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Kaithal News: संघर्ष के मैदान से फुटबॉल के मैदान तक, परिवार का सहारा बनीं कविता
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फुटबॉल खिलाड़ी कविता
कसान। आर्थिक तंगी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद अगर हौसले बुलंद हों तो सफलता की राह खुद बन जाती है। गांव कैलरम की 18 वर्षीय फुटबॉल खिलाड़ी कविता इसका उदाहरण हैं। पिछले तीन वर्षों से फुटबॉल खेल रही कविता ने कठिन परिस्थितियों के बीच भी अपने सपनों का साथ नहीं छोड़ा और आज राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना चुकी हैं।
कविता गांव के सरकारी स्कूल में संचालित फुटबॉल खेल नर्सरी में प्रतिदिन करीब पांच घंटे अभ्यास करती हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद उनके पिता सुरेंद्र, जो पेशे से चालक हैं, गंभीर रूप से बीमार हो गए। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई और घर की जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा कविता के कंधों पर आ गया।
परिवार का सहारा बनने के लिए कविता सुबह दो घंटे फुटबॉल का अभ्यास करती हैं। इसके बाद वह गांव के एक निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हैं। घर लौटकर घरेलू कामकाज संभालने के बाद शाम को फिर तीन घंटे मैदान में अभ्यास करती हैं। इस तरह वह खेल और परिवार, दोनों जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभा रही हैं।
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कविता राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। हाल ही में गोवा में आयोजित राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में उन्होंने हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जो उनके खेल जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
चार भाई-बहनों वाले परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है लेकिन परिवार ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया है। कविता का सपना फुटबॉल में कॅरिअर बनाकर देश का नाम रोशन करना है। इसके लिए उन्हें आर्थिक सहयोग और एक प्रायोजक की जरूरत है, ताकि वह बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपने लक्ष्य को हासिल कर सकें।
संघर्षों के बीच भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ रही कविता आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखते हैं।
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कविता गांव के सरकारी स्कूल में संचालित फुटबॉल खेल नर्सरी में प्रतिदिन करीब पांच घंटे अभ्यास करती हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद उनके पिता सुरेंद्र, जो पेशे से चालक हैं, गंभीर रूप से बीमार हो गए। इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई और घर की जिम्मेदारियों का बड़ा हिस्सा कविता के कंधों पर आ गया।
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परिवार का सहारा बनने के लिए कविता सुबह दो घंटे फुटबॉल का अभ्यास करती हैं। इसके बाद वह गांव के एक निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हैं। घर लौटकर घरेलू कामकाज संभालने के बाद शाम को फिर तीन घंटे मैदान में अभ्यास करती हैं। इस तरह वह खेल और परिवार, दोनों जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभा रही हैं।
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कविता राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। हाल ही में गोवा में आयोजित राष्ट्रीय फुटबॉल प्रतियोगिता में उन्होंने हरियाणा का प्रतिनिधित्व कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जो उनके खेल जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
चार भाई-बहनों वाले परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं है लेकिन परिवार ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया है। कविता का सपना फुटबॉल में कॅरिअर बनाकर देश का नाम रोशन करना है। इसके लिए उन्हें आर्थिक सहयोग और एक प्रायोजक की जरूरत है, ताकि वह बेहतर प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपने लक्ष्य को हासिल कर सकें।
संघर्षों के बीच भी मुस्कुराते हुए आगे बढ़ रही कविता आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखते हैं।

फुटबॉल खिलाड़ी कविता