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महिला खाप पंचायत में दिखा महिला शक्ति का दम
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 30 May 2016 12:10 AM IST
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खाप
- फोटो : ब्यूरो
कैथल। घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली नारी शक्ति को जब मौका मिला तो अपनी बात रखने में भी पीछे नहीं रही। मौका था गांव मानस में देश की महिला खाप पंचायत का। कई ऐसी समस्याएं भी उठीं, जिससे पुरुष बगलें झांकते नजर आए। गांव में नशे सहित विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए महिलाओं ने सरपंचों के साथ मिलकर संघर्ष का एलान कर दिया।
अखिल भारतीय महिला शक्ति मंच की अध्यक्षा डा. संतोष दहिया की अध्यक्षता में आयोजित हुई खाप पंचायत में अपनी बात रखने के लिए सबसे पहले गांव मानस पट्टी की सरपंच मुकेश देवी खड़ी हुईं। आस-पास खड़े गांव के युवक, पुरुषों सहित बुजुर्गों के सामने पहले घूंघट फिर बिना घूंघट के ही उन्होंने अपनी बात धड़ल्ले से रखी।
सरपंच बनीं मुकेश ने कहा कि वे महिलाओं के लिए कुछ करना चाहती हैं। इसके लिए पूरे गांव का सहयोग मिले तो पीछे नहीं रहेंगी। इसी प्रकार शुरू में कुछ सकुचाते हुए रूपेश ने भी अपनी बात दमखम के साथ रखी और कहा कि गांव वासी साथ रहें तो गांव की सभी समस्याओं का समाधान करेंगी।
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अपनी बात रखते हुए डॉ. संतोष दहिया ने कहा कि मैं बी गाम की माटी मैं ते लिकड़ी हूं...मन्नैं बी गाम में गोबर ढोया, घूंघट काड्या, पाणी भरया, खेत का नीरा काट्या, थारी तरैयां सारे काम करै...पर दुख होवै जिब सेना में बेटे ने भेजण आली मां दुखी ओ...। सारे टाबर ने पौ कै खुवाण आली की आंख में आंसू ओ..जिब मां दुखी ओ ना तो कोई सुखी नी रह सकदा..यह बात सुनकर कई महिलाओं की आंखों में आंसू बह निकले। डा. दहिया ने कहा कि इसी खात्तर इस महिला पंचायत का आयोजन हुआ है। इसके माध्यम से महिलाओं को उनका हक दिलवाएंगे।
शराब और स्मैक ने कर राक्ख्या सै नाश
इसी बीच गांव की महिला बाला देवी ने कहा कि या दारु छुड़वा दो..सारी समस्या मिट ज्यागी। दूसरी महिला सुखदेवी ने कहा कि शराब के ठेके बंद करवा दो। गांव में स्मैक बिस्कुट व टॉफी की तरह से बिकती है। इसे बंद करवा दो। किसे घर में मां रोवे, किसे में बेटी, किसे में बेटा रौवे...। ए याड़ै तो एकाधि लुगाई बी दारु बेचैं...। इसने बंद करवा दयो।
बुजुर्गों को नहीं मिल रही पेंशन
महिला राजो देवी, सनहरी, कृष्णा ने कहा कि गांव में महिलाओं को 60 साल की होने पर भी पेंशन नहीं मिल रही। गांव की अंगूरी ने कहा कि रे बेटी...मेरी उम्र 60 तै ज्यादा सै..। कागज्यां में मैं तो 30 साल की, और मेरा बेटा 50 साल का दिक्ख्या राक्ख्या सै...क्यूकर बंध ज्यागी पिलसण। इसी प्रकार से अन्य महिलाओं ने कहा कि 100 साल की महिलाओं की जन्मपत्री मांगी जा रही है।
