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Kaithal News: पांच साल की लड़ाई के बाद कैथल को मिलेगी नई लिथोट्रिप्सी मशीन
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अस्पताल में रखी पुरानी लिथोट्रिप्सी मशीन की तस्वीर।
कैथल। जिला नागरिक अस्पताल में पांच साल से खराब पड़ी 3.50 करोड़ रुपये कीमत की लिथोट्रिप्सी मशीन की मरम्मत नहीं हो पाने के बाद अब उसकी जगह नई मशीन दी जा रही है। मशीन फ्रांस से दिल्ली पहुंच चुकी है और अगले 10 दिनों में कैथल पहुंचने की उम्मीद है। नई मशीन आने से पथरी के मरीजों को अस्पताल में ही उपचार की सुविधा मिलेगी। मशीन के लिए स्वास्थ्य विभाग को संबंधित कंपनी के साथ लंबी खींचतान करनी पड़ी और मामला अदालत तक पहुंचा।
स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय पंचकूला ने दिसंबर 2019 में मेडियोन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड से खरीदी गई मशीन कैथल के नागरिक अस्पताल को भेजी थी। विभाग ने ऐसी चार मशीनें खरीदी थीं, जिन्हें चार जिलों में लगाया गया था। शुरुआत में कैथल में इस मशीन से करीब 120 सफल ऑपरेशन भी किए गए लेकिन कोरोना काल में ऑपरेशन बंद हो गए। इसके बाद मशीन की नियमित जांच और रखरखाव के लिए कंपनी की ओर से विभाग को सहयोग नहीं मिलने की बात सामने आई।
वर्ष 2021 में जांच के दौरान मशीन खराब मिली। विभाग से पत्राचार के बाद पहुंचे इंजीनियर ने मरम्मत पर करीब 10 लाख रुपये खर्च आने की बात कही। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए तैयार हो गया लेकिन बाद में मरम्मत का खर्च बढ़ा दिया गया। करीब दो साल पहले फ्रांस से आए इंजीनियर ने मशीन की मरम्मत संभव नहीं होने की बात कही। इसके बाद मशीन के लिए विभाग और कंपनी के बीच विवाद बढ़ता गया और मामला अदालत तक पहुंच गया। आखिरकार विभाग को नई मशीन देने का निर्णय हुआ।
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चारों जिलों की मशीनों में आई थी खराबी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से खरीदी गई चारों मशीनों में खराबी सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया था। कैथल में मशीन के पार्ट चूहों की ओर से खराब किए जाने की बात भी सामने आई थी लेकिन अन्य तीन जिलों में भी मशीनों में दिक्कत मिलने के बाद विभाग ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस मामले में कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की कार्रवाई भी की गई थी। अब नई मशीन मिलने से अस्पताल में पथरी के उपचार की सुविधा दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।
अलग कक्ष में स्थापित होगी मशीन, डॉक्टरों को मिलेगा प्रशिक्षण
अस्पताल में लिथोट्रिप्सी मशीन के लिए पहले से ही ऑपरेशन थिएटर से अलग कक्ष तैयार किया गया था। नई मशीन को इसी कक्ष में स्थापित किया जाएगा। मशीन के संचालन और रखरखाव के लिए संबंधित डॉक्टरों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा, ताकि मशीन का सही तरीके से इस्तेमाल हो और भविष्य में खराबी की आशंका कम रहे। स्वास्थ्य विभाग इस बार मशीन के रखरखाव के लिए भी सतर्क है।
मरीजों को मिलेंगे ये फायदे
- बिना चीरे पथरी का उपचार : उपयुक्त मरीजों की पथरी को शॉक वेव के जरिये छोटे टुकड़ों में तोड़ा जा सकेगा।
- दूसरे शहरों के चक्कर कम होंगे : मरीजों को पथरी के उपचार के लिए दूसरे शहरों के अस्पतालों में जाने की जरूरत कम पड़ सकती है।
- समय और खर्च की बचत : स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने से आने-जाने का खर्च और समय बचेगा।
- जल्दी छुट्टी मिलने की संभावना : कई मरीज प्रक्रिया के बाद उसी दिन घर लौट सकते हैं। यह मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करेगा।
- उपचार का अतिरिक्त विकल्प : पथरी के आकार, स्थान और स्थिति के अनुसार डॉक्टर तय करेंगे कि लिथोट्रिप्सी उपयुक्त है या किसी अन्य प्रक्रिया की जरूरत है।
