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Kaithal News: दुकानों पर पूजन सामग्री की बढ़ी मांग

Thu, 03 Oct 2024 05:35 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Thu, 03 Oct 2024 05:35 AM IST
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Increased demand for puja material at shops
सीवन। शारदीय नवरात्र के लिए बाजार सज गए हैं। मंदिरों की साफ सफाई देर शाम तक की जाती रही। दुकानों पर पूजा की सामग्री जैसे नारियल, रोली, चुनरी, बिंदी, चूड़ियां व अन्य सामग्री सजी हुई है।
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सबसे ज्यादा तैयारी अष्टमी के लिए की जा रही है। दुकानदारों ने कंजक पूजन के बाद दिए जाने वाली भेंट के लिए बर्तन, टिफिन, थाली व अन्य सामान भी बाजार में आ चुका है।
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दुकानदारों को आस है कि इस बार भी पर्व का जो सीजन आरंभ हो रहा है वह अच्छा जाएगा और कारोबार फलेगा।

शारदीय नवरात्र का महत्व : संत छवि राम दास ने सीवन में शारदीय नवरात्र का महत्व बताते हुए कहा कि वैसे तो वर्ष में चार बार नवरात्र आती हैं परंतु शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है। नवरात्र का अर्थ होता है नौ रातें, जिसमें श्रद्धालु मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं और अपने जीवन में शांति, समृद्धि और सुख-शांति की कामना करते हैं।
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इस दौरान उपवास, पूजा-पाठ, और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि नवरात्र के समय घरों और मंदिरों में अखंड ज्योत जलाने की परंपरा है। इसका धार्मिक महत्व यह है कि अखंड ज्योत जलाकर मां भगवती से उनके आशीर्वाद की कामना की जाती है और यह माना जाता है कि यह दीपक लगातार जलता रहे तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

अखंड ज्योत को जलाने का अर्थ होता है कि भक्त की आस्था अखंड और स्थिर रहे, और उसकी पूजा में कोई व्यवधान न आए। इस ज्योत का निरंतर जलना मां दुर्गा के प्रति भक्त की अडिग भक्ति का प्रतीक माना जाता है। संवाद



कहा कि शारदीय नवरात्र से लेकर दशहरा तक का यह समय उत्सव, भक्ति, और आत्मशुद्धि का होता है, जिसमें श्रद्धालु मां भगवती की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष अनुष्ठान करते हैं। उन्होंने बताया कि अष्टमी और नवमी नवरात्रि के सबसे महत्वपूर्ण दिन माने जाते हैं, जिनमें विशेष पूजा और व्रत होते हैं। इस दौरान कन्या पूजन की परंपरा है, जिसमें छोटी कन्याओं को देवी के स्वरूप में पूजा जाता है और उन्हें भोजन कराकर उपहार दिए जाते हैं।

व्रत कैसे करें-

शारदीय नवरात्र के दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं, जो मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। व्रत रखने का मुख्य उद्देश्य आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति करना होता है। नवरात्र के नौ दिनों में भक्त उपवास करते हैं, कुछ लोग पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं, जबकि कुछ केवल पहले और आखिरी दिन व्रत रखते हैं। इस दौरान भक्त विशेष रूप से सात्विक भोजन का सेवन करते हैं, जैसे फल, कुट्टू का आटा, साबूदाना, और सेंधा नमक।






व्रत रखने वाले श्रद्धालु प्याज, लहसुन, और अनाज का सेवन नहीं करते। सात्विक भोजन, जैसे फल, दूध, और बिना अनाज वाले व्यंजन बनाए जाते हैं। कुछ लोग केवल जल का सेवन करते हैं या दिन में एक बार भोजन करते हैं। व्रत के दौरान शराब, धूम्रपान और अन्य असात्विक चीजों से बचना आवश्यक माना जाता है।
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