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Kaithal News: हाईवे पर धुंधली पड़ गई सफेद पट्टी
Tue, 02 Dec 2025 01:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 02 Dec 2025 01:06 AM IST
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एनएच-65 पर खड़े पोल से गायब संकेतक बोर्ड। संवाद
- फोटो : बाबा जनवारीनाथ धाम में मंगल आरती करते श्रद्धालु।
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। कैथल से गुजरने वाला एनएच-65 (हिसार-चंडीगढ़) हाईवे इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। हाईवे पर एज लाइन (लंबी सफेद पट्टी) और सेंटर लाइन (बीच-बीच में बनी पट्टियां) लगभग धुंधली पड़ चुकी हैं। जहां संकेतक बोर्ड होने चाहिए, वहां केवल खाली पोल खड़े हैं। कई बोर्ड टूटकर गिर चुके हैं और सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन चुके हैं।
धुंध और रात में ड्राइविंग को सुरक्षित बनाने वाली सफेद पट्टियां भी गायब हैं, जिससे वाहन चालकों का सफर खतरे से भरा हो गया है। सर्दी और धुंध का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन एनएच और प्रशासनिक अधिकारी अभी भी सक्रिय नहीं दिख रहे।
ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा हो, तभी जाकर हाईवे की सुध ली जाएगी। कैथल जिले में यह हाईवे लगभग 45 किलोमीटर लंबा है, जो कलायत से शुरू होकर अंबाला सीमा तक जाता है और हिसार के बाद राजस्थान को जोड़ता है। अनुमानित तौर पर रोजाना 50-60 हजार छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं।
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पड़ताल में उजागर खामियां : संवाद टीम ने हाईवे पर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। जिला रोड सेफ्टी बैठकों में किए जा रहे दावे हकीकत से कोसों दूर मिले। सड़क सुरक्षा के लिए अनिवार्य तीनों प्रकार के बोर्ड- आदेशात्मक, संकेतात्मक और सूचनात्मक, हाईवे पर या तो टूटे पड़े मिले या पूरी तरह गायब थे। कई स्थानों पर सिर्फ पोल खड़े थे, जबकि यह भी पता लगाना मुश्किल था कि कहां तीव्र मोड़ है, कहां संकरे पुल हैं और कहां डेंजर प्वाइंट।
यही नहीं, सड़क की एज लाइन (लंबी सफेद पट्टी) और सेंटर लाइन (बीच-बीच में बनी पट्टियां) भी लगभग मिट चुकी हैं। धुंध के मौसम में ये पट्टियां वाहन चालकों को दिशा और सड़क की सीमाओं का संकेत देती हैं। इनके अभाव में दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
डीसी प्रीति ने संबंधित विभागों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सभी सड़कों पर साइन बोर्ड, सफेद पट्टी, रिफ्लेक्टर आदि तुरंत लगाए जाएं, ताकि धुंध के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क सुरक्षा मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्यों जरूरी हैं एज लाइन और सेंटर लाइन
n एज लाइन (लंबी सफेद पट्टी) रात और धुंध में सड़क का किनारा साफ दिखाती है, जिससे वाहन नीचे उतरने से बचते हैं।
n सेंटर लाइन (बीच-बीच में बनी पट्टियां) भारी और हल्के वाहनों की सही लेन तय करती है, जिससे आमने-सामने की टक्करों का खतरा कम होता है।
n पट्टियों और रिफ्लेक्टिव साइन की अनुपस्थिति में चालक भ्रमित हो जाते हैं, खासकर कम दृश्यता में।
n सड़क सुरक्षा नियमों के अनुसार हाईवे पर इनका साफ और रिफ्लेक्टिव होना अनिवार्य है, लेकिन एनएच-65 पर इनका कहीं अता-पता नहीं।
सफेद पट्टी और संकेतक बोर्ड की अनुपस्थिति के कारण
n प्रशासन और संबंधित विभाग सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक मानकों को लागू करने में विफल हो रहे हैं।
n सफेद पट्टियां और संकेतक बोर्ड रात और खराब मौसम में ड्राइवरों को सही दिशा में रहने में मदद करते हैं। इनके न होने से दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
n सड़क निर्माण और रखरखाव में लापरवाही के कारण पट्टियां और बोर्ड गायब हो गए हैं।
n खराब रखरखाव के कारण ये पट्टियां और बोर्ड धुंधले हो जाते हैं या पूरी तरह से गायब हो जाते हैं, जिससे ड्राइवरों को भ्रम होता है।