स्कूल में नॉन मेडिकल और कॉमर्स की नहीं है सुविधा
गांव की बेटी ममता ने कहा कि स्कूल में ना तो नॉन मेडिकल है और ना ही कॉमर्स। केवल आर्ट्स के विषयों में पढ़ाई होती है। बेटियां जब बाहर पढ़ने जाती हैं तो ऑटो लगवाना पड़ता है। जबकि उनके माता-पिता के पास इतनी राशि खर्च करने को नहीं होती। तो बेटियां कैसे पढ़ेंगी। गांव के स्कूल में सभी तरह की पढ़ाई होनी चाहिए। बेटियों के लिए अलग से बस लगाई जाए। ताकि वे कॉलेज में जाकर पढ़ सकें।
खेल का मैदान नहीं है
गांव की खिलाड़ी पूनम व सुदेश ने कहा कि गांव में वे राष्ट्रीय स्तर पर फुटबाल खेल चुकी हैं, लेकिन यहां स्टेडियम नहीं है। लड़कियों के लिए खेलों की सुविधा होनी चाहिए।
मनरेगा में नहीं मिलता काम
गांव की महिला ने कहा कि यहां मनरेगा में काम नहीं मिलता। उनकी कॉपी तो बणवा दी..कार्ड भी बण गे..फेर भी मनरेगा में काम नी मिलदा...प्लाट म्हारे नी मिलदे..ना शौचालय बणदे...या सारी समस्याएं सैं. इन पै बी ध्यान दे दो...।
अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की होती है अनदेखी
गांव की आशा वर्कर आशा ने कहा कि यहां स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होती हैं। सबसे पहले तो एंबुलेंस ही नहीं मिलती। गर्भवती महिलाओं को लेकर जब जिला अस्पताल में जाते हैं तो वहां अनदेखी होती है। प्रसव पीड़ा में महिलाएं तड़पती हैं। उनकी देखभाल नहीं होती। एक अन्य महिला ने कहा कि पात्र लोगों को राशन नहीं मिलता। अपात्र लोग राशन ले रहे हैं। गरीब को कुछ नहीं मिल रहा।
नर्सरी का प्रमाण पत्र दिया जाए आंगनबाड़ी से
आंगनबाड़ी वर्कर मुनिया ने कहा कि बच्चे कम आते हैं। यदि आंगनबाड़ी से ही नर्सरी का प्रमाण पत्र दिया जाए तो आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे अपने आप आएंगे। अभिभावक छोटे बच्चों को ही स्कूल भेज देते हैं। यह बड़ी समस्या है।
गांव का सहयोग मिलेगा तो हम वो सारे काम करेंगे, जो गांव के लिए जरूरी होंगे। तीन माह के कार्यकाल में गांव में डस्टबिन रखवाए हैं। स्कूल की गली बनवाई है। काम और भी काफी करवाए जाएंगे। जो समस्याएं खाप पंचायत में सामने आई हैं, इनका हर संभव समाधान करवाया जाएगा। अभी तक गांव वासियों का कुछ सहयोग मिला है। कुछ लोग हैं, जो काम में बाधा डाल रहे हैं।
मुकेश देवी, सरपंच मानस पट्टी।
महिला खाप पंचायत में महिलाएं खुलकर बोलीं। कई बातें पता चलीं हैं। इनका समाधान करवाया जाएगा।
रुपेश देवी, सरपंच, ग्राम पंचायत मानस।
खाप पंचायत में महिलाओं की राजनीति में भागीदारी के एजेंडे के अलावा गांव में नशे की सबसे बड़ी समस्या सामने आई है। साथ ही स्मैक तक के बिकने का बात पता चली है। इसके अलावा बेटियों को कैथल तक आने-जाने में परेशानी, मनरेगा में काम न मिलने बारे, महिलाओं की पेंशन न बनने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। इनका भी समाधान करवाने का प्रयास किया जाएगा।
डा. संतोष दहिया।
रे भाईयो..या दारु कम कर दयो..
