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हरियाणा मानव अधिकार आयोग की टीम पहुंची हिसार

Sat, 12 Mar 2016 12:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार
ब्यूरो/अमर उजाला, हिसार Updated Sat, 12 Mar 2016 12:55 AM IST
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हरियाणा मानव अधिकार आयोग की टीम पहुंची हिसार - फोटो : bureau

हरियाणा मानव अधिकार आयोग की टीम शुक्रवार को हिसार पहुंची तो कोई पीड़ित अपनी शिकायत लेकर नहीं आया। संगठनों के सदस्य दस्तावेज, सीडी, फोटो और वीडियो क्लिप लेकर आयोग के समक्ष पहुंचे। इन लोगों ने करीब दो घंटे तक मौखिक तौर पर भी शिकायत की।

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आयोग ने कहा कि लिखित शिकायतें दें, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके। आयोग के एससी गोयल ने दो टूक कहा कि हरियाणा में 35 साल नौकरी की, लेकिन इतनी खौफनाक मंजर कभी नहीं देखा।
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इससे पहले हरियाणा मानव अधिकार के डिप्टी रजिस्ट्रार रिटायर्ड जज एससी गोयल हांसी दौरा कर शाम को हिसार रेस्ट हाउस पहुंचे। आयोग की टीम के समक्ष दस अलग-अलग संगठनों ने शिकायतों के साथ सबूत भी सौंपे। इन लोगों ने कहा कि इस प्रकरण की सीबीआई से जांच कराई जाए।
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दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए काम करें। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि इस साजिश को अंजाम देने के लिए यूपी से हजारों लोग हरियाणा में आए। यशपाल मलिक, हवा सिंह सांगवान के खिलाफ केस दर्ज किया जाए। सरकार वार्ता की बजाय उनकी गिरफ्तारी करे। हम कौन सा आरक्षण दे रहे थे। ऐसा लगा कि कुछ लोग लोकतंत्र को लठतंत्र से चलाना चाहते थे। आयोग सदस्य ने डीसी डॉ. चंद्रशेखर खरे, एसपी अश्विनी शैणवी, एसडीएम अशोक बंसल के साथ मीटिंग की। आयोग ने अधिकारियों से कई बारे में रिपोर्ट ली।

लोकतंत्र सुरक्षा मंच की ओर से हनुमान वर्मा ने कहा कि 1990 से आरक्षण आंदोलन का दंश झेल रहे हैं। 1990 के बाद 2009, अब 2016 में हरियाणा को आग के हवाले किया गया। अगर सरकार हमारी रक्षा करने में नाकाम रही तो इस बार हम खुद मोर्चा संभालेंगे। हमने सीडी सौंप दी है, इसकी जांच कर दोषियों को सजा दिलाओ।

सवर्जन समाज मंच की ओर से नंदकिशोर चावला ने कहा कि 2010 में हमारी 9 दुकानों को जलाया गया था। अब तक मुआवजा नहीं मिला। इस प्रकरण में प्रदेेश के डीजीपी का खराब रोल रहा। उन पर भी कार्रवाई की जाए। इतनी अंधेरगर्दी हमने पहले कभी नहीं देखी। ट्रेंड लोगों ने इसे अंजाम दिया।

देशराज कंबोज ने कहा कि प्रशासन की ओर से हमारे लोगों पर ही मामले दर्ज किए जा रहे हैं। आंदोलन का हक सभी को है, लेकिन आंदोलन के नाम पर सड़क रोकना, रेल रोकने का अधिकार किसी को नहीं। यह आंदोलन प्री प्लान था। आंदोलन शुरू करने वालों पर कार्रवाई सबसे पहले हो।

सैनी सभा ट्रस्ट के सदस्यों ने आयोग को अपनी लिखित शिकायत देकर पांच मांगें रखीं। इस प्रकरण की सीबीआई से जांच हो। जाट उपद्रवियों पर देशद्रोह का केस दर्ज करें। 35 बिरादरी के खिलाफ बने झूठे मुकदमे वापस लिए जाएं। गैर जाट समाज के मृतकों को एक करोड़ रुपये, सरकारी नौकरी और शहीद का दर्जा दिया जाए।

मोनू रतनलाल ने कहा कि सरकार पहले एक्शन ले लेती तो यह कांड नहीं होता। इसकी पूरी भरपाई उपद्रवियों से की जाए। अब 14 को फिर से जाट आरक्षण को लेकर प्रदर्शन का एलान किया गया है। प्रशासन की ओर से बताया जाए कि इसके लिए क्या प्रबंध किए गए हैं।

पीड़ितों की ओर से दी जा रही शिकायतों को सुनते हुए आयोग टीम के सदस्य एससी गोयल ने कहा कि मैंने हरियाणा में 35 साल नौकरी की। जिंदगी में पहली बार ऐसी वहशीयत देखी है। जिस तरह से घरों को सिलेंडर लगाकर उड़ाया गया। घर में ऐसा कोई सामान नहीं बचा, जिसे उपयोग किया जा सके।

आयोग के प्रतिनिधि एससी गोयल ने कहा कि तीन जातियों सैनी, गुर्जर और यादव को ही सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। आयोग को हांसी में छह लोगों ने लिखित शिकायतें दी हैैं। आयोग ने रेलवे स्टेेशन जलाए जाने, मनुक नहर का पानी रोकने पर सिंचाई विभाग, 17 हजार पेड़ काटने पर वन विभाग को नोटिस देकर जवाब मांगा है।

इन विभागों को 18 मार्च को अपनी रिपोर्ट देनी होगी। उन्होंने कहा कि आयोग की ओर से दो बार नोटिस जारी किए गए हैं। आयोग की अलग-अलग टीमें प्रदेश भर में निरीक्षण कर जायजा ले रही हैं। तीन महीने में रिपोर्ट तैयार कर सौंप देंगे।

एससी गोयल ने कहा कि हमने पीड़ितों के घरों में जाकर बात की। लोगों ने प्रशासन के सहयोग को सराहा। प्रशासन और पुलिस की तारीफ की। एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ लापरवाही बरतने की बात कही गई। हम अपनी रिपोर्ट में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सिफारिश करेंगे।

आयोग के समक्ष पांच लोगों ने अलग-अलग मोबाइल क्लिप चलाकर दिखाईं, जिनमें भड़काऊ भाषणों को दिखाया गया। आयोग के सदस्यों ने करीब दो घंटे तक लोगों की शिकायतें सुनीं। इसकी पूरी वीडियो रिकॉर्ड की गई। क्लिप को आयोग सदस्यों ने सीडी में और व्हाट्स ऐप के जरिये अपने रिकॉर्ड में लिया।


शिकायत देने पहुंचे एक वकील ने अपने मोबाइल में रोहतक में उपद्रवियों के आगे होकर भागती पुलिस की अपने मोबाइल पर विडियो क्लिप दिखाई। वकील ने कहा कि संविधान के अनुसार ड्यूटी छोड़कर भागने पर पुलिस के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें बर्खास्त किया जा सकता है। आयोग इन पुलिस कर्मचारियों पर कार्रवाई करे।

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