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घर में ही लड़ी घूंघट के खिलाफ लड़ाई
ब्यूरो/अमर उजाला, फतेहाबाद
Updated Tue, 08 Mar 2016 12:34 AM IST
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महिला दिवस
- फोटो : fatehabad
समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने का बीड़ा उठाने से पहले नेहा मित्तल को भी घर में ही कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। शादी के बाद नए घर आई तो घूंघट प्रथा से सामना हुआ। लेकिन फतेहाबाद की नेहा को महिलाओं के हालात बदलने थे, सो शुरुआत घर से की। घर की महिलाओं और पुरुषों को घूंघट प्रथा हटाने के लिए मनाया। घूंघट प्रथा से छुटकारा मिला तो घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। नेहा बताती भी हैं कि मेरा घर से बाहर जाना पसंद नहीं था लेकिन मैंने इसका रास्ता खोजा। मैं जरूरतमंदों महिलाओं को सिलाई, ब्यूटी पार्लर और आत्मरक्षा के लिए ट्रेनिंग देने का काम घर पर ही शुरू कर दिया। मेरी लगन देखकर घर के पुरुषों को भी मुझ पर विश्वास जागा और उनके विश्वास की बदौलत आज मैं समाज में अपना एक अलग मुकाम बना सकी हूं। नेहा कई संस्थाओं की सदस्य हैं और लड़कियों व महिलाओं के लिए स्वयं रोजगार कोर्स भी चला रही हैं।
दंपति को पिता ने गुंडों से बचाया तो जागा जज्बा
नेहा को समाज सेवा का जज्बा पिता सुंदर श्याम अग्रवाल से मिला है। छोटी थी तो पिता के साथ मार्केट जा रही थी। रास्ते में कुछ गुंडों ने एक दंपति पर हमला कर दिया। पिता ने गुंडों का सामना करते हुए दंपति को बचाया। यहीं से प्रेरणा मिली कि मैं भी कुछ करूं। शादी के बाद पति सुरेंद्र मित्तल ने हौसला बढ़ाया और मैंने अपने समाज सेवा का काम घर से शुरू किया।
उल्लेखनीय योगदान के लिए होंगी सम्मानित
महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे उल्लेखनीय कामों के चलते प्रदेश सरकार 9 मार्च को नेहा मित्तल को इंदिरा गांधी महिला शक्ति अवॉर्ड से सम्मानित करेगी। इससे पहले मंत्री कविता जैन रोहतक में, पूर्व विधायक सावित्री जिंदल से अग्रोहा में सम्मानित हो चुकी हैं। जिला प्रशासन की तरफ से 15 अगस्त 2015 को सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
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महिलाएं अपनी रक्षा खुद कर सकें इसके लिए सेल्फ डिफरेंस कोर्स चल रहे हैं। दूसरा यह है कि महिलाएं व लड़कियां खुद के पैरों पर खड़े हो सकें किसी का मुंह न ताकना पड़े, इसके लिए विभिन्न प्रकार के कोर्स करवा रहीं हूं। जब लड़कियां यहां से सीख अपना रोजगार शुरू करती हैं तो दिल खुश होता है। नोडल सैल के जरिए टूटते घरों को भी बसाया है। मैं तो ये ही कहूंगी कि उड़ान हौसलों से होती है, पंखों से नहीं, करने का जज्बा होना चाहिए मंजिल खुद मिल जाती है। नेहा मित्तल, समाजसेवी
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दंपति को पिता ने गुंडों से बचाया तो जागा जज्बा
नेहा को समाज सेवा का जज्बा पिता सुंदर श्याम अग्रवाल से मिला है। छोटी थी तो पिता के साथ मार्केट जा रही थी। रास्ते में कुछ गुंडों ने एक दंपति पर हमला कर दिया। पिता ने गुंडों का सामना करते हुए दंपति को बचाया। यहीं से प्रेरणा मिली कि मैं भी कुछ करूं। शादी के बाद पति सुरेंद्र मित्तल ने हौसला बढ़ाया और मैंने अपने समाज सेवा का काम घर से शुरू किया।
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उल्लेखनीय योगदान के लिए होंगी सम्मानित
महिला सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे उल्लेखनीय कामों के चलते प्रदेश सरकार 9 मार्च को नेहा मित्तल को इंदिरा गांधी महिला शक्ति अवॉर्ड से सम्मानित करेगी। इससे पहले मंत्री कविता जैन रोहतक में, पूर्व विधायक सावित्री जिंदल से अग्रोहा में सम्मानित हो चुकी हैं। जिला प्रशासन की तरफ से 15 अगस्त 2015 को सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
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महिलाएं अपनी रक्षा खुद कर सकें इसके लिए सेल्फ डिफरेंस कोर्स चल रहे हैं। दूसरा यह है कि महिलाएं व लड़कियां खुद के पैरों पर खड़े हो सकें किसी का मुंह न ताकना पड़े, इसके लिए विभिन्न प्रकार के कोर्स करवा रहीं हूं। जब लड़कियां यहां से सीख अपना रोजगार शुरू करती हैं तो दिल खुश होता है। नोडल सैल के जरिए टूटते घरों को भी बसाया है। मैं तो ये ही कहूंगी कि उड़ान हौसलों से होती है, पंखों से नहीं, करने का जज्बा होना चाहिए मंजिल खुद मिल जाती है। नेहा मित्तल, समाजसेवी