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Kaithal News: कक्षा-कक्ष में मूल्य शिक्षा का व्यावहारिक समावेश सीखा
Sun, 14 Sep 2025 01:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 14 Sep 2025 01:13 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। एमडीएन ग्लोबल स्कूल में सीबीएसई प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को एक दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का विषय वैल्यू एजुकेशन रहा। इसके तहत शिक्षकों ने कक्षा-कक्ष में मूल्य शिक्षा का व्यावहारिक समावेश आदि की जानकारियां सीखीं।
कार्यक्रम का संचालन सीबीएसई पंचकूला से आई रिसोर्स पर्सन डॉ. शिवाली शर्मा एवं पंखुरी वालिया ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक डॉ. विनोद कुमार, चेयरपर्सन निधि कांसल, मैनेजर गौरव गर्ग और प्राचार्य डॉ. संत कौशिक ने दीप प्रज्वलन कर की।
सत्र के दौरान रिसोर्स पर्सन ने बताया कि मूल्य शिक्षा केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण की सबसे मजबूत नींव है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान या अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक, संवेदनशील इंसान और समाज के प्रति उत्तरदायी व्यक्तित्व बनाना है। मूल्य शिक्षा के माध्यम से बच्चों में ईमानदारी, सहानुभूति, सहयोग, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण जैसी जीवनोपयोगी विशेषताएं
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विकसित होती हैं।
पहले सत्र में डॉ. शिवाली शर्मा ने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास और अनुशासन की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने समझाया कि समय की पाबंदी, शिक्षक एवं अभिभावकों का सम्मान, स्वच्छता और टीमवर्क जैसे छोटे-छोटे व्यवहार विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षकों को विभिन्न रोल प्ले और केस स्टडीज़ के माध्यम से सिखाया कि कक्षा-कक्ष में मूल्यों को व्यवहारिक रूप से कैसे शामिल किया जा सकता है।
दूसरे सत्र में पंखुरी वालिया ने मूल्य शिक्षा को विभिन्न विषयों के साथ जोड़ने की रणनीतियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि गणित पढ़ाते समय ईमानदारी और तार्किकता जैसे मूल्य बच्चों में विकसित किए जा सकते हैं, विज्ञान में पर्यावरण संरक्षण और सत्य की खोज को महत्व दिया जा सकता है, भाषा व साहित्य के माध्यम से करुणा और सहयोग की भावना विद्यार्थियों तक पहुंचाई जा सकती है और सामाजिक विज्ञान में लोकतंत्र, समानता तथा मानवाधिकार जैसे आदर्श विद्यार्थियों में जागरूकता लाते हैं।
उन्होंने स्टोरीटेलिंग, प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग और माइंडफुलनेस जैसी अभिनव शिक्षण पद्धतियों के उदाहरण भी साझा किए। प्रशिक्षण में शिक्षकों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय भागीदारी की। इनमें रोल प्ले, केस स्टडी डिस्कशन, माइंड मैपिंग, पोस्टर मेकिंग और ग्रुप प्रेजेंटेशन जैसी गतिविधियाँ शामिल रहीं। इनसे यह स्पष्ट हुआ कि किस प्रकार प्रत्येक शिक्षक अपने विषय में मूल्य शिक्षा का सहज समावेश कर सकता है।
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कैथल। एमडीएन ग्लोबल स्कूल में सीबीएसई प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत शनिवार को एक दिवसीय कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का विषय वैल्यू एजुकेशन रहा। इसके तहत शिक्षकों ने कक्षा-कक्ष में मूल्य शिक्षा का व्यावहारिक समावेश आदि की जानकारियां सीखीं।
कार्यक्रम का संचालन सीबीएसई पंचकूला से आई रिसोर्स पर्सन डॉ. शिवाली शर्मा एवं पंखुरी वालिया ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक डॉ. विनोद कुमार, चेयरपर्सन निधि कांसल, मैनेजर गौरव गर्ग और प्राचार्य डॉ. संत कौशिक ने दीप प्रज्वलन कर की।
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सत्र के दौरान रिसोर्स पर्सन ने बताया कि मूल्य शिक्षा केवल पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण की सबसे मजबूत नींव है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान या अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक, संवेदनशील इंसान और समाज के प्रति उत्तरदायी व्यक्तित्व बनाना है। मूल्य शिक्षा के माध्यम से बच्चों में ईमानदारी, सहानुभूति, सहयोग, अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण जैसी जीवनोपयोगी विशेषताएं
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विकसित होती हैं।
पहले सत्र में डॉ. शिवाली शर्मा ने विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों के विकास और अनुशासन की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने समझाया कि समय की पाबंदी, शिक्षक एवं अभिभावकों का सम्मान, स्वच्छता और टीमवर्क जैसे छोटे-छोटे व्यवहार विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने शिक्षकों को विभिन्न रोल प्ले और केस स्टडीज़ के माध्यम से सिखाया कि कक्षा-कक्ष में मूल्यों को व्यवहारिक रूप से कैसे शामिल किया जा सकता है।
दूसरे सत्र में पंखुरी वालिया ने मूल्य शिक्षा को विभिन्न विषयों के साथ जोड़ने की रणनीतियां प्रस्तुत कीं। उन्होंने बताया कि गणित पढ़ाते समय ईमानदारी और तार्किकता जैसे मूल्य बच्चों में विकसित किए जा सकते हैं, विज्ञान में पर्यावरण संरक्षण और सत्य की खोज को महत्व दिया जा सकता है, भाषा व साहित्य के माध्यम से करुणा और सहयोग की भावना विद्यार्थियों तक पहुंचाई जा सकती है और सामाजिक विज्ञान में लोकतंत्र, समानता तथा मानवाधिकार जैसे आदर्श विद्यार्थियों में जागरूकता लाते हैं।
उन्होंने स्टोरीटेलिंग, प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग और माइंडफुलनेस जैसी अभिनव शिक्षण पद्धतियों के उदाहरण भी साझा किए। प्रशिक्षण में शिक्षकों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय भागीदारी की। इनमें रोल प्ले, केस स्टडी डिस्कशन, माइंड मैपिंग, पोस्टर मेकिंग और ग्रुप प्रेजेंटेशन जैसी गतिविधियाँ शामिल रहीं। इनसे यह स्पष्ट हुआ कि किस प्रकार प्रत्येक शिक्षक अपने विषय में मूल्य शिक्षा का सहज समावेश कर सकता है।