n कोहरे जैसी स्थिति में भी प्रशासन इन समस्याओं से निपटने के लिए तैयार नहीं है।
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कैथल। कैथल से गुजरने वाला एनएच-65 (हिसार-चंडीगढ़) हाईवे इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। हाईवे पर एज लाइन (लंबी सफेद पट्टी) और सेंटर लाइन (बीच-बीच में बनी पट्टियां) लगभग धुंधली पड़ चुकी हैं। जहां संकेतक बोर्ड होने चाहिए, वहां केवल खाली पोल खड़े हैं। कई बोर्ड टूटकर गिर चुके हैं और सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन चुके हैं।
धुंध और रात में ड्राइविंग को सुरक्षित बनाने वाली सफेद पट्टियां भी गायब हैं, जिससे वाहन चालकों का सफर खतरे से भरा हो गया है। सर्दी और धुंध का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन एनएच और प्रशासनिक अधिकारी अभी भी सक्रिय नहीं दिख रहे।
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ऐसा प्रतीत होता है मानो किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा हो, तभी जाकर हाईवे की सुध ली जाएगी। कैथल जिले में यह हाईवे लगभग 45 किलोमीटर लंबा है, जो कलायत से शुरू होकर अंबाला सीमा तक जाता है और हिसार के बाद राजस्थान को जोड़ता है। अनुमानित तौर पर रोजाना 50-60 हजार छोटे-बड़े वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं।
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पड़ताल में उजागर खामियां : संवाद टीम ने हाईवे पर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। जिला रोड सेफ्टी बैठकों में किए जा रहे दावे हकीकत से कोसों दूर मिले। सड़क सुरक्षा के लिए अनिवार्य तीनों प्रकार के बोर्ड- आदेशात्मक, संकेतात्मक और सूचनात्मक, हाईवे पर या तो टूटे पड़े मिले या पूरी तरह गायब थे। कई स्थानों पर सिर्फ पोल खड़े थे, जबकि यह भी पता लगाना मुश्किल था कि कहां तीव्र मोड़ है, कहां संकरे पुल हैं और कहां डेंजर प्वाइंट।
यही नहीं, सड़क की एज लाइन (लंबी सफेद पट्टी) और सेंटर लाइन (बीच-बीच में बनी पट्टियां) भी लगभग मिट चुकी हैं। धुंध के मौसम में ये पट्टियां वाहन चालकों को दिशा और सड़क की सीमाओं का संकेत देती हैं। इनके अभाव में दुर्घटनाओं का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
डीसी प्रीति ने संबंधित विभागों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सभी सड़कों पर साइन बोर्ड, सफेद पट्टी, रिफ्लेक्टर आदि तुरंत लगाए जाएं, ताकि धुंध के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सड़क सुरक्षा मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
क्यों जरूरी हैं एज लाइन और सेंटर लाइन
n एज लाइन (लंबी सफेद पट्टी) रात और धुंध में सड़क का किनारा साफ दिखाती है, जिससे वाहन नीचे उतरने से बचते हैं।
n सेंटर लाइन (बीच-बीच में बनी पट्टियां) भारी और हल्के वाहनों की सही लेन तय करती है, जिससे आमने-सामने की टक्करों का खतरा कम होता है।
n पट्टियों और रिफ्लेक्टिव साइन की अनुपस्थिति में चालक भ्रमित हो जाते हैं, खासकर कम दृश्यता में।
n सड़क सुरक्षा नियमों के अनुसार हाईवे पर इनका साफ और रिफ्लेक्टिव होना अनिवार्य है, लेकिन एनएच-65 पर इनका कहीं अता-पता नहीं।
सफेद पट्टी और संकेतक बोर्ड की अनुपस्थिति के कारण
n प्रशासन और संबंधित विभाग सड़क सुरक्षा के लिए आवश्यक मानकों को लागू करने में विफल हो रहे हैं।
n सफेद पट्टियां और संकेतक बोर्ड रात और खराब मौसम में ड्राइवरों को सही दिशा में रहने में मदद करते हैं। इनके न होने से दुर्घटनाएं हो सकती हैं।
n सड़क निर्माण और रखरखाव में लापरवाही के कारण पट्टियां और बोर्ड गायब हो गए हैं।
n खराब रखरखाव के कारण ये पट्टियां और बोर्ड धुंधले हो जाते हैं या पूरी तरह से गायब हो जाते हैं, जिससे ड्राइवरों को भ्रम होता है।
n कोहरे जैसी स्थिति में भी प्रशासन इन समस्याओं से निपटने के लिए तैयार नहीं है।

एनएच-65 पर खड़े पोल से गायब संकेतक बोर्ड। संवाद- फोटो : बाबा जनवारीनाथ धाम में मंगल आरती करते श्रद्धालु।

एनएच-65 पर खड़े पोल से गायब संकेतक बोर्ड। संवाद- फोटो : बाबा जनवारीनाथ धाम में मंगल आरती करते श्रद्धालु।