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धान के सीजन में मिलर्स पुरानी नीतियों पर नहीं करेंगे धान की मिलिंग

Mon, 02 Sep 2019 11:36 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 02 Sep 2019 11:36 PM IST
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rice, millers
24-कैथल। कैथल की अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित मिलर्स एसोसिएशन की बैठक में भाग लेते हरियाणा भर से आए - फोटो : Kaithal
हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन ने एलान किया है कि एक अक्तूबर से शुरू होने वाले धान के सीजन में मिलर्स पुरानी नीतियों पर धान की मिलिंग नहीं कर पाएंगे। सरकार से उनकी मांग है कि प्रति क्विंटल 67 की जगह 62 किलो चावल की रिकवरी व 10 रुपये प्रति क्विंटल की जगह 100 रुपये प्रति क्विंटल की मिलिंग दर का भुगतान किया जाए। ताकि मिलर्स को अपने मिल बंद न करने पड़ें। यह फैसला कैथल की अग्रवाल धर्मशाला में हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन की प्रदेश स्तरीय बैठक में लिया गया। जिसकी अध्यक्षता प्रदेश अध्यक्ष हंसराज ने किया।
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बैठक में हरियाणा के चेयरमैन ज्वैल सिंगला, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जगदीश अग्रवाल, कैथल के अध्यक्ष देवीदयाल गर्ग, मांगे राम खुरानिया, सचिन मित्तल, करनाल के तरावड़ी से नरेश कुमार, अंबाला से जितेंद्र कुमार, अशोक कुमार, नरवाना से संजीव कुमार, नारायणगढ़ से संजीव कुमार, मुस्तफाबाद से सतीश कुमार, लाडवा से प्रमोद धवन, करनाल से विनोद गोयल, राजेंद्र रहेजा, तरावड़ी से राकेश हंस, कुरुक्षेत्र से सतबीर काला, राजकुमार निसिंग, मुकेश गोयल नरवाना सहित भारी संख्या में मिलर्स ने भाग लिया।
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मिलर्स ने कहा कि सीएमआर का काम करने वाले मिलर्स घाटे में है। सरकार मिलर्स की सुनवाई नहीं कर रही। एक क्विंटल धान की मिलिंग के बदले उनसे 67 किलो चावल लिया जाता है। जबकि एक क्विंटल धान में से मुश्किल से 62 किलो चावल निकलता है। इसके अलावा मिलर्स को प्रति क्विंटल मिलिंग के केवल 10 रुपये की राशि दी जाती है। जबकि मिलर्स का करीब 100 रुपये खर्च आता है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा कई कारणों के चलते मिलर्स काम करने में असमर्थ हैं और हर साल कई मिलर्स डिफॉल्टर हो जाते हैं। उनकी मांग है कि मिलिंग के लिए प्रति क्विंटल 100 रुपये व प्रति क्विंटल धान में से जितना चावल निकले, उतनी ही रिकवरी या फिर 67 की बजाए 62 किलो रिकवरी ली जाए। ताकि हरियाणा का चावल उद्योग जिंदा रह सके। आगामी 14 सितंबर को कुरुक्षेत्र में बैठक करके जनरल हाउस द्वारा बड़ा फैसला लिया जाएगा। यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो वे मिलिंग करने में असमर्थ होंगे। हरियाणा में करीब 1000 मिले हैं। जो सरकारी धान से चावल निकाल कर सरकार को देती हैं। इनमें लाखों लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
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