फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kaithal News ›   Randhir Singh lost his leg while facing the enemies in the Kargil war.

Kaithal News: कारगिल युद्ध में दुश्मनों का सामना करते रणधीर सिंह ने गंवाई थी टांग

Fri, 26 Jul 2024 02:44 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Fri, 26 Jul 2024 02:44 AM IST
विज्ञापन
Randhir Singh lost his leg while facing the enemies in the Kargil war.
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कैथल। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध की जीत की खुशी में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। यह दिवस भारतीय सशस्त्र बलों की बहादुरी, साहस और बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने के लिए ही मनाया जाता है। इस बार 25वां कारगिल विजय दिवस मनाया जाएगा। कारगिल के युद्ध में जिले के गांव पाई निवासी फौजी रणधीर सिंह ने भी अपनी बहादुरी कारगिल में दिखाई थी। उन्होंने कारगिल युद्ध में दुश्मनों का सामना करते हुए अपनी टांग गंवा दी थी।

गौरतलब है कि 58 वर्षीय फौजी रणधीर सिंह ने 25 मई 1988 में भारतीय सेना में हवलदार के पद पर तैनात हुए थे। जिनकी पहली पोस्टिंग जम्मू कश्मीर के अखनूर में हुई थी। इसके बाद उन्हें 1999 में कारगिल युद्ध में भेजा गया। फौजी रणधीर सिंह ने बताया कि टीम को सूचना मिली थी कि उग्रवादियों भारतीय सीमा के अंदर प्रवेश कर चुके है। इसके बाद भारतीय सेना व उग्रवादियों के बीच फायरिंग हुई। जिसमें उन्होंने बहादुरी से लड़ाई लड़ी। उन्होंने बताया कि इस बीच उन्हें कई ऑपरेशन में शमिल हुए।
विज्ञापन


फौजी रणधीर सिंह ने बताया कि उनकी रिटायरमेंट 31 मई 2012 को हुई थी। जिसके बाद वह अपने गांव पाई में सादगी का जीवन रहे हैं। फौज से आने के बाद उन्होंने पाई गांव में अपना व्यापार शुरू कर दिया और गांव में ही कमीशन एजेंट बन गए। साथ बताया कि वह मार्केट कमेटी पाई के चेयरमैन भी रह चुके है। वहीं, फौजी रणधीर सिंह को 2010 में यूएनओ की सरकार ने प्रशस्ति पत्र भी दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

शहीद हो गए तीन दोस्त

रणधीर सिंह ने बताया कि वर्ष 1995 में ग्लेशियर में ड्यूटी के दौरान रात के समय पांच जवान गश्त पर थे। बर्फीली हवाओं में एक-एक कदम चलना भारी था। अचानक बर्फ का पहाड़ दरक गया और उसकी आंखों के सामने तीन साथी उसमें दब गए। तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। शहीद होने वाले जवानों में भिवानी निवासी राजपाल, हिमाचल निवासी प्रेम और राजस्थान निवासी महेंद्र सिंह थे। वह और उत्तर प्रदेश निवासी राजेश बाल-बाल बच गए थे। तीनों शहीदों के शव भी करीब छह महीने के बाद मिले थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed