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Kaithal News: सस्ते में धान खरीदने पर निरीक्षक को नोटिस, हैफेड भी जांच के घेरे में
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कैथल की नई मंडी में धान की सफाई करते श्रमिक। संवाद
कैथल। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक को एमएसपी से कम दाम में सस्ते में धान खरीदना महंगा पड़ गया। डीसी ने डीएफएससी को निर्देश दिए कि निरीक्षक से नोटिस कर जवाब लें और कार्रवाई सुनिश्चित करें। दूसरी ओर, फसल बेच चुके किसानों ने कैथल मंडी में तैनात हैफेड के मैनेजर पर सस्ता धान खरीदने के आरोप लगाए हैं। पीआर का हाइब्रिड 2200 और ग्रेड ए का धान 2170 रुपये प्रति क्विंटल खरीद कर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया है।
यह मामला भी डीसी के संज्ञान में आ चुका है। जिले की पाई मंडी में तैनात खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक ने एमएसपी से कम दाम में किसान का धान खरीदा। मामला डीसी के संज्ञान में आते ही उन्होंने निरीक्षक को नोटिस देकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। डीएफएससी वरिंद्र कुमार ने बताया कि संबंधित निरीक्षक से जवाब मांगा गया है।
हैफेड भी सस्ता धान खरीदने में पीछे नहीं
पाई मंडी के साथ-साथ अतिरिक्त व नई मंडी कैथल में तैनात हैफेड के मैनेजर-निरीक्षक पर भी किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। गांव डूल्याणी के रवि ने बताया कि गत शुक्रवार को दो दिन इंतजार करने के बाद उसकी पीआर धान अतिरिक्त मंडी कैथल में 2170 रुपये प्रति क्विंटल हैफेड के माध्यम से खरीदी गई। क्योड़क के किसान जयभगवान ने बताया कि वह दो दिन तक मंडी में इंतजार करता रहा लेकिन उसकी हाइब्रिड धान नहीं खरीदा गया। इंतजार करने के बाद हैफेड के माध्यम से 2200 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा गया जबकि एमएसपी 2441 रुपये है। इस संबंध में अब साक्ष्यों के साथ डीसी से लिखित शिकायत की जाएगी। इस बारे में हैफेड मैनेजर रवि अटवाल ने कहा कि सस्ता धान खरीदने के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता।
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खरीद के मुकाबले उठान सुस्त
जिले की मंडियों में बुधवार शाम तीन बजे तक कुल 4.05 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान की आवक हो चुकी है। इसमें से खरीद एजेंसियों की ओर से 2.82 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। हालांकि सबसे बड़ी समस्या धान के उठान की बनी हुई है। मंडियों से अब तक केवल 1.57 लाख मीट्रिक टन धान का ही उठान हो पाया है जिसके कारण मंडियों में बोरियों के अंबार लग गए हैं और किसानों को अपनी फसल रखने में परेशानी आ रही है। राहत की बात यह है कि अब तक कुल 12,494 किसानों को उनके बैंक खातों में सीधे 276.82 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
एमएसपी से कम खरीद पर कार्रवाई तय : डीसी
डीसी अपराजिता ने कहा कि सरकार की ओर से निर्धारित एमएसपी से एक रुपये भी कम पर किसानों की फसल खरीदने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों की मेहनत की लूट बर्दाश्त नहीं होगी। एमएसपी से कम पर खरीद करने वाले अधिकारियों और आढ़तियों पर कार्रवाई तय है। जो आरोप लगे हैं, उनकी भी जांच के बाद कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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यह मामला भी डीसी के संज्ञान में आ चुका है। जिले की पाई मंडी में तैनात खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक ने एमएसपी से कम दाम में किसान का धान खरीदा। मामला डीसी के संज्ञान में आते ही उन्होंने निरीक्षक को नोटिस देकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। डीएफएससी वरिंद्र कुमार ने बताया कि संबंधित निरीक्षक से जवाब मांगा गया है।
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हैफेड भी सस्ता धान खरीदने में पीछे नहीं
पाई मंडी के साथ-साथ अतिरिक्त व नई मंडी कैथल में तैनात हैफेड के मैनेजर-निरीक्षक पर भी किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। गांव डूल्याणी के रवि ने बताया कि गत शुक्रवार को दो दिन इंतजार करने के बाद उसकी पीआर धान अतिरिक्त मंडी कैथल में 2170 रुपये प्रति क्विंटल हैफेड के माध्यम से खरीदी गई। क्योड़क के किसान जयभगवान ने बताया कि वह दो दिन तक मंडी में इंतजार करता रहा लेकिन उसकी हाइब्रिड धान नहीं खरीदा गया। इंतजार करने के बाद हैफेड के माध्यम से 2200 रुपये प्रति क्विंटल खरीदा गया जबकि एमएसपी 2441 रुपये है। इस संबंध में अब साक्ष्यों के साथ डीसी से लिखित शिकायत की जाएगी। इस बारे में हैफेड मैनेजर रवि अटवाल ने कहा कि सस्ता धान खरीदने के बारे में उन्हें कुछ नहीं पता।
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खरीद के मुकाबले उठान सुस्त
जिले की मंडियों में बुधवार शाम तीन बजे तक कुल 4.05 लाख मीट्रिक टन (एमटी) धान की आवक हो चुकी है। इसमें से खरीद एजेंसियों की ओर से 2.82 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। हालांकि सबसे बड़ी समस्या धान के उठान की बनी हुई है। मंडियों से अब तक केवल 1.57 लाख मीट्रिक टन धान का ही उठान हो पाया है जिसके कारण मंडियों में बोरियों के अंबार लग गए हैं और किसानों को अपनी फसल रखने में परेशानी आ रही है। राहत की बात यह है कि अब तक कुल 12,494 किसानों को उनके बैंक खातों में सीधे 276.82 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
एमएसपी से कम खरीद पर कार्रवाई तय : डीसी
डीसी अपराजिता ने कहा कि सरकार की ओर से निर्धारित एमएसपी से एक रुपये भी कम पर किसानों की फसल खरीदने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों की मेहनत की लूट बर्दाश्त नहीं होगी। एमएसपी से कम पर खरीद करने वाले अधिकारियों और आढ़तियों पर कार्रवाई तय है। जो आरोप लगे हैं, उनकी भी जांच के बाद कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

कैथल की नई मंडी में धान की सफाई करते श्रमिक। संवाद