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Kaithal News: लोक अदालत में समझौते से निपटे 6783 मामले
Sun, 10 Mar 2024 02:27 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
संवाद न्यूज एजेंसी, कैथल
Updated Sun, 10 Mar 2024 02:27 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष व जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु वाईके बहल की देखरेख में शनिवार को न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई। इस मौके पर सुलह-समझौते के आधार पर 6783 मामलों का निपटारा किया गया।
इस लोक अदालत में कृष्णकांत, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मानविका यादव, अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (सिनियर डिवीजन), अनिता रानी सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन), रेखा चौधरी सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन), अश्वनी गुप्ता, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन)
कैथल, श्रीमती ईशा गर्ग सिविल न्यायाधीश
(जूनियर डिवीजन) गुहला डिविजन के बैंच गठित किए गए थे।
प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दानिश गुप्ता ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 11,103 लंबित मामलों को रखा गया था, जिसमें से 6783 मामलों का निपटारा किया गया। कुल मुबलिक पांच करोड़ 91 लाख 13 हजार 234 की राशि के विभिन्न आपराधिक, एन आई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन, श्रम से संबंधित विवाद मामले, राजस्व मामले अन्य मामलों का इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से निपटारा किया गया है।
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उन्होंने बताया कि लोक अदालत एक ऐसी अदालत है जिसमें मामलों (विवादों) का निपटारा पक्षकारों की पारस्परिक सहमति से किया जाता है। इसमें न किसी पक्षकार की जीत होती न हार। दोनों पक्षों में पुन: स्नेह, सौहार्द एवं बंधुत्व का भाव उत्पन्न हो जाता है। लोक अदालत की विशेषता है कि यह शीघ्र व सस्ते न्याय का स्त्रोत है। इसे जनता की अदालत भी कहा जाता है। लोक अदालत की विशेषता है कि इसमें कोई न्यायालय शुल्क नहीं है और यदि न्यायालय शुल्क का भुगतान पहले ही कर दिया गया है, तो लोक अदालत में विवाद का निपटारा होने पर इसे वापस कर दिया जाता है। लोक अदालत में मामले का निपटारा तुरंत हो जाता है और सभी को न्याय आसानी से मिल जाता है।
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कैथल। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष व जिला एवं सत्र न्यायाधीश रितु वाईके बहल की देखरेख में शनिवार को न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत लगाई। इस मौके पर सुलह-समझौते के आधार पर 6783 मामलों का निपटारा किया गया।
इस लोक अदालत में कृष्णकांत, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, मानविका यादव, अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (सिनियर डिवीजन), अनिता रानी सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन), रेखा चौधरी सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन), अश्वनी गुप्ता, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन)
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कैथल, श्रीमती ईशा गर्ग सिविल न्यायाधीश
(जूनियर डिवीजन) गुहला डिविजन के बैंच गठित किए गए थे।
प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दानिश गुप्ता ने बताया कि इस राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 11,103 लंबित मामलों को रखा गया था, जिसमें से 6783 मामलों का निपटारा किया गया। कुल मुबलिक पांच करोड़ 91 लाख 13 हजार 234 की राशि के विभिन्न आपराधिक, एन आई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन, श्रम से संबंधित विवाद मामले, राजस्व मामले अन्य मामलों का इस राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से निपटारा किया गया है।
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उन्होंने बताया कि लोक अदालत एक ऐसी अदालत है जिसमें मामलों (विवादों) का निपटारा पक्षकारों की पारस्परिक सहमति से किया जाता है। इसमें न किसी पक्षकार की जीत होती न हार। दोनों पक्षों में पुन: स्नेह, सौहार्द एवं बंधुत्व का भाव उत्पन्न हो जाता है। लोक अदालत की विशेषता है कि यह शीघ्र व सस्ते न्याय का स्त्रोत है। इसे जनता की अदालत भी कहा जाता है। लोक अदालत की विशेषता है कि इसमें कोई न्यायालय शुल्क नहीं है और यदि न्यायालय शुल्क का भुगतान पहले ही कर दिया गया है, तो लोक अदालत में विवाद का निपटारा होने पर इसे वापस कर दिया जाता है। लोक अदालत में मामले का निपटारा तुरंत हो जाता है और सभी को न्याय आसानी से मिल जाता है।