महिलाओं की मांग पर डा. संतोष दहिया ने पंचायत की कार्रवाई देखने पहुंचे पुरुषों की ओर संवाद करते हुए कहा कि रे भाईयो..या दारु कम कर दयो..एक तो पिस्सयां का नास..दूसरा पी कै टाबर ने पिट्टैं..घर में झगड़ा। किम्मे कोनी लिकड़दा इसमें..। डा. दहिया ने जब पुरुषों से हाथ उठाकर शराब कम करने और छोड़ने का आह्वान किया तो अधिकतर ने हाथ उठाकर इस बात को मानने की हामी भरी।
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अखिल भारतीय महिला शक्ति मंच की अध्यक्षा डा. संतोष दहिया की अध्यक्षता में आयोजित हुई खाप पंचायत में अपनी बात रखने के लिए सबसे पहले गांव मानस पट्टी की सरपंच मुकेश देवी खड़ी हुईं। आस-पास खड़े गांव के युवक, पुरुषों सहित बुजुर्गों के सामने पहले घूंघट फिर बिना घूंघट के ही उन्होंने अपनी बात धड़ल्ले से रखी।
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सरपंच बनीं मुकेश ने कहा कि वे महिलाओं के लिए कुछ करना चाहती हैं। इसके लिए पूरे गांव का सहयोग मिले तो पीछे नहीं रहेंगी। इसी प्रकार शुरू में कुछ सकुचाते हुए रूपेश ने भी अपनी बात दमखम के साथ रखी और कहा कि गांव वासी साथ रहें तो गांव की सभी समस्याओं का समाधान करेंगी।
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अपनी बात रखते हुए डॉ. संतोष दहिया ने कहा कि मैं बी गाम की माटी मैं ते लिकड़ी हूं...मन्नैं बी गाम में गोबर ढोया, घूंघट काड्या, पाणी भरया, खेत का नीरा काट्या, थारी तरैयां सारे काम करै...पर दुख होवै जिब सेना में बेटे ने भेजण आली मां दुखी ओ...। सारे टाबर ने पौ कै खुवाण आली की आंख में आंसू ओ..जिब मां दुखी ओ ना तो कोई सुखी नी रह सकदा..यह बात सुनकर कई महिलाओं की आंखों में आंसू बह निकले। डा. दहिया ने कहा कि इसी खात्तर इस महिला पंचायत का आयोजन हुआ है। इसके माध्यम से महिलाओं को उनका हक दिलवाएंगे।
शराब और स्मैक ने कर राक्ख्या सै नाश
इसी बीच गांव की महिला बाला देवी ने कहा कि या दारु छुड़वा दो..सारी समस्या मिट ज्यागी। दूसरी महिला सुखदेवी ने कहा कि शराब के ठेके बंद करवा दो। गांव में स्मैक बिस्कुट व टॉफी की तरह से बिकती है। इसे बंद करवा दो। किसे घर में मां रोवे, किसे में बेटी, किसे में बेटा रौवे...। ए याड़ै तो एकाधि लुगाई बी दारु बेचैं...। इसने बंद करवा दयो।
बुजुर्गों को नहीं मिल रही पेंशन
महिला राजो देवी, सनहरी, कृष्णा ने कहा कि गांव में महिलाओं को 60 साल की होने पर भी पेंशन नहीं मिल रही। गांव की अंगूरी ने कहा कि रे बेटी...मेरी उम्र 60 तै ज्यादा सै..। कागज्यां में मैं तो 30 साल की, और मेरा बेटा 50 साल का दिक्ख्या राक्ख्या सै...क्यूकर बंध ज्यागी पिलसण। इसी प्रकार से अन्य महिलाओं ने कहा कि 100 साल की महिलाओं की जन्मपत्री मांगी जा रही है।
स्कूल में नॉन मेडिकल और कॉमर्स की नहीं है सुविधा
गांव की बेटी ममता ने कहा कि स्कूल में ना तो नॉन मेडिकल है और ना ही कॉमर्स। केवल आर्ट्स के विषयों में पढ़ाई होती है। बेटियां जब बाहर पढ़ने जाती हैं तो ऑटो लगवाना पड़ता है। जबकि उनके माता-पिता के पास इतनी राशि खर्च करने को नहीं होती। तो बेटियां कैसे पढ़ेंगी। गांव के स्कूल में सभी तरह की पढ़ाई होनी चाहिए। बेटियों के लिए अलग से बस लगाई जाए। ताकि वे कॉलेज में जाकर पढ़ सकें।
