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Kaithal News: मकर संक्रांति पर 19 वर्ष बाद बन रहा भौम पुष्य योग

Mon, 13 Jan 2025 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Mon, 13 Jan 2025 01:49 AM IST
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Bhaum Pushya Yoga being formed on Makar Sankranti after 19 years
कैथल। इस बार मकर संक्रांति पर्व यानी 14 जनवरी 2025 को बेहद शुभ योग बन रहा है। इस दिन भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही भौम पुष्य योग भी बन रहा है अर्थात मंगलवार के दिन पुष्य नक्षत्र का होना भौम पुष्य योग कहलाता है। जिससे सूर्य के साथ उसके मित्र मंगल का भी शुभ संयोग है, जिससे दान पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होगी।
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जहां सूर्य आपका मान सम्मान बढ़ाएगा वही मंगल आपको भूमि जमीन जायदाद का लाभ देगा। यह जानकारी गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक पंडित रामराज कौशिक ने दी है। बताया कि खास बात यह है कि 19 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें दान, पुण्य आध्यात्मिक कार्यों से अक्षय पुण्य फल मिलता है। यह ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है। इसमें दान, पुण्य आध्यात्मिक कार्यों से अक्षय पुण्य फल मिलता है।
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इस साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस बार माघ कृष्ण प्रतिपदा में पुनर्वसु व पुष्य नक्षत्र के युग्म संयोग में मकर संक्रांति का पर्व बहुत शुभता के साथ मनाया जाएगा। 14 जनवरी को प्रातः काल 10 बजकर 17 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र और इसके पश्चात पूरे दिन पुष्य नक्षत्र रहेगा।सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने से खरमास का समापन हो जाएगा। इसके बाद मांगलिक कार्य का सिलसिला आरंभ हो जाएगा।
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भगवान सूर्य 14 जनवरी को प्रातः काल आठ बजकर 41 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसका पुण्यकाल पूरे दिन रहेगा। इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान कर सूर्यदेव की पूजा कर दान-पुण्य करने के साथ मकर संक्रांति का पर्व मनाएंगे।
उन्होंने बताया कि यह दिन भगवान सूर्य की पूजा का दिन है। इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, दान-पुण्य करते हैं और सूर्य देव की आराधना करते हैं। सांस्कृतिक रूप से, यह पर्व नई फसल के आगमन की खुशी का प्रतीक है। इस दिन तिल और गुड़ से बनी चीजें खाई जाती हैं और पतंगें उड़ाई जाती हैं। खगोलीय दृष्टि से इस दिन सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होता है, जिससे दिन बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं।

रामराज कौशिक ने बताया की तिल शुद्धि का प्रतीक है। तिल का दान करने से स्वास्थ्य लाभ और शांति मिलती है। इस दिन कई लोग तिल और गुड़ के बने लड्डू भी दान करते हैं। मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ के दान से कुंडली में शनि और सूर्य दोष का निवारण होता है। गुड़ का दान मधुरता और सकारात्मकता लाता है। मकर संक्रांति पर गुड़ दान करना आपके जन्म कुण्डली में सूर्य की स्थिति मजबूत करता है। इस दिन चावल, गेहूं, दाल और बाजरा जैसे अन्न का दान करना शुभ माना जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न दान करने से धन-धान्य की वृद्धि होती है। मकर संक्रांति पर खिचड़ी का दान करना शुभ माना गया है।
मकर संक्रांति के दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है, लेकिन दान करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
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