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Kaithal News: धान से अटी मंडियां, अब उठान के लिए 5 से 11 बजे तक बंद रहेंगे गेट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Oct 2026 12:02 AM IST
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Markets overflowing with paddy; gates to remain closed from 5 AM to 11 AM to facilitate lifting.
उठान सुचारु न होने के कारण धान के कट्टों से अटी कैथल की नई अनाजमंडी। संवाद
कैथल। जिले की अनाज मंडियों में पीआर धान की आवक तो तेजी से हो रही है लेकिन उस अनुपात में खरीद और उठान का काम धीमी गति से चल रहा है। अब उठान कराने के लिए शाम पांच बजे से 11 बजे तक मंडी के गेट बंद रखने की योजना बनाई गई है। मंगलवार को अतिरिक्त मंडी का गेट बंद किया गया तो किसान भड़क उठे और मौके पर पुलिस पहुंची।
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मंडी प्रशासन का कहना है कि मंडी प्रधानों ने डीसी से प्रार्थना की है कि इस दौरान गेट बंद रखा जाए ताकि उठान हो सके, क्योंकि मंडियों में धान डालने के लिए जगह नहीं बची। पुलिस ने किसानों को समझाने का प्रयास किया। मंगलवार शाम चार बजे तक के आंकड़ों के अनुसार, मंडियों में कुल 26,708 मीट्रिक टन (एमटी) धान की आवक दर्ज की गई। भारी आवक के बीच महज 8,026 मीट्रिक टन धान की ही खरीद की गई है। इसके अलावा सबसे बदतर स्थिति उठान व्यवस्था की है। मंगलवार को पूरे दिन में सिर्फ 91 मीट्रिक टन धान का ही उठान हो सका। अब तक कुल सरकारी एजेंसियों हैफेड, डीएफएससी व वेयरहाउस की ओर से मंडी से मात्र 195 मीट्रिक टन धान ही गोदामों तक पहुंचाया जा सका है।
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उठान की इस गति की वजह से कैथल की अनाज मंडियों में जगह की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। मंडी के हर कोने में धान के कट्टों के ऊंचे-ऊंचे ढेर लग गए हैं। किसानों को अपनी फसल उतारने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बालू के किसान भाग सिंह व सुनील ने आरोप लगाया कि खरीद और उठान से जुड़े एजेंसी अधिकारी इस संकट के लिए बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं।
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एक सोची-समझी साजिश
मंडी में अपनी फसल लेकर पहुंचे किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों और खरीद एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। किसानों का कहना है कि यह सुस्ती कोई प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है। किसानों का आरोप है कि जानबूझकर खरीद और उठान में देरी की जा रही है, ताकि मंडियों में अव्यवस्था फैले। जब किसान कई-कई दिनों तक मंडी में खुले आसमान के नीचे बैठने को मजबूर होंगे, तो वे परेशान होकर अपनी फसल को औने-पौने दामों में निजी व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
करोड़ों रुपये का चूना लगाने की तैयारी

किसान नेता विक्रम कसाना ने कहा कि इस पूरी व्यवस्था के पीछे एक बड़ा खेल चल रहा है। जब मजबूर किसान कम दामों पर अपनी फसल बेचकर घर लौट जाएंगे, तो बाद में इसी धान को फर्जी तरीके से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कागजों में चढ़ा दिया जाएगा। इस तरह से सीधे तौर पर किसानों का हक मारकर और सरकार की आंखों में धूल झोंककर करोड़ों रुपये का चूना लगाने की तैयारी की जा रही है। किसानों ने मांग की है कि उच्च अधिकारी तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करें, उठान कार्य में तेजी लाएं और खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएं ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

मार्केट कमेटी कैथल के सचिव नरेंद्र ढुल ने बताया कि मंडियों के प्रधान ने डीसी से शाम पांच से रात 11 बजे तक मंडी गेट बंद करने को प्रार्थना की। इसे लेकर ट्रायल के तौर पर अतिरिक्त मंडी का गेट बंद किया गया था, ताकि उठान हो सके। अब आढ़तियों के माध्यम से किसानों को इसे लेकर मैसेज भिजवाया जाएगा।
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