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चंद पैसों का लालच व पेचे की लड़ाई में जीत की चाह बन रही है जानलेवा
Updated Wed, 26 Jul 2017 11:48 PM IST
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चंद पैसों की लालच और पेच की लड़ाई में जीत की चाह बन रही है जानलेवा
अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सुप्रीम कोर्ट ने चाईनीज मांझे की बिक्री पर बेशक रोक लगा दी है। लेकिन चंद पैसों की लालच व पेच की लड़ाई में जीत की चाह लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। चाईनीज मांझे ने बुधवार को त्योहार के दिन दो परिवारों की खुशियों को लील लिया। जो परिवार तीज की खुशी में मग्न थे, अब वे सात वर्षीय बच्ची व एक बैंक कर्मचारी की जिंदगी की दुआ कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लोगों सहित पक्षियों के लिए खतरनाक साबित हो चुके चाईनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाई हुई है। इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले से चाईनीज मांझा बिक रहा है। जिस कारण सात वर्षीय मासूम एकता अपने पिता के साथ बाइक पर जाते समय इसकी चपेट में आ गई। सामान्य डोर होती तो जोर पड़ने पर वह टूट जाती। लेकिन चूंकि यह चाईनीज मांझा था तो बच्ची की गर्दन को गहरे तक काट गया। पहली कक्षा की छात्रा एकता का निजी अस्पताल में ऑपरेशन करना पड़ा।
इसी प्रकार से अपना काम समाप्त कर घर जा रहे बाइक सवार बैंक कर्मचारी कृष्ण कुमार की गर्दन को उससे भी गहरे तक काट दिया। कृष्ण का डेढ़ साल पहले विवाह हुआ था। बुधवार को काम खत्म करके तीज की खुशियों में शामिल होने के लिए परिवार के पास जा रहा था कि रास्ते में चाईनीज डोर की चपेट में आ गया। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। जिला अस्पताल सहित निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे बड़े अस्पताल में ले जाने के लिए कहा है। कृष्ण के परिजनों गांव वासी जोगेंद्र, प्रवेश कुमार सहित मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि जब एक वस्तु प्रतिबंधित हो चुकी है तो उसे क्यों बेचा जा रहा है। ऐसे दुकानदारों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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वहीं पतंग उड़ाने के जानकारों का कहना है कि यदि पेच लड़ाई में जीत हासिल करनी है तो चाईनीज मांझे को केवल चाईनीज मांझे से ही काटा जा सकता है। इसी जीत की लालच में लोग चाईनीज मांझा खरीदते हैं।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि वीरवार को ही इस बारे में अधिकारियों से बात कर ड्यूटी लगाई जाएगी कि प्रतिबंधित मांझा न बिके। ऐसे दुकानदारों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो चाईनीज मांझा बेचते हुए पकड़े जाएंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। सुप्रीम कोर्ट ने चाईनीज मांझे की बिक्री पर बेशक रोक लगा दी है। लेकिन चंद पैसों की लालच व पेच की लड़ाई में जीत की चाह लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। चाईनीज मांझे ने बुधवार को त्योहार के दिन दो परिवारों की खुशियों को लील लिया। जो परिवार तीज की खुशी में मग्न थे, अब वे सात वर्षीय बच्ची व एक बैंक कर्मचारी की जिंदगी की दुआ कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लोगों सहित पक्षियों के लिए खतरनाक साबित हो चुके चाईनीज मांझे की बिक्री पर रोक लगाई हुई है। इसके बावजूद शहर में धड़ल्ले से चाईनीज मांझा बिक रहा है। जिस कारण सात वर्षीय मासूम एकता अपने पिता के साथ बाइक पर जाते समय इसकी चपेट में आ गई। सामान्य डोर होती तो जोर पड़ने पर वह टूट जाती। लेकिन चूंकि यह चाईनीज मांझा था तो बच्ची की गर्दन को गहरे तक काट गया। पहली कक्षा की छात्रा एकता का निजी अस्पताल में ऑपरेशन करना पड़ा।
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इसी प्रकार से अपना काम समाप्त कर घर जा रहे बाइक सवार बैंक कर्मचारी कृष्ण कुमार की गर्दन को उससे भी गहरे तक काट दिया। कृष्ण का डेढ़ साल पहले विवाह हुआ था। बुधवार को काम खत्म करके तीज की खुशियों में शामिल होने के लिए परिवार के पास जा रहा था कि रास्ते में चाईनीज डोर की चपेट में आ गया। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। जिला अस्पताल सहित निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे बड़े अस्पताल में ले जाने के लिए कहा है। कृष्ण के परिजनों गांव वासी जोगेंद्र, प्रवेश कुमार सहित मौके पर मौजूद लोगों ने कहा कि जब एक वस्तु प्रतिबंधित हो चुकी है तो उसे क्यों बेचा जा रहा है। ऐसे दुकानदारों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
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वहीं पतंग उड़ाने के जानकारों का कहना है कि यदि पेच लड़ाई में जीत हासिल करनी है तो चाईनीज मांझे को केवल चाईनीज मांझे से ही काटा जा सकता है। इसी जीत की लालच में लोग चाईनीज मांझा खरीदते हैं।
डीसी सुनीता वर्मा ने कहा कि वीरवार को ही इस बारे में अधिकारियों से बात कर ड्यूटी लगाई जाएगी कि प्रतिबंधित मांझा न बिके। ऐसे दुकानदारों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो चाईनीज मांझा बेचते हुए पकड़े जाएंगे।