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Kaithal News: 30 एंबुलेंस की जरूरत, 21 ही लोगों की सेवाओं में दौड़ रहीं
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सिविल अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
कैथल। जिले में एंबुलेंस की कमी के कारण आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बना हुआ है। आठ जर्जर एंबुलेंस मरम्मत के बाद भी रूटों पर दौड़ रही हैं। जिले में आपातकालीन सेवाओं के लिए 30 एंबुलेंस की जरूरत है, जबकि फिलहाल 21 से काम चलाया जा रहा है। इनमें आठ एंबुलेंस 2018 और 2019 मॉडल की हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 10 नई एंबुलेंस उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा है।
विभाग की योजना दिसंबर तक इन पुरानी गाड़ियों को रूटों से हटाने की है। ऐसे में नई एंबुलेंस मिलने तक मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बना हुआ है। करीब दो महीने पहले जिले को तीन नई एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस भी मिली थीं, लेकिन इसके बावजूद जरूरत के अनुसार एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। वहीं, एक नई एंबुलेंस का इस्तेमाल ज्यादातर मंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में होता है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रोहतक और चंडीगढ़ जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए पुरानी एंबुलेंस पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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गंभीर मरीजों के लिए मिली थीं तीन एएलएस एंबुलेंस
नई एएलएस एंबुलेंस में गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए आधुनिक उपकरण हैं। इनकी मदद से मरीजों को रेफर करते समय रास्ते में भी जीवनरक्षक उपचार दिया जा सकता है। हालांकि, जिले में एंबुलेंस की कुल जरूरत और पुरानी गाड़ियों की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त वाहनों की आवश्यकता बनी हुई है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी एंबुलेंस की जरूरत
मरीज राजबीर, मनोज, बंटी व सुरेश कुमार ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्तर पर भी एंबुलेंस की जरूरत रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों से गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या दूसरे बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने में इनकी अहम भूमिका है। ऐसे में पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि मरीजों को समय पर परिवहन सुविधा मिल सके।
इन मामलों में सबसे ज्यादा पड़ती है एंबुलेंस की जरूरत
प्रसव व गर्भावस्था : गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना और प्रसव में जटिलता होने पर रेफर करना।
सड़क हादसे : दुर्घटना में घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाना।
दिल का दौरा : हृदय संबंधी गंभीर परेशानी वाले मरीजों को अस्पताल ले जाना।
सांस लेने में परेशानी : ऑक्सीजन की कमी और गंभीर सांस संबंधी समस्या वाले मरीज।
स्ट्रोक व बेहोशी : अचानक बेहोश होने, दौरे पड़ने या लकवे जैसे लक्षणों वाले मरीज।
गंभीर चोटें : सिर में चोट, अधिक खून बहना और जलने के मामले।
नवजात व बच्चे : गंभीर हालत में बच्चों को उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना।
रेफरल मामले : जिला नागरिक अस्पताल और सीएचसी से रोहतक, चंडीगढ़ सहित बड़े चिकित्सा केंद्रों तक मरीजों को ले जाना।
10 नई एंबुलेंस के लिए मुख्यालय को लिखा है। वहीं मरीजों के लिए समय पर एंबुलेंस उपलब्ध करवाई जा रही है। किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जा रही है। - रेणू चावला, सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग कैथल।
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कैथल। जिले में एंबुलेंस की कमी के कारण आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बना हुआ है। आठ जर्जर एंबुलेंस मरम्मत के बाद भी रूटों पर दौड़ रही हैं। जिले में आपातकालीन सेवाओं के लिए 30 एंबुलेंस की जरूरत है, जबकि फिलहाल 21 से काम चलाया जा रहा है। इनमें आठ एंबुलेंस 2018 और 2019 मॉडल की हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 10 नई एंबुलेंस उपलब्ध करवाने के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा है।
विभाग की योजना दिसंबर तक इन पुरानी गाड़ियों को रूटों से हटाने की है। ऐसे में नई एंबुलेंस मिलने तक मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बना हुआ है। करीब दो महीने पहले जिले को तीन नई एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) एंबुलेंस भी मिली थीं, लेकिन इसके बावजूद जरूरत के अनुसार एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। वहीं, एक नई एंबुलेंस का इस्तेमाल ज्यादातर मंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में होता है। ऐसे में गंभीर मरीजों को रोहतक और चंडीगढ़ जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए पुरानी एंबुलेंस पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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गंभीर मरीजों के लिए मिली थीं तीन एएलएस एंबुलेंस
नई एएलएस एंबुलेंस में गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के दौरान जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए आधुनिक उपकरण हैं। इनकी मदद से मरीजों को रेफर करते समय रास्ते में भी जीवनरक्षक उपचार दिया जा सकता है। हालांकि, जिले में एंबुलेंस की कुल जरूरत और पुरानी गाड़ियों की स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त वाहनों की आवश्यकता बनी हुई है।
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ग्रामीण क्षेत्रों में भी एंबुलेंस की जरूरत
मरीज राजबीर, मनोज, बंटी व सुरेश कुमार ने बताया कि जिला नागरिक अस्पताल के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्तर पर भी एंबुलेंस की जरूरत रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों से गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल या दूसरे बड़े चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाने में इनकी अहम भूमिका है। ऐसे में पर्याप्त संख्या में एंबुलेंस उपलब्ध होना जरूरी है, ताकि मरीजों को समय पर परिवहन सुविधा मिल सके।
इन मामलों में सबसे ज्यादा पड़ती है एंबुलेंस की जरूरत
प्रसव व गर्भावस्था : गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना और प्रसव में जटिलता होने पर रेफर करना।
सड़क हादसे : दुर्घटना में घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाना।
दिल का दौरा : हृदय संबंधी गंभीर परेशानी वाले मरीजों को अस्पताल ले जाना।
सांस लेने में परेशानी : ऑक्सीजन की कमी और गंभीर सांस संबंधी समस्या वाले मरीज।
स्ट्रोक व बेहोशी : अचानक बेहोश होने, दौरे पड़ने या लकवे जैसे लक्षणों वाले मरीज।
गंभीर चोटें : सिर में चोट, अधिक खून बहना और जलने के मामले।
नवजात व बच्चे : गंभीर हालत में बच्चों को उच्च चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाना।
रेफरल मामले : जिला नागरिक अस्पताल और सीएचसी से रोहतक, चंडीगढ़ सहित बड़े चिकित्सा केंद्रों तक मरीजों को ले जाना।
10 नई एंबुलेंस के लिए मुख्यालय को लिखा है। वहीं मरीजों के लिए समय पर एंबुलेंस उपलब्ध करवाई जा रही है। किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जा रही है। - रेणू चावला, सीएमओ, स्वास्थ्य विभाग कैथल।