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Kaithal News: बायोगैस संयंत्र से सालाना 50 से 60 हजार की बचत

Sun, 30 Apr 2023 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल Updated Sun, 30 Apr 2023 12:45 AM IST
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Annual savings of 50 to 60 thousand from biogas plant
कैथल। गांव बात्ता का किसान विनोद राणा ने घर पर बायोगैस संयंत्र लगाकर अच्छी बचत कर रहे हैं। इसके साथ संयंत्र से निकलने वाली खाद से वह ऑर्गेनिक खेती कर रहे हैं।
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किसान विनोद कुमार ने बताया कि उसने एक साल पहले ही कृषि विभाग की सहायता से बायोगैस का संयंत्र लगाया था। एक साल में उसे 50 से 60 हजार रुपये की बचत हुई। इसके साथ ही जैविक खेती को भी फायदा मिला है।
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गौरतलब है कि पहले उनके एक साल में घर पर 20 सिलिंडर की खपत थी। रोजाना उनके घर पर सुबह, दोपहर व रात को 20 लोगों को खाना बनता था। बायोगैस संयंत्र लगने के बाद खाना तो उतने की लोगों का तैयार होता है। इसके अलावा पशुओं के लिए चाट, गर्म पानी, चाय, दूध सहित अन्य कार्य भी गैस के जरिए ही होने लगे हैं।
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किसान विनोद राणा ने बताया कि बायोगैस संयंत्र लगने के बाद गैस की निरंतर सप्लाई जारी है। इस संयंत्र से पहले सिलिंडर खत्म होते ही सिलिंडर की बुकिंग के लिए गांव में सिलिंडर बांटने वाली ट्राली का इंतजार करना पड़ता था।

सिलिंडर मिलने के बाद ही दोबारा से काम शुरू किया जाता था। अब बिना किसी रुकावट के कार्य चलता रहता है। किसी भी प्रकार की दुर्गंध नहीं और गैस सिलिंडर फटने का खतरा भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी किसान खेतीबाड़ी और पशुपालन एक साथ करता है तो उन्हें अपने घर पर बायोगैस संयंत्र जरूर लगवाना चाहिए। ताकि उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो सके। संवाद

संयंत्र से निकलने वाली खाद्य का खेतों में प्रयोग

किसान विनोद राणा ने बताया कि इस बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली खाद का खेतों में प्रयोग कर रहा है। इससे खेतों की उर्वरक शक्ति तो बढ़ी ही है। इससे उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष संयंत्र से पहले उसके खेत में गेहूं की फसलों में 20 से 21 मन गेहूं का प्रति एकड़ पैदावार हुई थी। इस बार जैविक खाद डालने से उसके खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ गई।

अबकी बार गेहूं का उत्पादन 35 मन प्रति एकड़ हुआ है। उसने गेहूं बेचने के लिए मंडी में भी जाना नहीं पड़ा। घर से ही गांव के लोग गेहूं को खरीदकर ले गए। इसके अलावा वह जैविक तरीके से ही पशुओं के लिए हरा चारा बरसीम, ज्वार का उत्पादन करता है। इस चारा के खाने से पशुओं के दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि बायोगैस संयंत्र लगाने से सरकारी की ओर से भी उसे 12 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली है।

बायोगैस संयंत्र लगाने पर सरकार से 12000 का प्रोत्साहन की राशि दी जाती है। इससे घर पर प्रयोग करने के लिए पर्याप्त मात्रा में गैस मिलती है। इसके साथ ही जैविक खेती करने के लिए खाद्य मिलता है। जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती और उत्पादन अच्छा होता है। जैविक हरा चारा होने से पशुओं के दूध में बढ़ोतरी होती है। इससे किसान को घर के लिए गैस और खेत के लिए एक बेहतर खाद प्राप्त होती है। जिससे खेत में अतिरिक्त खाद पर भी कम खर्च होता है। 

जगदीश मलिक, सहायक कृषि अभियंता, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग
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