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Kaithal News: मुक्केबाजी में पदक जीतकर खिलाड़ी पा रहे लाखों का कैश अवार्ड
Tue, 22 Oct 2024 03:50 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 22 Oct 2024 03:50 AM IST
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राजिंद्र तंवर
कैथल। जिले के मुक्केबाज देश विदेशों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पदक जीते रहे हैं। पदक जीतने के साथ ही विश्व पटल पर अपने जिले और देश का नाम चमका रहे हैं। मुक्केबाजी में पदक जीत कर ये लाखों के कैश अवार्ड के साथ सम्मान के हकदार भी बनते हैं।
जिले के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी व अर्जुन अवार्डी बॉक्सर मनोज कुमार, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मनीषा मौण सहित अन्य कई खिलाड़ी इस खेल के माध्यम से ऊंचे मुकाम तक पहुंच गए हैं। वहीं, आरकेएसडी इंडोर स्टेडियम में पिछले 2017 से मुक्केबाजी की खेल नर्सरी संचालित है। जिसमें अतंरराष्ट्रीय कोच गुरमीत सिंह, सभी खिलाड़ियों को सुबह शाम अभ्यास करवाते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कोच गुरमीत सिंह ने बताया कि आरकेएसडी इंडोर स्टेडियम स्थित मुक्केबाजी नर्सरी में वैसे तो 25 खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। इनमें 13 लड़के और 12 लड़कियां शामिल हैं। इनके अलावा लगभग 50 अन्य खिलाड़ी भी अभ्यास करने आते हैं। ये सभी खिलाड़ी सुबह दो व शाम को तीन घंटे नर्सरी में अभ्यास करते हैं। सप्ताह में एक दिन पूरे शहर में दौड़ लगाते हैं। कोच ने बताया कि इस नर्सरी के लगभग 15 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर, 50 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर व 250 खिलाड़ी राज्य स्तर पर खेल कर सैकड़ों पदक जीत चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि लगभग 70 खिलाड़ी अपनी मेहनत से खेले कोटे से सरकारी नौकरियां हासिल चुके हैं। कहा कि खेलों के माध्यम से सरकारी नौकरी पाने का सबसे आसान तरीका है। सरकार भी खेलों को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ खिलाड़ियों को लाखों-करोड़ों रुपये का कैश अवार्ड भी दे रही है। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को छह करोड़, विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को लगभग 40 लाख रुपये का कैश अवार्ड, रजत पदक पाने वाले खिलाड़ी को 30 लाख रुपये का कैश अवार्ड और कांस्य पदक जीतने पर 20 लाख रुपये का कैश अवार्ड मिलता है।
वहीं, इसी खेल नर्सरी की अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज खिलाड़ी मनीषा मौण भी विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत कर 20 लाख रुपये का कैश अवार्ड ले चुकी है। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की ओर ध्यान देना चाहिए, पढ़ाई के साथ साथ अपने बच्चों का खेलों में भी भविष्य बनाएं। प्रत्येक विद्यार्थी को किसी ना किसी खेल में भाग लेते रहना
चाहिए ताकि वे नशे से दूर रहें ओर खेलों के साथ उनका मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य भी ठीक रहे। उन्होंने कहा की नर्सरी के सभी खिलाड़ी दिन रात अभ्यास कर रहे हैं। ओर विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक जीत रहे हें। सभी खिलाडिय़ों का सपना है कि वे ओलंपिक में खेलें ओर पदक जीत कर अपने देश व माता-पिता का नाम रोशन करें। संवाद
नर्सरी के खिलाड़ियों
की उपलब्धियां
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी लासु यादव, बीए हैं। वे विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लेकर कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वह चार पदक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, 12 पदक राष्ट्रीय स्तर पर व कईं पदक राज्य स्तर पर जीत चुकी हैं। उनका सपना है कि वह ओलंपिक में खेलें।अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कीर्ति ढुल, बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। वे एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वह छह पदक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और इसके अलावा राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर कई जीत चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी स्नेहा तंवर, बीए अंतिम वर्ष की छात्रा है। वे एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी है। वह छह पदक राष्ट्रीय स्तर पर भी पदक जीत चुकी हैं।अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी संजना, बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। वे एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लेकर कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वह राज्य स्तर पर भी पदक जीत चुकी है।
मुक्केबाजी के ये खिलाड़ी भी नाम कर रहे रोशन
राष्ट्रीय खिलाड़ी निकिता, बीए कर चुकी हैं। वे राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक व ऑल इंडिया सहित कई प्रतियोगिता में पदक जीत चुकी हैं। उनका सपना है कि वह ओलंपिक में खेले।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी योगेश ढांडा, 11वीं के छात्र है। एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीत चुका है। वह छह पदक राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पदक जीत चुके हैं।
राष्ट्रीय खिलाड़ी अंकुश, बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है। वह राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक जीत चुका है। उनका सपना है कि वह ओलंपिक में खेले। वह जबरदस्त मेहनत कर रहे हैं।
राष्ट्रीय खिलाड़ी दीपक, बीए अंतिम वर्ष का छात्र है। वह राष्ट्रीय स्तर पर छह पदक जीत चुका है। ओर ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुका है। मेहनत जारी है। राष्ट्रीय खिलाड़ी कृष, बीए प्रथम वर्ष का छात्र है। वह राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण जीत चुका है। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में भी रजत पदक जीत चुके हैं। सपना है कि ओलंपिक में खेले।
