायिनी कथा का अनुष्ठान होता है, वह एक तीर्थ बन जाता है। महिमा भागवत धाम की भजन सुनते हुए सभी श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ की परिक्रमा की। श्रद्धालुओं ने जय-जय श्री राधे का उद्घोष किया।
इस अवसर प्रधान राजीव शर्मा, मोती राम गर्ग, बलबीर सैनी, रमेश मिगलानी, कुलदीप माजरा, भूषण शर्मा, संजीव सिप्पी बाबा, गुरमीत सिंह, बलदेव शर्मा, रविंद्र पाली, भोजराज बिंदलिश, कृष्ण धीमान, हरबंस सीड़ा मौजूद रहे।
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गुहला-चीका। श्री भवानी मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ने हवन और प्रसाद वितरण के साथ समापन हुआ। वृंदावन के कथावाचक आचार्य प्रेम मूर्ति प्रदीप महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन चरित्र, भागवत जी की शिक्षाएं और भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु आदि प्रसंग सुनाएं। इस मौके पर निर्मल शर्मा धर्मपत्नी धर्मपाल शर्मा ने सहपरिवार भागवत पूजन किया।
आचार्य प्रदीप महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक प्रवचनों के माध्यम से व्यक्ति के विचारों में परिवर्तन आता है। इससे वह अपना कर्तव्य समझते हुए अपने आचरण में सुधार करता है। बताया कि श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को मुक्ति प्रदान करती है। जिस स्थान पर भी इस पुण्यदायिनी कथा का अनुष्ठान होता है, वह एक तीर्थ बन जाता है। महिमा भागवत धाम की भजन सुनते हुए सभी श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ की परिक्रमा की। श्रद्धालुओं ने जय-जय श्री राधे का उद्घोष किया।
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इस अवसर प्रधान राजीव शर्मा, मोती राम गर्ग, बलबीर सैनी, रमेश मिगलानी, कुलदीप माजरा, भूषण शर्मा, संजीव सिप्पी बाबा, गुरमीत सिंह, बलदेव शर्मा, रविंद्र पाली, भोजराज बिंदलिश, कृष्ण धीमान, हरबंस सीड़ा मौजूद रहे।
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