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Kaithal News: श्रेष्ठ लघुकथा के लिए डॉ. हरीश, डॉ. तेजिंद्र सम्मानित
Tue, 16 Sep 2025 01:10 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Tue, 16 Sep 2025 01:10 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। युवक साहित्य सदन में सोमवार को अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में साहित्य सभा के दो साहित्यकारों को डॉ. हरीश चंद्र और डॉ. तेजिंद्र को श्रेष्ठ लघुकथा लेखन के लिए सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान राजस्थान के वरिष्ठ लघुकथाकार रामकुमार घोटड़ और समाजसेवी ललित मोहन जैन ने उन्हें दिया।
सम्मेलन में डॉ. हरीश चंद्र ने अपनी लघुकथा उदासीनता का धुआं प्रस्तुत की। इसकी समीक्षा बिहार से आए लघुकथा-समीक्षक सिद्धेश्वर ने की। उन्होंने कहा कि इस रचना में अकेलेपन से जूझ रही महिला का मार्मिक चित्रण है। संकेतों के प्रयोग और आत्मालाप शैली ने लघुकथा को प्रभावशाली बना दिया।
लघुकथा-सम्मेलन में डॉ. तेजिंद्र ने बेचारी हिंदी का पाठ किया। इसकी समीक्षा पंजाब से आए समीक्षक योगराज प्रभाकर ने की। उन्होंने कहा कि यह लघुकथा वर्तमान भाषाई व्यवहार पर प्रहार करती है। अंग्रेज़ी के प्रति पढ़े-लिखे परिवारों के आकर्षण और हिंदी की
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मौजूदा स्थिति को सटीक रूप में उजागर करती है।
सम्मेलन में पंजाब, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा के कई लघुकथाकारों ने भाग लिया। इस अवसर पर शिक्षाविद् पवन कुमार, हरियाणा प्रादेशिक हिंदी साहित्य सम्मेलन सिरसा के संरक्षक एवं मुख्य संयोजक प्रो. रूप देवगुण भी मौजूद रहे।
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कैथल। युवक साहित्य सदन में सोमवार को अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में साहित्य सभा के दो साहित्यकारों को डॉ. हरीश चंद्र और डॉ. तेजिंद्र को श्रेष्ठ लघुकथा लेखन के लिए सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान राजस्थान के वरिष्ठ लघुकथाकार रामकुमार घोटड़ और समाजसेवी ललित मोहन जैन ने उन्हें दिया।
सम्मेलन में डॉ. हरीश चंद्र ने अपनी लघुकथा उदासीनता का धुआं प्रस्तुत की। इसकी समीक्षा बिहार से आए लघुकथा-समीक्षक सिद्धेश्वर ने की। उन्होंने कहा कि इस रचना में अकेलेपन से जूझ रही महिला का मार्मिक चित्रण है। संकेतों के प्रयोग और आत्मालाप शैली ने लघुकथा को प्रभावशाली बना दिया।
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लघुकथा-सम्मेलन में डॉ. तेजिंद्र ने बेचारी हिंदी का पाठ किया। इसकी समीक्षा पंजाब से आए समीक्षक योगराज प्रभाकर ने की। उन्होंने कहा कि यह लघुकथा वर्तमान भाषाई व्यवहार पर प्रहार करती है। अंग्रेज़ी के प्रति पढ़े-लिखे परिवारों के आकर्षण और हिंदी की
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मौजूदा स्थिति को सटीक रूप में उजागर करती है।
सम्मेलन में पंजाब, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा के कई लघुकथाकारों ने भाग लिया। इस अवसर पर शिक्षाविद् पवन कुमार, हरियाणा प्रादेशिक हिंदी साहित्य सम्मेलन सिरसा के संरक्षक एवं मुख्य संयोजक प्रो. रूप देवगुण भी मौजूद रहे।