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Kaithal News: शहीदी दिवस पर बहुभाषी कवि-सम्मेलन
Sat, 27 Sep 2025 09:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sat, 27 Sep 2025 09:53 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सीवन। माता गुजरी पब्लिक स्कूल, कांगथली में गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में बहुभाषी कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति अकादमी, पंचकूला की ओर से किया गया।
सत्र का शुभारंभ पंजाबी साहित्य अकादमी के निदेशक सरदार हरपाल सिंह चीका ने किया। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी, गुरु गोविंद सिंह जी और बंदा बहादुर जी की शौर्य गाथाओं का उल्लेख करते हुए धर्म-परिवर्तन के खिलाफ उनके संघर्ष को याद किया। खंड शिक्षा अधिकारी अनिल छाबड़ा ने कहा कि गुरु जी की कुर्बानियां मानवता के इतिहास में अमिट हैं। अमृत लाल मदान ने उनके बलिदान को अमर गाथा बताया और धर्म, संस्कृति एवं मानव मूल्यों की रक्षा में उनके योगदान को याद किया। इस अवसर पर बाबा बंदा बैरागी से जुड़ी संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शिव शंकर पाहवा तथा खंड शिक्षा अधिकारी सीवन अनिल छाबड़ा विशेष अतिथि रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। कवि-सम्मेलन
के अंत में अतिथियों और कवियों को पटका पहनाकर, गुरु तेग बहादुर जी का चित्र एवं पुष्प-गुच्छ भेंटकर सम्मानित किया गया।
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सीवन। माता गुजरी पब्लिक स्कूल, कांगथली में गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में बहुभाषी कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन संस्कृति अकादमी, पंचकूला की ओर से किया गया।
सत्र का शुभारंभ पंजाबी साहित्य अकादमी के निदेशक सरदार हरपाल सिंह चीका ने किया। उन्होंने गुरु तेग बहादुर जी, गुरु गोविंद सिंह जी और बंदा बहादुर जी की शौर्य गाथाओं का उल्लेख करते हुए धर्म-परिवर्तन के खिलाफ उनके संघर्ष को याद किया। खंड शिक्षा अधिकारी अनिल छाबड़ा ने कहा कि गुरु जी की कुर्बानियां मानवता के इतिहास में अमिट हैं। अमृत लाल मदान ने उनके बलिदान को अमर गाथा बताया और धर्म, संस्कृति एवं मानव मूल्यों की रक्षा में उनके योगदान को याद किया। इस अवसर पर बाबा बंदा बैरागी से जुड़ी संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शिव शंकर पाहवा तथा खंड शिक्षा अधिकारी सीवन अनिल छाबड़ा विशेष अतिथि रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। कवि-सम्मेलन
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के अंत में अतिथियों और कवियों को पटका पहनाकर, गुरु तेग बहादुर जी का चित्र एवं पुष्प-गुच्छ भेंटकर सम्मानित किया गया।