कंपनी की ओर से नियमानुसार विजिट नहीं की गई और उसकी कार्यप्रणाली में खामियां सामने आई थीं। अन्य तीन जिलों में भेजी गई मशीनों में भी खराबी मिली थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने कंपनी से बातचीत की और मामला अदालत तक पहुंचा। अब नई मशीन जल्द कैथल पहुंचने की उम्मीद है। इससे जिले के मरीजों को लाभ मिलेगा।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।
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स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय पंचकूला ने दिसंबर 2019 में मेडियोन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड से खरीदी गई मशीन कैथल के नागरिक अस्पताल को भेजी थी। विभाग ने ऐसी चार मशीनें खरीदी थीं, जिन्हें चार जिलों में लगाया गया था। शुरुआत में कैथल में इस मशीन से करीब 120 सफल ऑपरेशन भी किए गए लेकिन कोरोना काल में ऑपरेशन बंद हो गए। इसके बाद मशीन की नियमित जांच और रखरखाव के लिए कंपनी की ओर से विभाग को सहयोग नहीं मिलने की बात सामने आई।
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वर्ष 2021 में जांच के दौरान मशीन खराब मिली। विभाग से पत्राचार के बाद पहुंचे इंजीनियर ने मरम्मत पर करीब 10 लाख रुपये खर्च आने की बात कही। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए तैयार हो गया लेकिन बाद में मरम्मत का खर्च बढ़ा दिया गया। करीब दो साल पहले फ्रांस से आए इंजीनियर ने मशीन की मरम्मत संभव नहीं होने की बात कही। इसके बाद मशीन के लिए विभाग और कंपनी के बीच विवाद बढ़ता गया और मामला अदालत तक पहुंच गया। आखिरकार विभाग को नई मशीन देने का निर्णय हुआ।
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चारों जिलों की मशीनों में आई थी खराबी
स्वास्थ्य विभाग की ओर से खरीदी गई चारों मशीनों में खराबी सामने आने के बाद मामला गंभीर हो गया था। कैथल में मशीन के पार्ट चूहों की ओर से खराब किए जाने की बात भी सामने आई थी लेकिन अन्य तीन जिलों में भी मशीनों में दिक्कत मिलने के बाद विभाग ने कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस मामले में कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की कार्रवाई भी की गई थी। अब नई मशीन मिलने से अस्पताल में पथरी के उपचार की सुविधा दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।
अलग कक्ष में स्थापित होगी मशीन, डॉक्टरों को मिलेगा प्रशिक्षण
अस्पताल में लिथोट्रिप्सी मशीन के लिए पहले से ही ऑपरेशन थिएटर से अलग कक्ष तैयार किया गया था। नई मशीन को इसी कक्ष में स्थापित किया जाएगा। मशीन के संचालन और रखरखाव के लिए संबंधित डॉक्टरों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा, ताकि मशीन का सही तरीके से इस्तेमाल हो और भविष्य में खराबी की आशंका कम रहे। स्वास्थ्य विभाग इस बार मशीन के रखरखाव के लिए भी सतर्क है।
मरीजों को मिलेंगे ये फायदे
- बिना चीरे पथरी का उपचार : उपयुक्त मरीजों की पथरी को शॉक वेव के जरिये छोटे टुकड़ों में तोड़ा जा सकेगा।
- दूसरे शहरों के चक्कर कम होंगे : मरीजों को पथरी के उपचार के लिए दूसरे शहरों के अस्पतालों में जाने की जरूरत कम पड़ सकती है।
- समय और खर्च की बचत : स्थानीय स्तर पर उपचार मिलने से आने-जाने का खर्च और समय बचेगा।
- जल्दी छुट्टी मिलने की संभावना : कई मरीज प्रक्रिया के बाद उसी दिन घर लौट सकते हैं। यह मरीज की स्थिति और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करेगा।
- उपचार का अतिरिक्त विकल्प : पथरी के आकार, स्थान और स्थिति के अनुसार डॉक्टर तय करेंगे कि लिथोट्रिप्सी उपयुक्त है या किसी अन्य प्रक्रिया की जरूरत है।
कंपनी की ओर से नियमानुसार विजिट नहीं की गई और उसकी कार्यप्रणाली में खामियां सामने आई थीं। अन्य तीन जिलों में भेजी गई मशीनों में भी खराबी मिली थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय ने कंपनी से बातचीत की और मामला अदालत तक पहुंचा। अब नई मशीन जल्द कैथल पहुंचने की उम्मीद है। इससे जिले के मरीजों को लाभ मिलेगा।
- डॉ. रेणु चावला, सिविल सर्जन, स्वास्थ्य विभाग, कैथल।

अस्पताल में रखी पुरानी लिथोट्रिप्सी मशीन की तस्वीर।