खेल का मैदान नहीं है
गांव की खिलाड़ी पूनम व सुदेश ने कहा कि गांव में वे राष्ट्रीय स्तर पर फुटबाल खेल चुकी हैं, लेकिन यहां स्टेडियम नहीं है। लड़कियों के लिए खेलों की सुविधा होनी चाहिए।
मनरेगा में नहीं मिलता काम
गांव की महिला ने कहा कि यहां मनरेगा में काम नहीं मिलता। उनकी कॉपी तो बणवा दी..कार्ड भी बण गे..फेर भी मनरेगा में काम नी मिलदा...प्लाट म्हारे नी मिलदे..ना शौचालय बणदे...या सारी समस्याएं सैं. इन पै बी ध्यान दे दो...।
अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की होती है अनदेखी
गांव की आशा वर्कर आशा ने कहा कि यहां स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होती हैं। सबसे पहले तो एंबुलेंस ही नहीं मिलती। गर्भवती महिलाओं को लेकर जब जिला अस्पताल में जाते हैं तो वहां अनदेखी होती है। प्रसव पीड़ा में महिलाएं तड़पती हैं। उनकी देखभाल नहीं होती। एक अन्य महिला ने कहा कि पात्र लोगों को राशन नहीं मिलता। अपात्र लोग राशन ले रहे हैं। गरीब को कुछ नहीं मिल रहा।
नर्सरी का प्रमाण पत्र दिया जाए आंगनबाड़ी से
आंगनबाड़ी वर्कर मुनिया ने कहा कि बच्चे कम आते हैं। यदि आंगनबाड़ी से ही नर्सरी का प्रमाण पत्र दिया जाए तो आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चे अपने आप आएंगे। अभिभावक छोटे बच्चों को ही स्कूल भेज देते हैं। यह बड़ी समस्या है।
गांव का सहयोग मिलेगा तो हम वो सारे काम करेंगे, जो गांव के लिए जरूरी होंगे। तीन माह के कार्यकाल में गांव में डस्टबिन रखवाए हैं। स्कूल की गली बनवाई है। काम और भी काफी करवाए जाएंगे। जो समस्याएं खाप पंचायत में सामने आई हैं, इनका हर संभव समाधान करवाया जाएगा। अभी तक गांव वासियों का कुछ सहयोग मिला है। कुछ लोग हैं, जो काम में बाधा डाल रहे हैं।
मुकेश देवी, सरपंच मानस पट्टी।
महिला खाप पंचायत में महिलाएं खुलकर बोलीं। कई बातें पता चलीं हैं। इनका समाधान करवाया जाएगा।
रुपेश देवी, सरपंच, ग्राम पंचायत मानस।
खाप पंचायत में महिलाओं की राजनीति में भागीदारी के एजेंडे के अलावा गांव में नशे की सबसे बड़ी समस्या सामने आई है। साथ ही स्मैक तक के बिकने का बात पता चली है। इसके अलावा बेटियों को कैथल तक आने-जाने में परेशानी, मनरेगा में काम न मिलने बारे, महिलाओं की पेंशन न बनने जैसी समस्याएं सामने आई हैं। इनका भी समाधान करवाने का प्रयास किया जाएगा।
डा. संतोष दहिया।
रे भाईयो..या दारु कम कर दयो..
महिलाओं की मांग पर डा. संतोष दहिया ने पंचायत की कार्रवाई देखने पहुंचे पुरुषों की ओर संवाद करते हुए कहा कि रे भाईयो..या दारु कम कर दयो..एक तो पिस्सयां का नास..दूसरा पी कै टाबर ने पिट्टैं..घर में झगड़ा। किम्मे कोनी लिकड़दा इसमें..। डा. दहिया ने जब पुरुषों से हाथ उठाकर शराब कम करने और छोड़ने का आह्वान किया तो अधिकतर ने हाथ उठाकर इस बात को मानने की हामी भरी।