राष्ट्रीय खिलाड़ी गौरव 12वीं कक्षा का छात्र है व राष्ट्र स्तर पर रजत पदक जीत चुका है। उसका सपना है कि वह ओलंपिक में खेले। इसके लिए रोजाना अभ्यास में पसीना बहाता हूं।
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कैथल। जिले के मुक्केबाज देश विदेशों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर पदक जीते रहे हैं। पदक जीतने के साथ ही विश्व पटल पर अपने जिले और देश का नाम चमका रहे हैं। मुक्केबाजी में पदक जीत कर ये लाखों के कैश अवार्ड के साथ सम्मान के हकदार भी बनते हैं।
जिले के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी व अर्जुन अवार्डी बॉक्सर मनोज कुमार, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मनीषा मौण सहित अन्य कई खिलाड़ी इस खेल के माध्यम से ऊंचे मुकाम तक पहुंच गए हैं। वहीं, आरकेएसडी इंडोर स्टेडियम में पिछले 2017 से मुक्केबाजी की खेल नर्सरी संचालित है। जिसमें अतंरराष्ट्रीय कोच गुरमीत सिंह, सभी खिलाड़ियों को सुबह शाम अभ्यास करवाते हैं।
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अंतरराष्ट्रीय कोच गुरमीत सिंह ने बताया कि आरकेएसडी इंडोर स्टेडियम स्थित मुक्केबाजी नर्सरी में वैसे तो 25 खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। इनमें 13 लड़के और 12 लड़कियां शामिल हैं। इनके अलावा लगभग 50 अन्य खिलाड़ी भी अभ्यास करने आते हैं। ये सभी खिलाड़ी सुबह दो व शाम को तीन घंटे नर्सरी में अभ्यास करते हैं। सप्ताह में एक दिन पूरे शहर में दौड़ लगाते हैं। कोच ने बताया कि इस नर्सरी के लगभग 15 खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर, 50 खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर व 250 खिलाड़ी राज्य स्तर पर खेल कर सैकड़ों पदक जीत चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि लगभग 70 खिलाड़ी अपनी मेहनत से खेले कोटे से सरकारी नौकरियां हासिल चुके हैं। कहा कि खेलों के माध्यम से सरकारी नौकरी पाने का सबसे आसान तरीका है। सरकार भी खेलों को बढ़ावा दे रही है। इसके साथ खिलाड़ियों को लाखों-करोड़ों रुपये का कैश अवार्ड भी दे रही है। ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को छह करोड़, विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी को लगभग 40 लाख रुपये का कैश अवार्ड, रजत पदक पाने वाले खिलाड़ी को 30 लाख रुपये का कैश अवार्ड और कांस्य पदक जीतने पर 20 लाख रुपये का कैश अवार्ड मिलता है।
वहीं, इसी खेल नर्सरी की अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज खिलाड़ी मनीषा मौण भी विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत कर 20 लाख रुपये का कैश अवार्ड ले चुकी है। इसलिए अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की ओर ध्यान देना चाहिए, पढ़ाई के साथ साथ अपने बच्चों का खेलों में भी भविष्य बनाएं। प्रत्येक विद्यार्थी को किसी ना किसी खेल में भाग लेते रहना
चाहिए ताकि वे नशे से दूर रहें ओर खेलों के साथ उनका मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य भी ठीक रहे। उन्होंने कहा की नर्सरी के सभी खिलाड़ी दिन रात अभ्यास कर रहे हैं। ओर विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेकर पदक जीत रहे हें। सभी खिलाडिय़ों का सपना है कि वे ओलंपिक में खेलें ओर पदक जीत कर अपने देश व माता-पिता का नाम रोशन करें। संवाद
नर्सरी के खिलाड़ियों
की उपलब्धियां
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी लासु यादव, बीए हैं। वे विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लेकर कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वह चार पदक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, 12 पदक राष्ट्रीय स्तर पर व कईं पदक राज्य स्तर पर जीत चुकी हैं। उनका सपना है कि वह ओलंपिक में खेलें।अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी कीर्ति ढुल, बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। वे एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। वह छह पदक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और इसके अलावा राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर कई जीत चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी स्नेहा तंवर, बीए अंतिम वर्ष की छात्रा है। वे एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी है। वह छह पदक राष्ट्रीय स्तर पर भी पदक जीत चुकी हैं।अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी संजना, बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। वे एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लेकर कांस्य पदक जीत चुकी हैं। वह राज्य स्तर पर भी पदक जीत चुकी है।
मुक्केबाजी के ये खिलाड़ी भी नाम कर रहे रोशन
राष्ट्रीय खिलाड़ी निकिता, बीए कर चुकी हैं। वे राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक व ऑल इंडिया सहित कई प्रतियोगिता में पदक जीत चुकी हैं। उनका सपना है कि वह ओलंपिक में खेले।
अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी योगेश ढांडा, 11वीं के छात्र है। एशियन मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीत चुका है। वह छह पदक राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर पदक जीत चुके हैं।
राष्ट्रीय खिलाड़ी अंकुश, बीए द्वितीय वर्ष का छात्र है। वह राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक जीत चुका है। उनका सपना है कि वह ओलंपिक में खेले। वह जबरदस्त मेहनत कर रहे हैं।
राष्ट्रीय खिलाड़ी दीपक, बीए अंतिम वर्ष का छात्र है। वह राष्ट्रीय स्तर पर छह पदक जीत चुका है। ओर ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीत चुका है। मेहनत जारी है। राष्ट्रीय खिलाड़ी कृष, बीए प्रथम वर्ष का छात्र है। वह राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण जीत चुका है। ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में भी रजत पदक जीत चुके हैं। सपना है कि ओलंपिक में खेले।
राष्ट्रीय खिलाड़ी गौरव 12वीं कक्षा का छात्र है व राष्ट्र स्तर पर रजत पदक जीत चुका है। उसका सपना है कि वह ओलंपिक में खेले। इसके लिए रोजाना अभ्यास में पसीना बहाता हूं।