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Kaithal News: एमएसपी से कम दाम पर बिक रहा धान
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धान के कट्टों से अटी कैथल की अतिरिक्त अनाजमंडी। संवाद
- फोटो : Samvad
नरेंद्र पंडित
कैथल। जिले की अनाज मंडियों में धान की बंपर आवक के बीच खरीद व्यवस्था पूरी तरह बे-पटरी है। मंडियों में खुलेआम सरकारी एमएसपी की धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन प्रशासनिक तंत्र लिखित शिकायत न होने के बहाने लगाकर अपना दामन बचा रहा है। दूसरी तरफ, किसानों से कम दाम में धान खरीद कर सरेआम लूट जारी है। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा एमएसपी 2461 और हाइब्रिड का 2441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन उनसे फसल औने-पौने दामों पर खरीदी जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हैफेड, डीएफएससी और वेयरहाउस के निरीक्षक तंग कर रहे हैं। अधिकारियों के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। प्रशासनिक अमला नियमों की आड़ लेकर केवल लिखित शिकायत मिलने की बाट में है। धरातल पर किसान चाहकर भी लिखित में शिकायत दर्ज नहीं रहे हैं, क्योंकि किसानों और आढ़तियों के बीच सालों पुराना लेनदेन और वित्तीय निर्भरता का जाल है। भविष्य में आढ़तियों से कर्ज मिलने की मजबूरी के कारण किसान उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं कर पा रहे हैं।
नमी का बहाना देकर कम दाम में खरीद : किसान नेता विक्रम कसाना ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद एजेंसियों, राइस मिलर्स, मार्केट कमेटी और आढ़तियों के बीच गठजोड़ के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनके अनुसार, किसान जब आढ़ती के पास धान लेकर पहुंचता है तो खरीद एजेंसी के निरीक्षक और व्यापारी नमी का हवाला देकर खरीद टाल देते हैं। संवाद
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कैथल। जिले की अनाज मंडियों में धान की बंपर आवक के बीच खरीद व्यवस्था पूरी तरह बे-पटरी है। मंडियों में खुलेआम सरकारी एमएसपी की धज्जियां उड़ रही हैं, लेकिन प्रशासनिक तंत्र लिखित शिकायत न होने के बहाने लगाकर अपना दामन बचा रहा है। दूसरी तरफ, किसानों से कम दाम में धान खरीद कर सरेआम लूट जारी है। किसानों का आरोप है कि सरकार द्वारा एमएसपी 2461 और हाइब्रिड का 2441 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन उनसे फसल औने-पौने दामों पर खरीदी जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हैफेड, डीएफएससी और वेयरहाउस के निरीक्षक तंग कर रहे हैं। अधिकारियों के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। प्रशासनिक अमला नियमों की आड़ लेकर केवल लिखित शिकायत मिलने की बाट में है। धरातल पर किसान चाहकर भी लिखित में शिकायत दर्ज नहीं रहे हैं, क्योंकि किसानों और आढ़तियों के बीच सालों पुराना लेनदेन और वित्तीय निर्भरता का जाल है। भविष्य में आढ़तियों से कर्ज मिलने की मजबूरी के कारण किसान उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं कर पा रहे हैं।
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नमी का बहाना देकर कम दाम में खरीद : किसान नेता विक्रम कसाना ने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद एजेंसियों, राइस मिलर्स, मार्केट कमेटी और आढ़तियों के बीच गठजोड़ के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनके अनुसार, किसान जब आढ़ती के पास धान लेकर पहुंचता है तो खरीद एजेंसी के निरीक्षक और व्यापारी नमी का हवाला देकर खरीद टाल देते हैं। संवाद
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